मेहनत की हुई डोर खफा mehanat kee huee dor khaphaa मेहनत की हुई डोर खफा
घटना बढ़ना दिन का दिनकर
नियम सदा से कुदरत का।
नई सुबह की नव किरणों संग
राहत का संदेश सुना।
परिवर्तन की परिभाषाएँ
जीना हमें सिखाएँगी।
लहू शीत ने जमा दिया था
समय-धार पिघलाएगी।
कोहरे के काले बादल पर
धूप लगाएगी तड़का।
उडी पतंगें, कटी पतंगें
देख हृदय में हूक उठी।
मिला किसी को नया आसमां
और किसी की डोर कटी।
हार घटेगी, जीत बढ़ेगी
यही सत्य इस जीवन का।
ghatanaa bढ़naa din kaa dinakar
niyam sadaa se kudarat kaa
naee subah kee naw kiranon sang
raahat kaa sandesh sunaa
pariwartan kee paribhaashaaen
jeenaa hamen sikhaaengee
lahoo sheet ne jamaa diyaa thaa
samay-dhaar pighalaaegee
kohare ke kaale baadal par
dhoop lagaaegee tadakaa
udee patangen, katee patangen
dekh hriiday men hook uthee
milaa kisee ko nayaa aasamaan
aur kisee kee dor katee
haar ghategee, jeet bढ़egee
yahee saty is jeewan kaa
घटना बढ़ना दिन का दिनकर
नियम सदा से कुदरत का।
नई सुबह की नव किरणों संग
राहत का संदेश सुना।
परिवर्तन की परिभाषाएँ
जीना हमें सिखाएँगी।
लहू शीत ने जमा दिया था
समय-धार पिघलाएगी।
कोहरे के काले बादल पर
धूप लगाएगी तड़का।
उडी पतंगें, कटी पतंगें
देख हृदय में हूक उठी।
मिला किसी को नया आसमां
और किसी की डोर कटी।
हार घटेगी, जीत बढ़ेगी
यही सत्य इस जीवन का।