कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९५ / १६३ № 95 of 163 रचना ९५ / १६३
९ जनवरी २०१५ 9 January 2015 ९ जनवरी २०१५

आँगन की तुलसी aangan kee tulasee आँगन की तुलसी

बढ़े धूप के तेवर रूठी

आँगन की तुलसी।

सींच न पाई गृहिणी उसको

जल का था टोटा।

कोने में चुपचाप पड़ा था

मैला सा लोटा।

ऊपर से गर्मी का भारी

आन पड़ा सोटा।

मुरझाई बिन पानी प्यासी

पावन सी तुलसी।

छाया वाले छप्पर में भी

छिद्रों का था जाल।

सूरज तपकर पहुँचा सिर पर

बना काल तत्काल।

लड़े अंत तक कोमल पत्ते

सूख हुए कंकाल।

दम टूटा पतझड़ में बदली

सावन सी तुलसी।

सूखी तुलसी

bढ़e dhoop ke tewar roothee

·

aangan kee tulasee

·

seench n paaee griihinee usako

·

jal kaa thaa totaa

·

kone men chupachaap padaa thaa

·

mailaa saa lotaa

·

oopar se garmee kaa bhaaree

·

aan padaa sotaa

·

murajhaaee bin paanee pyaasee

·

paawan see tulasee

·

chaayaa waale chappar men bhee

·

chidron kaa thaa jaal

·

sooraj tapakar pahunchaa sir par

·

banaa kaal tatkaal

·

lade ant tak komal patte

·

sookh hue kankaal

·

dam tootaa patajhad men badalee

·

saawan see tulasee

·

sookhee tulasee

बढ़े धूप के तेवर रूठी

आँगन की तुलसी।

सींच न पाई गृहिणी उसको

जल का था टोटा।

कोने में चुपचाप पड़ा था

मैला सा लोटा।

ऊपर से गर्मी का भारी

आन पड़ा सोटा।

मुरझाई बिन पानी प्यासी

पावन सी तुलसी।

छाया वाले छप्पर में भी

छिद्रों का था जाल।

सूरज तपकर पहुँचा सिर पर

बना काल तत्काल।

लड़े अंत तक कोमल पत्ते

सूख हुए कंकाल।

दम टूटा पतझड़ में बदली

सावन सी तुलसी।

सूखी तुलसी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗