कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९४ / १६३ № 94 of 163 रचना ९४ / १६३
७ जनवरी २०१५ 7 January 2015 ७ जनवरी २०१५

गीत मन के मीत geet man ke meet गीत मन के मीत

साज, सुर, आवाज़, सरगम

ज़िंदगी के गीत हैं

जुड़ा इनसे मन का बंधन

गीत मन के मीत हैं।

आ गए उत्सव के दिन

फिर,स्नेह की कड़ियाँ जुड़ीं।

आसमाँ से आज उतरी

ज्यों सुहानी ऋतु परी।

रात पूनम प्रात शबनम

ज़िंदगी के गीत हैं।

अब अँधेरों का नहीं गम

गीत मन के मीत हैं।

फिर मिला बचपन, बहारें

कर रहीं अठखेलियाँ।

फूल पत्तों पर रची हैं

जल कणों की रेलियाँ।

हरित सावन, मुदित उपवन

जिंदगी के गीत हैं

क्यों न महके मन का

saaj, sur, aawaaz, saragam

·

zindagee ke geet hain

judaa inase man kaa bandhan

geet man ke meet hain

·

aa gae utsaw ke din

phir,sneh kee kadiyaan judeen

aasamaan se aaj utaree

jyon suhaanee riitu paree

·

raat poonam praat shabanam

zindagee ke geet hain

ab andheron kaa naheen gam

geet man ke meet hain

·

phir milaa bachapan, bahaaren

kar raheen athakheliyaan

phool patton par rachee hain

jal kanon kee reliyaan

·

harit saawan, mudit upawan

jindagee ke geet hain

kyon n mahake man kaa

साज, सुर, आवाज़, सरगम

ज़िंदगी के गीत हैं

जुड़ा इनसे मन का बंधन

गीत मन के मीत हैं।

आ गए उत्सव के दिन

फिर,स्नेह की कड़ियाँ जुड़ीं।

आसमाँ से आज उतरी

ज्यों सुहानी ऋतु परी।

रात पूनम प्रात शबनम

ज़िंदगी के गीत हैं।

अब अँधेरों का नहीं गम

गीत मन के मीत हैं।

फिर मिला बचपन, बहारें

कर रहीं अठखेलियाँ।

फूल पत्तों पर रची हैं

जल कणों की रेलियाँ।

हरित सावन, मुदित उपवन

जिंदगी के गीत हैं

क्यों न महके मन का

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗