कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२ / १६३ № 12 of 163 रचना १२ / १६३
१५ जनवरी २०१३ 15 January 2013 १५ जनवरी २०१३

मेहनत की हुई डोर खफा mehanat kee huee dor khaphaa मेहनत की हुई डोर खफा

घटना बढ़ना दिन का दिनकर

नियम सदा से कुदरत का।

नई सुबह की नव किरणों संग

राहत का संदेश सुना।

परिवर्तन की परिभाषाएँ

जीना हमें सिखाएँगी।

लहू शीत ने जमा दिया था

समय-धार पिघलाएगी।

कोहरे के काले बादल पर

धूप लगाएगी तड़का।

उडी पतंगें, कटी पतंगें

देख हृदय में हूक उठी।

मिला किसी को नया आसमां

और किसी की डोर कटी।

हार घटेगी, जीत बढ़ेगी

यही सत्य इस जीवन का।

ghatanaa bढ़naa din kaa dinakar

niyam sadaa se kudarat kaa

naee subah kee naw kiranon sang

raahat kaa sandesh sunaa

·

pariwartan kee paribhaashaaen

jeenaa hamen sikhaaengee

lahoo sheet ne jamaa diyaa thaa

samay-dhaar pighalaaegee

kohare ke kaale baadal par

dhoop lagaaegee tadakaa

·

udee patangen, katee patangen

dekh hriiday men hook uthee

milaa kisee ko nayaa aasamaan

aur kisee kee dor katee

haar ghategee, jeet bढ़egee

yahee saty is jeewan kaa

घटना बढ़ना दिन का दिनकर

नियम सदा से कुदरत का।

नई सुबह की नव किरणों संग

राहत का संदेश सुना।

परिवर्तन की परिभाषाएँ

जीना हमें सिखाएँगी।

लहू शीत ने जमा दिया था

समय-धार पिघलाएगी।

कोहरे के काले बादल पर

धूप लगाएगी तड़का।

उडी पतंगें, कटी पतंगें

देख हृदय में हूक उठी।

मिला किसी को नया आसमां

और किसी की डोर कटी।

हार घटेगी, जीत बढ़ेगी

यही सत्य इस जीवन का।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗