कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १०४ / १६३ № 104 of 163 रचना १०४ / १६३
२८ फ़रवरी २०१५ 28 February 2015 २८ फ़रवरी २०१५

आ गया फागुन सखी aa gayaa phaagun sakhee आ गया फागुन सखी

आ गया फागुन सखी

बहने लगी सुखकर

हवा।

गोद वसुधा की भरी,

नव पुष्प-पल्लव अंकुरन

से।

प्रेम-रंग की गागरी

ले आई ऋतु खिलते चमन से।

व्योम के पट पर सखी,

रंगों भरी छाई

घटा।

द्वार, देहरी, घर सजे,

आँगन रची हैं अल्पनाएँ।

पाँव पायल बाँध कर,

इठला रहीं नव यौवनाएँ।

सोम-रस छलका सखी,

मद में भरी महकी

फिजा।

कोकिला की तान से,

धुन बाँसुरी की याद आई।

गोरियों के रूप

aa gayaa phaagun sakhee

·

bahane lagee sukhakar

·

hawaa

·

god wasudhaa kee bharee,

·

naw pushp-pallaw ankuran

se

·

prem-rang kee gaagaree

·

le aaee riitu khilate chaman se

·

wyom ke pat par sakhee,

·

rangon bharee chaaee

·

ghataa

·

dvaar, deharee, ghar saje,

·

aangan rachee hain alpanaaen

·

paanv paayal baandh kar,

·

ithalaa raheen naw yauwanaaen

·

som-ras chalakaa sakhee,

·

mad men bharee mahakee

·

phijaa

·

kokilaa kee taan se,

·

dhun baansuree kee yaad aaee

·

goriyon ke roop

आ गया फागुन सखी

बहने लगी सुखकर

हवा।

गोद वसुधा की भरी,

नव पुष्प-पल्लव अंकुरन

से।

प्रेम-रंग की गागरी

ले आई ऋतु खिलते चमन से।

व्योम के पट पर सखी,

रंगों भरी छाई

घटा।

द्वार, देहरी, घर सजे,

आँगन रची हैं अल्पनाएँ।

पाँव पायल बाँध कर,

इठला रहीं नव यौवनाएँ।

सोम-रस छलका सखी,

मद में भरी महकी

फिजा।

कोकिला की तान से,

धुन बाँसुरी की याद आई।

गोरियों के रूप

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗