कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १५४ / २०४ № 154 of 204 रचना १५४ / २०४
२९ अक्तूबर २०१९ 29 October 2019 २९ अक्तूबर २०१९

बेटी का हक़ betee kaa haq बेटी का हक़

बेटी का हक, अगर आपने छीना तो

बुरा हाल हे मनुज! तुम्हारा होगा, तो

देर न होगी, बाँझ धरा के होने में

जीव-जन्म का, अगर सिलसिला टूटा तो

प्रलय-पृष्ठ पर करने होंगे हस्ताक्षर

सृष्टि-चक्र को अगर अँगुष्ठ दिखाया तो

समाधिस्थ होना तय है हर जीवन का

समाधान यदि आज ही नहीं सोचा तो

नाश वरण कर लेगा, इस सुंदर जग का

अनजन्मी बेटी का मरण न रोका तो

कलियुग एक, कथा बनकर रह जाएगा

सार-कथ्य का नहीं ‘कल्पना’ समझा तो

betee kaa hak, agar aapane cheenaa to

buraa haal he manuj! tumhaaraa hogaa, to

·

der n hogee, baanjh dharaa ke hone men

jeew-janm kaa, agar silasilaa tootaa to

·

pralay-priishth par karane honge hastaakshar

sriishti-chakr ko agar angushth dikhaayaa to

·

samaadhisth honaa tay hai har jeewan kaa

samaadhaan yadi aaj hee naheen sochaa to

·

naash waran kar legaa, is sundar jag kaa

anajanmee betee kaa maran n rokaa to

·

kaliyug ek, kathaa banakar rah jaaegaa

saar-kathy kaa naheen ‘kalpanaa’ samajhaa to

बेटी का हक, अगर आपने छीना तो

बुरा हाल हे मनुज! तुम्हारा होगा, तो

देर न होगी, बाँझ धरा के होने में

जीव-जन्म का, अगर सिलसिला टूटा तो

प्रलय-पृष्ठ पर करने होंगे हस्ताक्षर

सृष्टि-चक्र को अगर अँगुष्ठ दिखाया तो

समाधिस्थ होना तय है हर जीवन का

समाधान यदि आज ही नहीं सोचा तो

नाश वरण कर लेगा, इस सुंदर जग का

अनजन्मी बेटी का मरण न रोका तो

कलियुग एक, कथा बनकर रह जाएगा

सार-कथ्य का नहीं ‘कल्पना’ समझा तो

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗