सदा सद्भाव हों मन में sadaa sadbhaaw hon man men सदा सद्भाव हों मन में
सदा
सद्भाव हों मन में,
जहाँ हर काम से पहले।
न
डर होता वहाँ कोई,
किसी अंजाम से पहले।
दुखों
के पथ पे चलकर ही,
सुखों का द्वार है खुलता,
सुखद
छाया नहीं मिलती, प्रखरतम
घाम से पहले।
पसीना
बिन बहाए तो, नहीं हासिल चबेना भी।
चबाने
हैं चने लोहे के,
रसमय आम से पहले।
अगन
में द्वेष की जलते, निपट
मन मूढ़ जो इंसान,
सुखों
का सूर्य ढल जाता, है
उनका शाम से पहले।
कदम
चूमेंगी खुद मंज़िल,
तुम्हारे मन-मुदित होकर,
ललक
हो लक्ष्य पाने की,
अगर आराम से पहले।
कभी
भी मित्र या मेहमाँ,
लुभाते वे नहीं मन को,
चले
आते अचानक जो, किसी पैगाम से पहले।
पुराणों
से सुना हमने, बहाना प्रेम का था वो,
थी
राधा को मुरलिया धुन, लुभाती
श्याम से पहले।
मेरी
तन्हाइयों की जब, कभी
होगी कहीं चर्चा,
‘तुम्हारा नाम भी आएगा, मेरे नाम से पहले’।
कदम
तो ‘कल्पना’ मयखाने, आ
पहुँचे तेरे चलकर,
नतीजा
सोच ले मयकश! सुराही जाम से पहले।
--------कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
sadaa
sadbhaaw hon man men,
jahaan har kaam se pahale
n
dar hotaa wahaan koee,
kisee anjaam se pahale
dukhon
ke path pe chalakar hee,
sukhon kaa dvaar hai khulataa,
sukhad
chaayaa naheen milatee, prakharatam
ghaam se pahale
paseenaa
bin bahaae to, naheen haasil chabenaa bhee
chabaane
hain chane lohe ke,
rasamay aam se pahale
agan
men dvesh kee jalate, nipat
man mooढ़ jo insaan,
sukhon
kaa soory dhal jaataa, hai
unakaa shaam se pahale
kadam
choomengee khud manzil,
tumhaare man-mudit hokar,
lalak
ho lakshy paane kee,
agar aaraam se pahale
kabhee
bhee mitr yaa mehamaan,
lubhaate we naheen man ko,
chale
aate achaanak jo, kisee paigaam se pahale
puraanon
se sunaa hamane, bahaanaa prem kaa thaa wo,
thee
raadhaa ko muraliyaa dhun, lubhaatee
shyaam se pahale
meree
tanhaaiyon kee jab, kabhee
hogee kaheen charchaa,
‘tumhaaraa naam bhee aaegaa, mere naam se pahale’
kadam
to ‘kalpanaa’ mayakhaane, aa
pahunche tere chalakar,
nateejaa
soch le mayakash! suraahee jaam se pahale
--------kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
सदा
सद्भाव हों मन में,
जहाँ हर काम से पहले।
न
डर होता वहाँ कोई,
किसी अंजाम से पहले।
दुखों
के पथ पे चलकर ही,
सुखों का द्वार है खुलता,
सुखद
छाया नहीं मिलती, प्रखरतम
घाम से पहले।
पसीना
बिन बहाए तो, नहीं हासिल चबेना भी।
चबाने
हैं चने लोहे के,
रसमय आम से पहले।
अगन
में द्वेष की जलते, निपट
मन मूढ़ जो इंसान,
सुखों
का सूर्य ढल जाता, है
उनका शाम से पहले।
कदम
चूमेंगी खुद मंज़िल,
तुम्हारे मन-मुदित होकर,
ललक
हो लक्ष्य पाने की,
अगर आराम से पहले।
कभी
भी मित्र या मेहमाँ,
लुभाते वे नहीं मन को,
चले
आते अचानक जो, किसी पैगाम से पहले।
पुराणों
से सुना हमने, बहाना प्रेम का था वो,
थी
राधा को मुरलिया धुन, लुभाती
श्याम से पहले।
मेरी
तन्हाइयों की जब, कभी
होगी कहीं चर्चा,
‘तुम्हारा नाम भी आएगा, मेरे नाम से पहले’।
कदम
तो ‘कल्पना’ मयखाने, आ
पहुँचे तेरे चलकर,
नतीजा
सोच ले मयकश! सुराही जाम से पहले।
--------कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी