कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९२ / १६४ № 92 of 164 रचना ९२ / १६४
१ जनवरी २०१५ 1 January 2015 १ जनवरी २०१५

गाँव कुछ यादें दिला रहा है। gaanv kuch yaaden dilaa rahaa hai गाँव कुछ यादें दिला रहा है।

ओ निर्मोही! तुझे

गाँव कुछ

॥

यादें दिला रहा है।

॥

कर्ज़ यहाँ का माथे

धरकर

॥

तूने शहर बसाया

॥

उन प्रश्नों को कुछ

जवाब दे

॥

जिनका गला दबाया

॥

भला किसलिए इस आँगन

से

॥

तुझको गिला रहा है?

॥

खूँटा घर से उखाड़ अपना

॥

बाहर जाकर गाड़ा

॥

मीठी वंशी भूल बेसुरा

॥

पीटा वहाँ नगाड़ा

o nirmohee! tujhe

gaanv kuch

·

yaaden dilaa rahaa hai

·

karz yahaan kaa maathe

dharakar

·

toone shahar basaayaa

·

un prashnon ko kuch

jawaab de

·

jinakaa galaa dabaayaa

·

bhalaa kisalie is aangan

se

·

tujhako gilaa rahaa hai?

·

khoontaa ghar se ukhaad apanaa

·

baahar jaakar gaadaa

·

meethee wanshee bhool besuraa

·

peetaa wahaan nagaadaa

ओ निर्मोही! तुझे

गाँव कुछ

॥

यादें दिला रहा है।

॥

कर्ज़ यहाँ का माथे

धरकर

॥

तूने शहर बसाया

॥

उन प्रश्नों को कुछ

जवाब दे

॥

जिनका गला दबाया

॥

भला किसलिए इस आँगन

से

॥

तुझको गिला रहा है?

॥

खूँटा घर से उखाड़ अपना

॥

बाहर जाकर गाड़ा

॥

मीठी वंशी भूल बेसुरा

॥

पीटा वहाँ नगाड़ा

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗