कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६५ / २०५ № 65 of 205 रचना ६५ / २०५
९ जनवरी २०१५ 9 January 2015 ९ जनवरी २०१५

पावन होती प्रीत वही तो paawan hotee preet wahee to पावन होती प्रीत वही तो

जो रस्मों को मन से माने,

पावन होती प्रीत वही तो!

॥

जीवन भर जो साथ निभाए,

सच्चा होता मीत वही तो!

॥

रूढ़ पुरानी परम्पराएँ, मानें

हम, है नहीं ज़रूरी।

॥

जो समाज को नई दिशा दे, प्रचलित

होती रीत वही तो!

॥

मंदिर-मंदिर चढ़े चढ़ावा,

भरे हुओं की भरती झोली।

॥

जो भूखों की भरे झोलियाँ,

होता कर्म पुनीत वही तो!

॥

ऐसा कोई हुआ न हाकिम,

जो जग में हर बाज़ी जीता

॥

बाद हार के जो हासिल हो,

सुखदाई है जीत वही तो!

॥

भाव बिना है कविता फीकी,

बिना सुरीले बोल,

तराने।

॥

जो तन-मन को करे तरंगित मधुरिम है संगीत वही तो!

॥

यों तो मिलती नेक नसीहत,

भूलें जो बीता दुखदाई,

॥

संग जिये पर जिसके पल-पल,

होता याद अतीत वही तो!

॥

- कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

jo rasmon ko man se maane,

paawan hotee preet wahee to!

·

jeewan bhar jo saath nibhaae,

sachchaa hotaa meet wahee to!

·

rooढ़ puraanee paramparaaen, maanen

ham, hai naheen zarooree

·

jo samaaj ko naee dishaa de, prachalit

hotee reet wahee to!

·

mandir-mandir chढ़e chढ़aawaa,

bhare huon kee bharatee jholee

·

jo bhookhon kee bhare jholiyaan,

hotaa karm puneet wahee to!

·

aisaa koee huaa n haakim,

jo jag men har baazee jeetaa

·

baad haar ke jo haasil ho,

sukhadaaee hai jeet wahee to!

·

bhaaw binaa hai kawitaa pheekee,

binaa sureele bol,

taraane

·

jo tan-man ko kare tarangit madhurim hai sangeet wahee to!

·

yon to milatee nek naseehat,

bhoolen jo beetaa dukhadaaee,

·

sang jiye par jisake pal-pal,

hotaa yaad ateet wahee to!

·

- kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

जो रस्मों को मन से माने,

पावन होती प्रीत वही तो!

॥

जीवन भर जो साथ निभाए,

सच्चा होता मीत वही तो!

॥

रूढ़ पुरानी परम्पराएँ, मानें

हम, है नहीं ज़रूरी।

॥

जो समाज को नई दिशा दे, प्रचलित

होती रीत वही तो!

॥

मंदिर-मंदिर चढ़े चढ़ावा,

भरे हुओं की भरती झोली।

॥

जो भूखों की भरे झोलियाँ,

होता कर्म पुनीत वही तो!

॥

ऐसा कोई हुआ न हाकिम,

जो जग में हर बाज़ी जीता

॥

बाद हार के जो हासिल हो,

सुखदाई है जीत वही तो!

॥

भाव बिना है कविता फीकी,

बिना सुरीले बोल,

तराने।

॥

जो तन-मन को करे तरंगित मधुरिम है संगीत वही तो!

॥

यों तो मिलती नेक नसीहत,

भूलें जो बीता दुखदाई,

॥

संग जिये पर जिसके पल-पल,

होता याद अतीत वही तो!

॥

- कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗