कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना ५४ / ६५ № 54 of 65 रचना ५४ / ६५
१० जनवरी २०१५ 10 January 2015 १० जनवरी २०१५

समय चक्र चलता रहा samay chakr chalataa rahaa समय चक्र चलता रहा

समय चक्र चलता रहा, घड़ियाँ भी गतिमान।

हौले हौले आ गया, नया साल मेहमान।

सुखकारी नव-वर्ष हो, करें इस तरह काज।

सत्य जयी होकर रहे, गिरे झूठ पर गाज।

रतजागे में रत सभी, शोर मचा चहुं ओर।

लो मुस्काती आ गई, नवल वर्ष की भोर।

पंछी दुबके नीड़ में, थर थर काँपे रात।&

samay chakr chalataa rahaa, ghadiyaan bhee gatimaan

·

haule haule aa gayaa, nayaa saal mehamaan

·

sukhakaaree naw-warsh ho, karen is tarah kaaj

saty jayee hokar rahe, gire jhooth par gaaj

·

ratajaage men rat sabhee, shor machaa chahun or

lo muskaatee aa gaee, nawal warsh kee bhor

·

panchee dubake need men, thar thar kaanpe raat&

समय चक्र चलता रहा, घड़ियाँ भी गतिमान।

हौले हौले आ गया, नया साल मेहमान।

सुखकारी नव-वर्ष हो, करें इस तरह काज।

सत्य जयी होकर रहे, गिरे झूठ पर गाज।

रतजागे में रत सभी, शोर मचा चहुं ओर।

लो मुस्काती आ गई, नवल वर्ष की भोर।

पंछी दुबके नीड़ में, थर थर काँपे रात।&

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗