हौसलों के पंख hausalon ke pankh हौसलों के पंख
मुश्किलों
को मीत मानों
जीत तय होगी।
हौसलों को पंख दो तो
चिर
विजय होगी।
उड़ रहे पंछी प्रवासी
अनवरत इक आस में।
लक्ष्य पाने चल पड़े हैं
फिर नए आकाश में।
साथ हैं बहती हवाएँ
और
पंखों पर गुमान।
मंज़िलों को पा
ही लेंगे
कर्म रत योगी।
हाथ में पतवार है तो
लाख फिर मँझधार हो।
तट बढ़ेगा थामने तुम
हौसलों
को थाम लो।
ठोस
हों संकल्प
यदि
mushkilon
ko meet maanon
jeet tay hogee
hausalon ko pankh do to
chir
wijay hogee
ud rahe panchee prawaasee
anawarat ik aas men
lakshy paane chal pade hain
phir nae aakaash men
saath hain bahatee hawaaen
aur
pankhon par gumaan
manzilon ko paa
hee lenge
karm rat yogee
haath men patawaar hai to
laakh phir manjhadhaar ho
tat bढ़egaa thaamane tum
hausalon
ko thaam lo
thos
hon sankalp
yadi
मुश्किलों
को मीत मानों
जीत तय होगी।
हौसलों को पंख दो तो
चिर
विजय होगी।
उड़ रहे पंछी प्रवासी
अनवरत इक आस में।
लक्ष्य पाने चल पड़े हैं
फिर नए आकाश में।
साथ हैं बहती हवाएँ
और
पंखों पर गुमान।
मंज़िलों को पा
ही लेंगे
कर्म रत योगी।
हाथ में पतवार है तो
लाख फिर मँझधार हो।
तट बढ़ेगा थामने तुम
हौसलों
को थाम लो।
ठोस
हों संकल्प
यदि