नारी जहाँ सताई जाए naaree jahaan sataaee jaae नारी जहाँ सताई जाए
बहुत
विश्व में अब भी कोने
नारी
जहाँ सताई जाए।
जिसने
अक्षर कभी पढ़े ना
कविता
उसको कौन सुनाए।
मिलते
नहीं पेट भर दाने
पिसती
लेकिन दानों जैसी।
चीखें
रुदन दबा अंतर में।
पिटती
वो हैवानों जैसी।
स्वजनों
को सींचे अमृत से।
स्वयं
हलाहल प्याला पाए।
व्यथा
कथा यह उस नारी की
जिस
पर नज़र न कोई जाती।
समानता के
दावे झूठे
नर
होते नारी पर
हावी।
कभी
प्यार के बोल सुने ना
गीत
छंद
bahut
wishv men ab bhee kone
naaree
jahaan sataaee jaae
jisane
akshar kabhee pढ़e naa
kawitaa
usako kaun sunaae
milate
naheen pet bhar daane
pisatee
lekin daanon jaisee
cheekhen
rudan dabaa antar men
pitatee
wo haiwaanon jaisee
svajanon
ko seenche amriit se
svayan
halaahal pyaalaa paae
wyathaa
kathaa yah us naaree kee
jis
par nazar n koee jaatee
samaanataa ke
daawe jhoothe
nar
hote naaree par
haawee
kabhee
pyaar ke bol sune naa
geet
chand
बहुत
विश्व में अब भी कोने
नारी
जहाँ सताई जाए।
जिसने
अक्षर कभी पढ़े ना
कविता
उसको कौन सुनाए।
मिलते
नहीं पेट भर दाने
पिसती
लेकिन दानों जैसी।
चीखें
रुदन दबा अंतर में।
पिटती
वो हैवानों जैसी।
स्वजनों
को सींचे अमृत से।
स्वयं
हलाहल प्याला पाए।
व्यथा
कथा यह उस नारी की
जिस
पर नज़र न कोई जाती।
समानता के
दावे झूठे
नर
होते नारी पर
हावी।
कभी
प्यार के बोल सुने ना
गीत
छंद