कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६४ / २०५ № 64 of 205 रचना ६४ / २०५
९ जनवरी २०१५ 9 January 2015 ९ जनवरी २०१५

खिल उठा गुलशन khil uthaa gulashan खिल उठा गुलशन

खिल उठा गुलशन,

गुलों में जान आई।

॥

साल नूतन दे रहा सबको बधाई।

॥

कह रहीं देखो, नवेली सूर्य किरणें

॥

अब वरो आगत,

विगत को दो विदाई।

॥

साज़ ने संगीत छेड़ा, गीत

झूमे

॥

मन हुआ चन्दन, गज़ल

भी गुनगुनाई।

॥

जिन समीकरणों में उलझा साल बीता

॥

शुभ घड़ी सरलीकरण की उनके आई।

॥

काट दें इस बार वे बंधन जिन्होंने

॥

रूढ़ियों से बाँध की थी बेहयाई।

॥

स्वत्व अपने हाकिमों से कर लें

हासिल

॥

और जनता के हितों हित हो लड़ाई।

॥

हों न बैरी अब बरी,

सुन लो सपूतों

॥

मौत के पिंजड़े में तड़पें आततायी।

॥

ले शपथ कर लें हरिक सार्थक जतन से

॥

दुर्दिनों का अंत,

अंतर की सफाई।

॥

कर बढ़ाकर नष्ट वे अवरोध कर दें

॥

प्रगति-पथ पर जिनसे हमने चोट खाई।

॥

साल नव अर्पित उन्हें हो आज मित्रों

॥

भाग्य की ठोकर जिन्होंने, कल

थी खाई।

॥

जीत का सेहरा बँधे हर हार के सिर,

॥

वर्ष नूतन की यही असली कमाई।

॥

--कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

khil uthaa gulashan,

gulon men jaan aaee

·

saal nootan de rahaa sabako badhaaee

·

kah raheen dekho, nawelee soory kiranen

·

ab waro aagat,

wigat ko do widaaee

·

saaz ne sangeet chedaa, geet

jhoome

·

man huaa chandan, gazal

bhee gunagunaaee

·

jin sameekaranon men ulajhaa saal beetaa

·

shubh ghadee saraleekaran kee unake aaee

·

kaat den is baar we bandhan jinhonne

·

rooढ़iyon se baandh kee thee behayaaee

·

svatv apane haakimon se kar len

haasil

·

aur janataa ke hiton hit ho ladaaee

·

hon n bairee ab baree,

sun lo sapooton

·

maut ke pinjade men tadapen aatataayee

·

le shapath kar len harik saarthak jatan se

·

durdinon kaa ant,

antar kee saphaaee

·

kar bढ़aakar nasht we awarodh kar den

·

pragati-path par jinase hamane chot khaaee

·

saal naw arpit unhen ho aaj mitron

·

bhaagy kee thokar jinhonne, kal

thee khaaee

·

jeet kaa seharaa bandhe har haar ke sir,

·

warsh nootan kee yahee asalee kamaaee

·

--kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

खिल उठा गुलशन,

गुलों में जान आई।

॥

साल नूतन दे रहा सबको बधाई।

॥

कह रहीं देखो, नवेली सूर्य किरणें

॥

अब वरो आगत,

विगत को दो विदाई।

॥

साज़ ने संगीत छेड़ा, गीत

झूमे

॥

मन हुआ चन्दन, गज़ल

भी गुनगुनाई।

॥

जिन समीकरणों में उलझा साल बीता

॥

शुभ घड़ी सरलीकरण की उनके आई।

॥

काट दें इस बार वे बंधन जिन्होंने

॥

रूढ़ियों से बाँध की थी बेहयाई।

॥

स्वत्व अपने हाकिमों से कर लें

हासिल

॥

और जनता के हितों हित हो लड़ाई।

॥

हों न बैरी अब बरी,

सुन लो सपूतों

॥

मौत के पिंजड़े में तड़पें आततायी।

॥

ले शपथ कर लें हरिक सार्थक जतन से

॥

दुर्दिनों का अंत,

अंतर की सफाई।

॥

कर बढ़ाकर नष्ट वे अवरोध कर दें

॥

प्रगति-पथ पर जिनसे हमने चोट खाई।

॥

साल नव अर्पित उन्हें हो आज मित्रों

॥

भाग्य की ठोकर जिन्होंने, कल

थी खाई।

॥

जीत का सेहरा बँधे हर हार के सिर,

॥

वर्ष नूतन की यही असली कमाई।

॥

--कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗