चलो मीत मिलजुल के होली मनाएँ chalo meet milajul ke holee manaaen चलो मीत मिलजुल के होली मनाएँ
हुई
हैं गुलाबी, हठीली हवाएँ
चलो
मीत मिलजुल के होली मनाएँ
जो
बोनस में बेचैनियाँ बाँध लाए
उमंगों
के रंगों में उनको बहाएँ
तहाकर
झमेलों की बेरंग गादी
कि
मस्ती की सतरंगी चादर बिछाएँ
जो
पल-प्रीत लाया है चुन-चुन के फागुन
उन्हें
गीत की धुन बना गुनगुनाएँ
जिसे
ढूँढते हैं सितारों से आगे
ज़मीं
पर ही वो आज दुनिया बसाएँ
ये
दिन चार घर में नहीं बैठने के
निकल
महफिलों को मवाली बनाएँ
पलाशों
पे होता मगन मास फागुन
उन्हें
पाश में बाँध,
आँगन में लाएँ
वरें
यह विरासत नई पीढ़ियाँ ज्यों
उन्हें
होलिका की कहानी सुनाएँ
बसे!
‘कल्पना’ पर्व यादों के दिल में
यही
याद हो और सब भूल जाएँ
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
huee
hain gulaabee, hatheelee hawaaen
chalo
meet milajul ke holee manaaen
jo
bonas men bechainiyaan baandh laae
umangon
ke rangon men unako bahaaen
tahaakar
jhamelon kee berang gaadee
ki
mastee kee satarangee chaadar bichaaen
jo
pal-preet laayaa hai chun-chun ke phaagun
unhen
geet kee dhun banaa gunagunaaen
jise
dhoondhate hain sitaaron se aage
zameen
par hee wo aaj duniyaa basaaen
ye
din chaar ghar men naheen baithane ke
nikal
mahaphilon ko mawaalee banaaen
palaashon
pe hotaa magan maas phaagun
unhen
paash men baandh,
aangan men laaen
waren
yah wiraasat naee peeढ़iyaan jyon
unhen
holikaa kee kahaanee sunaaen
base!
‘kalpanaa’ parv yaadon ke dil men
yahee
yaad ho aur sab bhool jaaen
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
हुई
हैं गुलाबी, हठीली हवाएँ
चलो
मीत मिलजुल के होली मनाएँ
जो
बोनस में बेचैनियाँ बाँध लाए
उमंगों
के रंगों में उनको बहाएँ
तहाकर
झमेलों की बेरंग गादी
कि
मस्ती की सतरंगी चादर बिछाएँ
जो
पल-प्रीत लाया है चुन-चुन के फागुन
उन्हें
गीत की धुन बना गुनगुनाएँ
जिसे
ढूँढते हैं सितारों से आगे
ज़मीं
पर ही वो आज दुनिया बसाएँ
ये
दिन चार घर में नहीं बैठने के
निकल
महफिलों को मवाली बनाएँ
पलाशों
पे होता मगन मास फागुन
उन्हें
पाश में बाँध,
आँगन में लाएँ
वरें
यह विरासत नई पीढ़ियाँ ज्यों
उन्हें
होलिका की कहानी सुनाएँ
बसे!
‘कल्पना’ पर्व यादों के दिल में
यही
याद हो और सब भूल जाएँ
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी