कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १०४ / १६४ № 104 of 164 रचना १०४ / १६४
२८ फ़रवरी २०१५ 28 February 2015 २८ फ़रवरी २०१५

आ गया फागुन सखी aa gayaa phaagun sakhee आ गया फागुन सखी

आ गया फागुन सखी

॥

बहने लगी सुखकर

॥

हवा।

॥

गोद वसुधा की भरी,

॥

नव पुष्प-पल्लव अंकुरन

से।

॥

प्रेम-रंग की गागरी

॥

ले आई ऋतु खिलते चमन से।

॥

व्योम के पट पर सखी,

॥

रंगों भरी छाई

॥

घटा।

॥

द्वार, देहरी, घर सजे,

॥

आँगन रची हैं अल्पनाएँ।

॥

पाँव पायल बाँध कर,

॥

इठला रहीं नव यौवनाएँ।

॥

सोम-रस छलका सखी,

॥

मद में भरी महकी

॥

फिजा।

॥

कोकिला की तान से,

॥

धुन बाँसुरी की याद आई।

॥

गोरियों के रूप

aa gayaa phaagun sakhee

·

bahane lagee sukhakar

·

hawaa

·

god wasudhaa kee bharee,

·

naw pushp-pallaw ankuran

se

·

prem-rang kee gaagaree

·

le aaee riitu khilate chaman se

·

wyom ke pat par sakhee,

·

rangon bharee chaaee

·

ghataa

·

dvaar, deharee, ghar saje,

·

aangan rachee hain alpanaaen

·

paanv paayal baandh kar,

·

ithalaa raheen naw yauwanaaen

·

som-ras chalakaa sakhee,

·

mad men bharee mahakee

·

phijaa

·

kokilaa kee taan se,

·

dhun baansuree kee yaad aaee

·

goriyon ke roop

आ गया फागुन सखी

॥

बहने लगी सुखकर

॥

हवा।

॥

गोद वसुधा की भरी,

॥

नव पुष्प-पल्लव अंकुरन

से।

॥

प्रेम-रंग की गागरी

॥

ले आई ऋतु खिलते चमन से।

॥

व्योम के पट पर सखी,

॥

रंगों भरी छाई

॥

घटा।

॥

द्वार, देहरी, घर सजे,

॥

आँगन रची हैं अल्पनाएँ।

॥

पाँव पायल बाँध कर,

॥

इठला रहीं नव यौवनाएँ।

॥

सोम-रस छलका सखी,

॥

मद में भरी महकी

॥

फिजा।

॥

कोकिला की तान से,

॥

धुन बाँसुरी की याद आई।

॥

गोरियों के रूप

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗