आ गया फागुन सखी aa gayaa phaagun sakhee आ गया फागुन सखी
आ गया फागुन सखी
बहने लगी सुखकर
हवा।
गोद वसुधा की भरी,
नव पुष्प-पल्लव अंकुरन
से।
प्रेम-रंग की गागरी
ले आई ऋतु खिलते चमन से।
व्योम के पट पर सखी,
रंगों भरी छाई
घटा।
द्वार, देहरी, घर सजे,
आँगन रची हैं अल्पनाएँ।
पाँव पायल बाँध कर,
इठला रहीं नव यौवनाएँ।
सोम-रस छलका सखी,
मद में भरी महकी
फिजा।
कोकिला की तान से,
धुन बाँसुरी की याद आई।
गोरियों के रूप
aa gayaa phaagun sakhee
bahane lagee sukhakar
hawaa
god wasudhaa kee bharee,
naw pushp-pallaw ankuran
se
prem-rang kee gaagaree
le aaee riitu khilate chaman se
wyom ke pat par sakhee,
rangon bharee chaaee
ghataa
dvaar, deharee, ghar saje,
aangan rachee hain alpanaaen
paanv paayal baandh kar,
ithalaa raheen naw yauwanaaen
som-ras chalakaa sakhee,
mad men bharee mahakee
phijaa
kokilaa kee taan se,
dhun baansuree kee yaad aaee
goriyon ke roop
आ गया फागुन सखी
बहने लगी सुखकर
हवा।
गोद वसुधा की भरी,
नव पुष्प-पल्लव अंकुरन
से।
प्रेम-रंग की गागरी
ले आई ऋतु खिलते चमन से।
व्योम के पट पर सखी,
रंगों भरी छाई
घटा।
द्वार, देहरी, घर सजे,
आँगन रची हैं अल्पनाएँ।
पाँव पायल बाँध कर,
इठला रहीं नव यौवनाएँ।
सोम-रस छलका सखी,
मद में भरी महकी
फिजा।
कोकिला की तान से,
धुन बाँसुरी की याद आई।
गोरियों के रूप