कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७२ / २०४ № 72 of 204 रचना ७२ / २०४
३ मार्च २०१५ 3 March 2015 ३ मार्च २०१५

चलो मीत मिलजुल के होली मनाएँ chalo meet milajul ke holee manaaen चलो मीत मिलजुल के होली मनाएँ

हुई

हैं गुलाबी, हठीली हवाएँ

चलो

मीत मिलजुल के होली मनाएँ

जो

बोनस में बेचैनियाँ बाँध लाए

उमंगों

के रंगों में उनको बहाएँ

तहाकर

झमेलों की बेरंग गादी

कि

मस्ती की सतरंगी चादर बिछाएँ

जो

पल-प्रीत लाया है चुन-चुन के फागुन

उन्हें

गीत की धुन बना गुनगुनाएँ

जिसे

ढूँढते हैं सितारों से आगे

ज़मीं

पर ही वो आज दुनिया बसाएँ

ये

दिन चार घर में नहीं बैठने के

निकल

महफिलों को मवाली बनाएँ

पलाशों

पे होता मगन मास फागुन

उन्हें

पाश में बाँध,

आँगन में लाएँ

वरें

यह विरासत नई पीढ़ियाँ ज्यों

उन्हें

होलिका की कहानी सुनाएँ

बसे!

‘कल्पना’ पर्व यादों के दिल में

यही

याद हो और सब भूल जाएँ

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

huee

hain gulaabee, hatheelee hawaaen

·

chalo

meet milajul ke holee manaaen

·

jo

bonas men bechainiyaan baandh laae

·

umangon

ke rangon men unako bahaaen

·

tahaakar

jhamelon kee berang gaadee

·

ki

mastee kee satarangee chaadar bichaaen

·

jo

pal-preet laayaa hai chun-chun ke phaagun

·

unhen

geet kee dhun banaa gunagunaaen

·

jise

dhoondhate hain sitaaron se aage

·

zameen

par hee wo aaj duniyaa basaaen

·

ye

din chaar ghar men naheen baithane ke

·

nikal

mahaphilon ko mawaalee banaaen

·

palaashon

pe hotaa magan maas phaagun

·

unhen

paash men baandh,

aangan men laaen

·

waren

yah wiraasat naee peeढ़iyaan jyon

·

unhen

holikaa kee kahaanee sunaaen

·

base!

‘kalpanaa’ parv yaadon ke dil men

·

yahee

yaad ho aur sab bhool jaaen

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

हुई

हैं गुलाबी, हठीली हवाएँ

चलो

मीत मिलजुल के होली मनाएँ

जो

बोनस में बेचैनियाँ बाँध लाए

उमंगों

के रंगों में उनको बहाएँ

तहाकर

झमेलों की बेरंग गादी

कि

मस्ती की सतरंगी चादर बिछाएँ

जो

पल-प्रीत लाया है चुन-चुन के फागुन

उन्हें

गीत की धुन बना गुनगुनाएँ

जिसे

ढूँढते हैं सितारों से आगे

ज़मीं

पर ही वो आज दुनिया बसाएँ

ये

दिन चार घर में नहीं बैठने के

निकल

महफिलों को मवाली बनाएँ

पलाशों

पे होता मगन मास फागुन

उन्हें

पाश में बाँध,

आँगन में लाएँ

वरें

यह विरासत नई पीढ़ियाँ ज्यों

उन्हें

होलिका की कहानी सुनाएँ

बसे!

‘कल्पना’ पर्व यादों के दिल में

यही

याद हो और सब भूल जाएँ

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗