कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ९१ / १६४ № 91 of 164 रचना ९१ / १६४
३० दिसम्बर २०१४ 30 December 2014 ३० दिसम्बर २०१४

आ गया नव वर्ष aa gayaa naw warsh आ गया नव वर्ष

आ गया नव वर्ष, हम स्वागत

॥

करें कुछ इस तरह।

॥

हर पुरानी पीर को

सबसे प्रथम

॥

कर दें विदा।

॥

धीर धरने का स्वयं

से हो नया

॥

इक वायदा।

॥

शौर्य-शर से काट, कर दें हर निराशा

॥

का क़तल।

॥

कर्म-कर से उलझनों

की गाँठ

॥

सुलझाएँ सदा।

॥

हाथ अपने है नया

सूरज उगाएँ

॥

हर सुबह।

॥

रात मावस में अगर

हो चंद्रमा

॥

में दम नहीं।

॥

प्रण के पथ पर

जुगनुओं की रोशनी

॥

भी कम नहीं।

॥

साधने हर हाल में

हैं साल-नव के

aa gayaa naw warsh, ham svaagat

·

karen kuch is tarah

·

har puraanee peer ko

sabase pratham

·

kar den widaa

·

dheer dharane kaa svayan

se ho nayaa

·

ik waayadaa

·

shaury-shar se kaat, kar den har niraashaa

·

kaa qatal

·

karm-kar se ulajhanon

kee gaanth

·

sulajhaaen sadaa

·

haath apane hai nayaa

sooraj ugaaen

·

har subah

·

raat maawas men agar

ho chandramaa

·

men dam naheen

·

pran ke path par

juganuon kee roshanee

·

bhee kam naheen

·

saadhane har haal men

hain saal-naw ke

आ गया नव वर्ष, हम स्वागत

॥

करें कुछ इस तरह।

॥

हर पुरानी पीर को

सबसे प्रथम

॥

कर दें विदा।

॥

धीर धरने का स्वयं

से हो नया

॥

इक वायदा।

॥

शौर्य-शर से काट, कर दें हर निराशा

॥

का क़तल।

॥

कर्म-कर से उलझनों

की गाँठ

॥

सुलझाएँ सदा।

॥

हाथ अपने है नया

सूरज उगाएँ

॥

हर सुबह।

॥

रात मावस में अगर

हो चंद्रमा

॥

में दम नहीं।

॥

प्रण के पथ पर

जुगनुओं की रोशनी

॥

भी कम नहीं।

॥

साधने हर हाल में

हैं साल-नव के

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗