कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९३ / १६३ № 93 of 163 रचना ९३ / १६३
२ जनवरी २०१५ 2 January 2015 २ जनवरी २०१५

मेरे बारे में /कल्पना रामानी mere baare men /kalpanaa raamaanee मेरे बारे में /कल्पना रामानी

आत्म कथ्य-(प्रकाशित किताब से)

जिस तरह प्रकृति परिवर्तन अटल है, उसी तरह जीव-जीवन में उतार चढ़ाव भी निश्चित है। सुख-दुख, धूप-छाँव, लाभ-हानि, उत्थान-पतन आदि। हर इंसान को न्यूनाधिक इन समस्याओं से जूझना ही पड़ता है। लेकिन हम यदि यथार्थ को स्वीकार न करते हुए अपने हौसले ही खो बैठें तो जीना ही दूभर हो जाए। मानव जन्म किस्मत से ही मिलता है। इसे हर रूप में स्वीकार करके हमें कुदरत का आभार मानना

aatm kathy-(prakaashit kitaab se)

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jis tarah prakriiti pariwartan atal hai, usee tarah jeew-jeewan men utaar chढ़aaw bhee nishchit hai sukh-dukh, dhoop-chaanv, laabh-haani, utthaan-patan aadi har insaan ko nyoonaadhik in samasyaaon se joojhanaa hee padataa hai lekin ham yadi yathaarth ko sveekaar n karate hue apane hausale hee kho baithen to jeenaa hee doobhar ho jaae maanaw janm kismat se hee milataa hai ise har roop men sveekaar karake hamen kudarat kaa aabhaar maananaa

आत्म कथ्य-(प्रकाशित किताब से)

जिस तरह प्रकृति परिवर्तन अटल है, उसी तरह जीव-जीवन में उतार चढ़ाव भी निश्चित है। सुख-दुख, धूप-छाँव, लाभ-हानि, उत्थान-पतन आदि। हर इंसान को न्यूनाधिक इन समस्याओं से जूझना ही पड़ता है। लेकिन हम यदि यथार्थ को स्वीकार न करते हुए अपने हौसले ही खो बैठें तो जीना ही दूभर हो जाए। मानव जन्म किस्मत से ही मिलता है। इसे हर रूप में स्वीकार करके हमें कुदरत का आभार मानना

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗