कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९६ / १६४ № 96 of 164 रचना ९६ / १६४
९ जनवरी २०१५ 9 January 2015 ९ जनवरी २०१५

तुम्हें हम क्या दें गंगा माँ! tumhen ham kyaa den gangaa maan! तुम्हें हम क्या दें गंगा माँ!

हमें दिये वरदान,तुम्हें हम,

॥

क्या दें गंगा माँ!

॥

देवलोक से चली उतरकर।

॥

शिव ने तुम्हें

सँभाला सिर पर।

॥

हिमखंडों से निकल वेग सी,

॥

हमें तारने आई भू पर।

॥

वैतरणी,जग ताप हारणी,

॥

लाई स्वर्ग यहाँ!

॥

सकल विश्व के दोष खंडिता।

॥

मोक्षदायिनी,वरद वंदिता।

॥

वेद मंत्र की पावन सलिला,

॥

सदियों से तुम सदा पूजिता।

॥

धाम अनगिने

हुए विश्व में,

॥

पाया मोक्ष

hamen diye waradaan,tumhen ham,

·

kyaa den gangaa maan!

·

dewalok se chalee utarakar

·

shiw ne tumhen

sanbhaalaa sir par

·

himakhandon se nikal weg see,

·

hamen taarane aaee bhoo par

·

waitaranee,jag taap haaranee,

·

laaee svarg yahaan!

·

sakal wishv ke dosh khanditaa

·

mokshadaayinee,warad wanditaa

·

wed mantr kee paawan salilaa,

·

sadiyon se tum sadaa poojitaa

·

dhaam anagine

hue wishv men,

·

paayaa moksh

हमें दिये वरदान,तुम्हें हम,

॥

क्या दें गंगा माँ!

॥

देवलोक से चली उतरकर।

॥

शिव ने तुम्हें

सँभाला सिर पर।

॥

हिमखंडों से निकल वेग सी,

॥

हमें तारने आई भू पर।

॥

वैतरणी,जग ताप हारणी,

॥

लाई स्वर्ग यहाँ!

॥

सकल विश्व के दोष खंडिता।

॥

मोक्षदायिनी,वरद वंदिता।

॥

वेद मंत्र की पावन सलिला,

॥

सदियों से तुम सदा पूजिता।

॥

धाम अनगिने

हुए विश्व में,

॥

पाया मोक्ष

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗