कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९६ / १६३ № 96 of 163 रचना ९६ / १६३
९ जनवरी २०१५ 9 January 2015 ९ जनवरी २०१५

तुम्हें हम क्या दें गंगा माँ! tumhen ham kyaa den gangaa maan! तुम्हें हम क्या दें गंगा माँ!

हमें दिये वरदान,तुम्हें हम,

क्या दें गंगा माँ!

देवलोक से चली उतरकर।

शिव ने तुम्हें

सँभाला सिर पर।

हिमखंडों से निकल वेग सी,

हमें तारने आई भू पर।

वैतरणी,जग ताप हारणी,

लाई स्वर्ग यहाँ!

सकल विश्व के दोष खंडिता।

मोक्षदायिनी,वरद वंदिता।

वेद मंत्र की पावन सलिला,

सदियों से तुम सदा पूजिता।

धाम अनगिने

हुए विश्व में,

पाया मोक्ष

hamen diye waradaan,tumhen ham,

·

kyaa den gangaa maan!

·

dewalok se chalee utarakar

·

shiw ne tumhen

sanbhaalaa sir par

·

himakhandon se nikal weg see,

·

hamen taarane aaee bhoo par

·

waitaranee,jag taap haaranee,

·

laaee svarg yahaan!

·

sakal wishv ke dosh khanditaa

·

mokshadaayinee,warad wanditaa

·

wed mantr kee paawan salilaa,

·

sadiyon se tum sadaa poojitaa

·

dhaam anagine

hue wishv men,

·

paayaa moksh

हमें दिये वरदान,तुम्हें हम,

क्या दें गंगा माँ!

देवलोक से चली उतरकर।

शिव ने तुम्हें

सँभाला सिर पर।

हिमखंडों से निकल वेग सी,

हमें तारने आई भू पर।

वैतरणी,जग ताप हारणी,

लाई स्वर्ग यहाँ!

सकल विश्व के दोष खंडिता।

मोक्षदायिनी,वरद वंदिता।

वेद मंत्र की पावन सलिला,

सदियों से तुम सदा पूजिता।

धाम अनगिने

हुए विश्व में,

पाया मोक्ष

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗