कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७१ / २०४ № 71 of 204 रचना ७१ / २०४
२ मार्च २०१५ 2 March 2015 २ मार्च २०१५

रंग नए जब भू पर छाएँ, फागुन होता rang nae jab bhoo par chaaen, phaagun hotaa रंग नए जब भू पर छाएँ, फागुन होता

रंग

नए जब भू पर छाएँ, फागुन होता

संग

प्रेम की पुरवा लाएँ, फागुन होता

बगिया

से रस-गंध-रूप की दावत पाकर

कलियों

पर मधुकर मंडराएँ, फागुन होता

बौर-भार

से लदी डालियाँ चूम धरा को

अपनी

किस्मत पर इतराएँ, फागुन होता

घुटी

भंग से भरे घटों में घुल-मिल जाने

गुल

पलाश के दौड़े आएँ, फागुन होता

कंठ

फुलाकर काग-कोकिला, मोर-पपीहे

गीतों

से आकाश गुँजाएँ, फागुन होता

मिलते

ही संदेश, प्रणय-रस घुली हवा से

प्रियम, प्रिया से

मिलने धाएँ, फागुन होता

पिचकारी, नूपुर, गुलाल, गुब्बारे जब मिल

साथ

“कल्पना” पर्व मनाएँ, फागुन होता

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

rang

nae jab bhoo par chaaen, phaagun hotaa

·

sang

prem kee purawaa laaen, phaagun hotaa

·

bagiyaa

se ras-gandh-roop kee daawat paakar

·

kaliyon

par madhukar mandaraaen, phaagun hotaa

·

baur-bhaar

se ladee daaliyaan choom dharaa ko

·

apanee

kismat par itaraaen, phaagun hotaa

·

ghutee

bhang se bhare ghaton men ghul-mil jaane

·

gul

palaash ke daude aaen, phaagun hotaa

·

kanth

phulaakar kaag-kokilaa, mor-papeehe

·

geeton

se aakaash gunjaaen, phaagun hotaa

·

milate

hee sandesh, pranay-ras ghulee hawaa se

·

priyam, priyaa se

milane dhaaen, phaagun hotaa

·

pichakaaree, noopur, gulaal, gubbaare jab mil

·

saath

“kalpanaa” parv manaaen, phaagun hotaa

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

रंग

नए जब भू पर छाएँ, फागुन होता

संग

प्रेम की पुरवा लाएँ, फागुन होता

बगिया

से रस-गंध-रूप की दावत पाकर

कलियों

पर मधुकर मंडराएँ, फागुन होता

बौर-भार

से लदी डालियाँ चूम धरा को

अपनी

किस्मत पर इतराएँ, फागुन होता

घुटी

भंग से भरे घटों में घुल-मिल जाने

गुल

पलाश के दौड़े आएँ, फागुन होता

कंठ

फुलाकर काग-कोकिला, मोर-पपीहे

गीतों

से आकाश गुँजाएँ, फागुन होता

मिलते

ही संदेश, प्रणय-रस घुली हवा से

प्रियम, प्रिया से

मिलने धाएँ, फागुन होता

पिचकारी, नूपुर, गुलाल, गुब्बारे जब मिल

साथ

“कल्पना” पर्व मनाएँ, फागुन होता

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗