कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ३७ / १६३ № 37 of 163 रचना ३७ / १६३
२२ सितम्बर २०१३ 22 September 2013 २२ सितम्बर २०१३

नारी जहाँ सताई जाए naaree jahaan sataaee jaae नारी जहाँ सताई जाए

बहुत

विश्व में अब भी कोने

नारी

जहाँ सताई जाए।

जिसने

अक्षर कभी पढ़े ना

कविता

उसको कौन सुनाए।

मिलते

नहीं पेट भर दाने

पिसती

लेकिन दानों जैसी।

चीखें

रुदन दबा अंतर में।

पिटती

वो हैवानों जैसी।

स्वजनों

को सींचे अमृत से।

स्वयं

हलाहल प्याला पाए।

व्यथा

कथा यह उस नारी की

जिस

पर नज़र न कोई जाती।

समानता के

दावे झूठे

नर

होते नारी पर

हावी।

कभी

प्यार के बोल सुने ना

गीत

छंद

bahut

wishv men ab bhee kone

naaree

jahaan sataaee jaae

jisane

akshar kabhee pढ़e naa

kawitaa

usako kaun sunaae

·

milate

naheen pet bhar daane

pisatee

lekin daanon jaisee

cheekhen

rudan dabaa antar men

pitatee

wo haiwaanon jaisee

·

svajanon

ko seenche amriit se

svayan

halaahal pyaalaa paae

·

wyathaa

kathaa yah us naaree kee

jis

par nazar n koee jaatee

samaanataa ke

daawe jhoothe

nar

hote naaree par

haawee

·

kabhee

pyaar ke bol sune naa

geet

chand

बहुत

विश्व में अब भी कोने

नारी

जहाँ सताई जाए।

जिसने

अक्षर कभी पढ़े ना

कविता

उसको कौन सुनाए।

मिलते

नहीं पेट भर दाने

पिसती

लेकिन दानों जैसी।

चीखें

रुदन दबा अंतर में।

पिटती

वो हैवानों जैसी।

स्वजनों

को सींचे अमृत से।

स्वयं

हलाहल प्याला पाए।

व्यथा

कथा यह उस नारी की

जिस

पर नज़र न कोई जाती।

समानता के

दावे झूठे

नर

होते नारी पर

हावी।

कभी

प्यार के बोल सुने ना

गीत

छंद

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗