भूल जाएगा ज़माना bhool jaaegaa zamaanaa भूल जाएगा ज़माना
पेशावर में १७ दिसंबर २०१४ को आतंकी हमले में मारे गए स्कूली बच्चों के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप कुछ भाव
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रौंदकर
मासूम जानें बेफिकर जो क्रूरता
किसलिए
हे ईश! तुमने दी उसे बल-सम्पदा।
शक्ल
से मानव मगर हैं दानवों से बद करम
दिल
नहीं सीने में रखते,
चीरते दिल बेखता।
कर
न पाए हाथ जो बेबस फरिश्तों पर रहम
बेरहम
वे हाथ सारे काट दो मेरे खुदा।
भूल
जाएगा ज़माना दे क्षणिक श्रद्धांजली
पर
सितम का सिर कलम करने बढ़ेगा न्याय क्या?
चैन
क्या मिल पाएगा नन्हें गुलों की रूह को?
काँपती
है रूह भी यह सोचकर अब “कल्पना”!
--कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
peshaawar men 17 disanbar 2014 ko aatankee hamale men maare gae skoolee bachchon ke prati shraddhaanjali svaroop kuch bhaaw
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raundakar
maasoom jaanen bephikar jo kroorataa
kisalie
he eesh! tumane dee use bal-sampadaa
shakl
se maanaw magar hain daanawon se bad karam
dil
naheen seene men rakhate,
cheerate dil bekhataa
kar
n paae haath jo bebas pharishton par raham
beraham
we haath saare kaat do mere khudaa
bhool
jaaegaa zamaanaa de kshanik shraddhaanjalee
par
sitam kaa sir kalam karane bढ़egaa nyaay kyaa?
chain
kyaa mil paaegaa nanhen gulon kee rooh ko?
kaanpatee
hai rooh bhee yah sochakar ab “kalpanaa”!
--kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
पेशावर में १७ दिसंबर २०१४ को आतंकी हमले में मारे गए स्कूली बच्चों के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप कुछ भाव
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रौंदकर
मासूम जानें बेफिकर जो क्रूरता
किसलिए
हे ईश! तुमने दी उसे बल-सम्पदा।
शक्ल
से मानव मगर हैं दानवों से बद करम
दिल
नहीं सीने में रखते,
चीरते दिल बेखता।
कर
न पाए हाथ जो बेबस फरिश्तों पर रहम
बेरहम
वे हाथ सारे काट दो मेरे खुदा।
भूल
जाएगा ज़माना दे क्षणिक श्रद्धांजली
पर
सितम का सिर कलम करने बढ़ेगा न्याय क्या?
चैन
क्या मिल पाएगा नन्हें गुलों की रूह को?
काँपती
है रूह भी यह सोचकर अब “कल्पना”!
--कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी