जाग उठी है जग में होली jaag uthee hai jag men holee जाग उठी है जग में होली
फगुनाहट से जाग उठी है
जग में होली।
रंग पलाशों से लेकर जन
हुए रँगीले।
साथ फब रहे लाल हरे,
केसरिया पीले।
सूखे को मुँह चिढ़ा रहे रंग
गीले हँसकर,
भंग चढ़ा पकवान हो गए
और रसीले।
पिचकारी पर फिदा हो रही,
कोरी चोली।
मौसम बदला, नर्म हवा ने
पाँव पसारे।
खारे जल के ताल हो गए
मीठे सारे।
चूस-चूस कर आम कोकिला
सुर में कुहकी
आए मिलने गले ज़मी से
phagunaahat se jaag uthee hai
jag men holee
rang palaashon se lekar jan
hue rangeele
saath phab rahe laal hare,
kesariyaa peele
sookhe ko munh chiढ़aa rahe rang
geele hansakar,
bhang chढ़aa pakawaan ho gae
aur raseele
pichakaaree par phidaa ho rahee,
koree cholee
mausam badalaa, narm hawaa ne
paanv pasaare
khaare jal ke taal ho gae
meethe saare
choos-choos kar aam kokilaa
sur men kuhakee
aae milane gale zamee se
फगुनाहट से जाग उठी है
जग में होली।
रंग पलाशों से लेकर जन
हुए रँगीले।
साथ फब रहे लाल हरे,
केसरिया पीले।
सूखे को मुँह चिढ़ा रहे रंग
गीले हँसकर,
भंग चढ़ा पकवान हो गए
और रसीले।
पिचकारी पर फिदा हो रही,
कोरी चोली।
मौसम बदला, नर्म हवा ने
पाँव पसारे।
खारे जल के ताल हो गए
मीठे सारे।
चूस-चूस कर आम कोकिला
सुर में कुहकी
आए मिलने गले ज़मी से