कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९७ / १६३ № 97 of 163 रचना ९७ / १६३
१२ जनवरी २०१५ 12 January 2015 १२ जनवरी २०१५

खेतों ने ख़त लिखा सूर्य को kheton ne kat likhaa soory ko खेतों ने ख़त लिखा सूर्य को

खेतों ने ख़त लिखा

सूर्य को

भेजो नव किरणों का डोला।

हम तो हिमयुग झेल

चुके

अब ले जाओ कुहरा भर

झोला।

कुंद हुई सरसों की

धड़कन

पाले ने उसको है

पीटा

ज़िंदा है बस इसी आस

में

धूप मारने आए छींटा

धडक उठेंगी फिर से

साँसें

ज्यों मौसम बदलेगा

चोला।

देखो उस टपरी में

अम्मा

तन से तन को ताप

रही है

आधी उधड़ी ओढ़ रजाई

खींच-खींच कर नाप

रही है

जर्जर गात, कुहासा कहरी &

kheton ne kat likhaa

soory ko

·

bhejo naw kiranon kaa dolaa

·

ham to himayug jhel

chuke

·

ab le jaao kuharaa bhar

·

jholaa

·

kund huee sarason kee

dhadakan

·

paale ne usako hai

peetaa

·

zindaa hai bas isee aas

men

·

dhoop maarane aae cheentaa

·

dhadak uthengee phir se

saansen

·

jyon mausam badalegaa

·

cholaa

·

dekho us taparee men

ammaa

·

tan se tan ko taap

rahee hai

·

aadhee udhadee oढ़ rajaaee

·

kheench-kheench kar naap

rahee hai

·

jarjar gaat, kuhaasaa kaharee &

खेतों ने ख़त लिखा

सूर्य को

भेजो नव किरणों का डोला।

हम तो हिमयुग झेल

चुके

अब ले जाओ कुहरा भर

झोला।

कुंद हुई सरसों की

धड़कन

पाले ने उसको है

पीटा

ज़िंदा है बस इसी आस

में

धूप मारने आए छींटा

धडक उठेंगी फिर से

साँसें

ज्यों मौसम बदलेगा

चोला।

देखो उस टपरी में

अम्मा

तन से तन को ताप

रही है

आधी उधड़ी ओढ़ रजाई

खींच-खींच कर नाप

रही है

जर्जर गात, कुहासा कहरी &

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗