गीत मन के मीत geet man ke meet गीत मन के मीत
साज, सुर, आवाज़, सरगम
ज़िंदगी के गीत हैं
जुड़ा इनसे मन का बंधन
गीत मन के मीत हैं।
आ गए उत्सव के दिन
फिर,स्नेह की कड़ियाँ जुड़ीं।
आसमाँ से आज उतरी
ज्यों सुहानी ऋतु परी।
रात पूनम प्रात शबनम
ज़िंदगी के गीत हैं।
अब अँधेरों का नहीं गम
गीत मन के मीत हैं।
फिर मिला बचपन, बहारें
कर रहीं अठखेलियाँ।
फूल पत्तों पर रची हैं
जल कणों की रेलियाँ।
हरित सावन, मुदित उपवन
जिंदगी के गीत हैं
क्यों न महके मन का
saaj, sur, aawaaz, saragam
zindagee ke geet hain
judaa inase man kaa bandhan
geet man ke meet hain
aa gae utsaw ke din
phir,sneh kee kadiyaan judeen
aasamaan se aaj utaree
jyon suhaanee riitu paree
raat poonam praat shabanam
zindagee ke geet hain
ab andheron kaa naheen gam
geet man ke meet hain
phir milaa bachapan, bahaaren
kar raheen athakheliyaan
phool patton par rachee hain
jal kanon kee reliyaan
harit saawan, mudit upawan
jindagee ke geet hain
kyon n mahake man kaa
साज, सुर, आवाज़, सरगम
ज़िंदगी के गीत हैं
जुड़ा इनसे मन का बंधन
गीत मन के मीत हैं।
आ गए उत्सव के दिन
फिर,स्नेह की कड़ियाँ जुड़ीं।
आसमाँ से आज उतरी
ज्यों सुहानी ऋतु परी।
रात पूनम प्रात शबनम
ज़िंदगी के गीत हैं।
अब अँधेरों का नहीं गम
गीत मन के मीत हैं।
फिर मिला बचपन, बहारें
कर रहीं अठखेलियाँ।
फूल पत्तों पर रची हैं
जल कणों की रेलियाँ।
हरित सावन, मुदित उपवन
जिंदगी के गीत हैं
क्यों न महके मन का