कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६३ / २०४ № 63 of 204 रचना ६३ / २०४
९ जनवरी २०१५ 9 January 2015 ९ जनवरी २०१५

खिल उठा गुलशन khil uthaa gulashan खिल उठा गुलशन

खिल उठा गुलशन,

गुलों में जान आई।

साल नूतन दे रहा सबको बधाई।

कह रहीं देखो, नवेली सूर्य किरणें

अब वरो आगत,

विगत को दो विदाई।

साज़ ने संगीत छेड़ा, गीत

झूमे

मन हुआ चन्दन, गज़ल

भी गुनगुनाई।

जिन समीकरणों में उलझा साल बीता

शुभ घड़ी सरलीकरण की उनके आई।

काट दें इस बार वे बंधन जिन्होंने

रूढ़ियों से बाँध की थी बेहयाई।

स्वत्व अपने हाकिमों से कर लें

हासिल

और जनता के हितों हित हो लड़ाई।

हों न बैरी अब बरी,

सुन लो सपूतों

मौत के पिंजड़े में तड़पें आततायी।

ले शपथ कर लें हरिक सार्थक जतन से

दुर्दिनों का अंत,

अंतर की सफाई।

कर बढ़ाकर नष्ट वे अवरोध कर दें

प्रगति-पथ पर जिनसे हमने चोट खाई।

साल नव अर्पित उन्हें हो आज मित्रों

भाग्य की ठोकर जिन्होंने, कल

थी खाई।

जीत का सेहरा बँधे हर हार के सिर,

वर्ष नूतन की यही असली कमाई।

--कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

khil uthaa gulashan,

gulon men jaan aaee

·

saal nootan de rahaa sabako badhaaee

·

kah raheen dekho, nawelee soory kiranen

·

ab waro aagat,

wigat ko do widaaee

·

saaz ne sangeet chedaa, geet

jhoome

·

man huaa chandan, gazal

bhee gunagunaaee

·

jin sameekaranon men ulajhaa saal beetaa

·

shubh ghadee saraleekaran kee unake aaee

·

kaat den is baar we bandhan jinhonne

·

rooढ़iyon se baandh kee thee behayaaee

·

svatv apane haakimon se kar len

haasil

·

aur janataa ke hiton hit ho ladaaee

·

hon n bairee ab baree,

sun lo sapooton

·

maut ke pinjade men tadapen aatataayee

·

le shapath kar len harik saarthak jatan se

·

durdinon kaa ant,

antar kee saphaaee

·

kar bढ़aakar nasht we awarodh kar den

·

pragati-path par jinase hamane chot khaaee

·

saal naw arpit unhen ho aaj mitron

·

bhaagy kee thokar jinhonne, kal

thee khaaee

·

jeet kaa seharaa bandhe har haar ke sir,

·

warsh nootan kee yahee asalee kamaaee

·

--kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

खिल उठा गुलशन,

गुलों में जान आई।

साल नूतन दे रहा सबको बधाई।

कह रहीं देखो, नवेली सूर्य किरणें

अब वरो आगत,

विगत को दो विदाई।

साज़ ने संगीत छेड़ा, गीत

झूमे

मन हुआ चन्दन, गज़ल

भी गुनगुनाई।

जिन समीकरणों में उलझा साल बीता

शुभ घड़ी सरलीकरण की उनके आई।

काट दें इस बार वे बंधन जिन्होंने

रूढ़ियों से बाँध की थी बेहयाई।

स्वत्व अपने हाकिमों से कर लें

हासिल

और जनता के हितों हित हो लड़ाई।

हों न बैरी अब बरी,

सुन लो सपूतों

मौत के पिंजड़े में तड़पें आततायी।

ले शपथ कर लें हरिक सार्थक जतन से

दुर्दिनों का अंत,

अंतर की सफाई।

कर बढ़ाकर नष्ट वे अवरोध कर दें

प्रगति-पथ पर जिनसे हमने चोट खाई।

साल नव अर्पित उन्हें हो आज मित्रों

भाग्य की ठोकर जिन्होंने, कल

थी खाई।

जीत का सेहरा बँधे हर हार के सिर,

वर्ष नूतन की यही असली कमाई।

--कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗