कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १०५ / १६४ № 105 of 164 रचना १०५ / १६४
४ मार्च २०१५ 4 March 2015 ४ मार्च २०१५

जाग उठी है जग में होली jaag uthee hai jag men holee जाग उठी है जग में होली

फगुनाहट से जाग उठी है

॥

जग में होली।

॥

रंग पलाशों से लेकर जन

॥

हुए रँगीले।

॥

साथ फब रहे लाल हरे,

॥

केसरिया पीले।

॥

सूखे को मुँह चिढ़ा रहे रंग

॥

गीले हँसकर,

॥

भंग चढ़ा पकवान हो गए

॥

और रसीले।

॥

पिचकारी पर फिदा हो रही,

॥

कोरी चोली।

॥

मौसम बदला, नर्म हवा ने

॥

पाँव पसारे।

॥

खारे जल के ताल हो गए

॥

मीठे सारे।

॥

चूस-चूस कर आम कोकिला

॥

सुर में कुहकी

॥

आए मिलने गले ज़मी से

phagunaahat se jaag uthee hai

·

jag men holee

·

rang palaashon se lekar jan

·

hue rangeele

·

saath phab rahe laal hare,

·

kesariyaa peele

·

sookhe ko munh chiढ़aa rahe rang

·

geele hansakar,

·

bhang chढ़aa pakawaan ho gae

·

aur raseele

·

pichakaaree par phidaa ho rahee,

·

koree cholee

·

mausam badalaa, narm hawaa ne

·

paanv pasaare

·

khaare jal ke taal ho gae

·

meethe saare

·

choos-choos kar aam kokilaa

·

sur men kuhakee

·

aae milane gale zamee se

फगुनाहट से जाग उठी है

॥

जग में होली।

॥

रंग पलाशों से लेकर जन

॥

हुए रँगीले।

॥

साथ फब रहे लाल हरे,

॥

केसरिया पीले।

॥

सूखे को मुँह चिढ़ा रहे रंग

॥

गीले हँसकर,

॥

भंग चढ़ा पकवान हो गए

॥

और रसीले।

॥

पिचकारी पर फिदा हो रही,

॥

कोरी चोली।

॥

मौसम बदला, नर्म हवा ने

॥

पाँव पसारे।

॥

खारे जल के ताल हो गए

॥

मीठे सारे।

॥

चूस-चूस कर आम कोकिला

॥

सुर में कुहकी

॥

आए मिलने गले ज़मी से

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗