कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १८ / २०४ № 18 of 204 रचना १८ / २०४
३० सितम्बर २०१३ 30 September 2013 ३० सितम्बर २०१३

सदा सद्भाव हों मन में sadaa sadbhaaw hon man men सदा सद्भाव हों मन में

सदा

सद्भाव हों मन में,

जहाँ हर काम से पहले।

डर होता वहाँ कोई,

किसी अंजाम से पहले।

दुखों

के पथ पे चलकर ही,

सुखों का द्वार है खुलता,

सुखद

छाया नहीं मिलती, प्रखरतम

घाम से पहले।

पसीना

बिन बहाए तो, नहीं हासिल चबेना भी।

चबाने

हैं चने लोहे के,

रसमय आम से पहले।

अगन

में द्वेष की जलते, निपट

मन मूढ़ जो इंसान,

सुखों

का सूर्य ढल जाता, है

उनका शाम से पहले।

कदम

चूमेंगी खुद मंज़िल,

तुम्हारे मन-मुदित होकर,

ललक

हो लक्ष्य पाने की,

अगर आराम से पहले।

कभी

भी मित्र या मेहमाँ,

लुभाते वे नहीं मन को,

चले

आते अचानक जो, किसी पैगाम से पहले।

पुराणों

से सुना हमने, बहाना प्रेम का था वो,

थी

राधा को मुरलिया धुन, लुभाती

श्याम से पहले।

मेरी

तन्हाइयों की जब, कभी

होगी कहीं चर्चा,

‘तुम्हारा नाम भी आएगा, मेरे नाम से पहले’।

कदम

तो ‘कल्पना’ मयखाने, आ

पहुँचे तेरे चलकर,

नतीजा

सोच ले मयकश! सुराही जाम से पहले।

--------कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

sadaa

sadbhaaw hon man men,

jahaan har kaam se pahale

·

n

dar hotaa wahaan koee,

kisee anjaam se pahale

·

dukhon

ke path pe chalakar hee,

sukhon kaa dvaar hai khulataa,

·

sukhad

chaayaa naheen milatee, prakharatam

ghaam se pahale

·

paseenaa

bin bahaae to, naheen haasil chabenaa bhee

·

chabaane

hain chane lohe ke,

rasamay aam se pahale

·

agan

men dvesh kee jalate, nipat

man mooढ़ jo insaan,

·

sukhon

kaa soory dhal jaataa, hai

unakaa shaam se pahale

·

kadam

choomengee khud manzil,

tumhaare man-mudit hokar,

·

lalak

ho lakshy paane kee,

agar aaraam se pahale

·

kabhee

bhee mitr yaa mehamaan,

lubhaate we naheen man ko,

·

chale

aate achaanak jo, kisee paigaam se pahale

·

puraanon

se sunaa hamane, bahaanaa prem kaa thaa wo,

·

thee

raadhaa ko muraliyaa dhun, lubhaatee

shyaam se pahale

·

meree

tanhaaiyon kee jab, kabhee

hogee kaheen charchaa,

·

‘tumhaaraa naam bhee aaegaa, mere naam se pahale’

·

kadam

to ‘kalpanaa’ mayakhaane, aa

pahunche tere chalakar,

·

nateejaa

soch le mayakash! suraahee jaam se pahale

·

--------kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

सदा

सद्भाव हों मन में,

जहाँ हर काम से पहले।

डर होता वहाँ कोई,

किसी अंजाम से पहले।

दुखों

के पथ पे चलकर ही,

सुखों का द्वार है खुलता,

सुखद

छाया नहीं मिलती, प्रखरतम

घाम से पहले।

पसीना

बिन बहाए तो, नहीं हासिल चबेना भी।

चबाने

हैं चने लोहे के,

रसमय आम से पहले।

अगन

में द्वेष की जलते, निपट

मन मूढ़ जो इंसान,

सुखों

का सूर्य ढल जाता, है

उनका शाम से पहले।

कदम

चूमेंगी खुद मंज़िल,

तुम्हारे मन-मुदित होकर,

ललक

हो लक्ष्य पाने की,

अगर आराम से पहले।

कभी

भी मित्र या मेहमाँ,

लुभाते वे नहीं मन को,

चले

आते अचानक जो, किसी पैगाम से पहले।

पुराणों

से सुना हमने, बहाना प्रेम का था वो,

थी

राधा को मुरलिया धुन, लुभाती

श्याम से पहले।

मेरी

तन्हाइयों की जब, कभी

होगी कहीं चर्चा,

‘तुम्हारा नाम भी आएगा, मेरे नाम से पहले’।

कदम

तो ‘कल्पना’ मयखाने, आ

पहुँचे तेरे चलकर,

नतीजा

सोच ले मयकश! सुराही जाम से पहले।

--------कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗