कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १०५ / १६३ № 105 of 163 रचना १०५ / १६३
४ मार्च २०१५ 4 March 2015 ४ मार्च २०१५

जाग उठी है जग में होली jaag uthee hai jag men holee जाग उठी है जग में होली

फगुनाहट से जाग उठी है

जग में होली।

रंग पलाशों से लेकर जन

हुए रँगीले।

साथ फब रहे लाल हरे,

केसरिया पीले।

सूखे को मुँह चिढ़ा रहे रंग

गीले हँसकर,

भंग चढ़ा पकवान हो गए

और रसीले।

पिचकारी पर फिदा हो रही,

कोरी चोली।

मौसम बदला, नर्म हवा ने

पाँव पसारे।

खारे जल के ताल हो गए

मीठे सारे।

चूस-चूस कर आम कोकिला

सुर में कुहकी

आए मिलने गले ज़मी से

phagunaahat se jaag uthee hai

·

jag men holee

·

rang palaashon se lekar jan

·

hue rangeele

·

saath phab rahe laal hare,

·

kesariyaa peele

·

sookhe ko munh chiढ़aa rahe rang

·

geele hansakar,

·

bhang chढ़aa pakawaan ho gae

·

aur raseele

·

pichakaaree par phidaa ho rahee,

·

koree cholee

·

mausam badalaa, narm hawaa ne

·

paanv pasaare

·

khaare jal ke taal ho gae

·

meethe saare

·

choos-choos kar aam kokilaa

·

sur men kuhakee

·

aae milane gale zamee se

फगुनाहट से जाग उठी है

जग में होली।

रंग पलाशों से लेकर जन

हुए रँगीले।

साथ फब रहे लाल हरे,

केसरिया पीले।

सूखे को मुँह चिढ़ा रहे रंग

गीले हँसकर,

भंग चढ़ा पकवान हो गए

और रसीले।

पिचकारी पर फिदा हो रही,

कोरी चोली।

मौसम बदला, नर्म हवा ने

पाँव पसारे।

खारे जल के ताल हो गए

मीठे सारे।

चूस-चूस कर आम कोकिला

सुर में कुहकी

आए मिलने गले ज़मी से

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗