आँगन की तुलसी aangan kee tulasee आँगन की तुलसी
बढ़े धूप के तेवर रूठी
आँगन की तुलसी।
सींच न पाई गृहिणी उसको
जल का था टोटा।
कोने में चुपचाप पड़ा था
मैला सा लोटा।
ऊपर से गर्मी का भारी
आन पड़ा सोटा।
मुरझाई बिन पानी प्यासी
पावन सी तुलसी।
छाया वाले छप्पर में भी
छिद्रों का था जाल।
सूरज तपकर पहुँचा सिर पर
बना काल तत्काल।
लड़े अंत तक कोमल पत्ते
सूख हुए कंकाल।
दम टूटा पतझड़ में बदली
सावन सी तुलसी।
सूखी तुलसी
bढ़e dhoop ke tewar roothee
aangan kee tulasee
seench n paaee griihinee usako
jal kaa thaa totaa
kone men chupachaap padaa thaa
mailaa saa lotaa
oopar se garmee kaa bhaaree
aan padaa sotaa
murajhaaee bin paanee pyaasee
paawan see tulasee
chaayaa waale chappar men bhee
chidron kaa thaa jaal
sooraj tapakar pahunchaa sir par
banaa kaal tatkaal
lade ant tak komal patte
sookh hue kankaal
dam tootaa patajhad men badalee
saawan see tulasee
sookhee tulasee
बढ़े धूप के तेवर रूठी
आँगन की तुलसी।
सींच न पाई गृहिणी उसको
जल का था टोटा।
कोने में चुपचाप पड़ा था
मैला सा लोटा।
ऊपर से गर्मी का भारी
आन पड़ा सोटा।
मुरझाई बिन पानी प्यासी
पावन सी तुलसी।
छाया वाले छप्पर में भी
छिद्रों का था जाल।
सूरज तपकर पहुँचा सिर पर
बना काल तत्काल।
लड़े अंत तक कोमल पत्ते
सूख हुए कंकाल।
दम टूटा पतझड़ में बदली
सावन सी तुलसी।
सूखी तुलसी