ग़ज़लें रोज़ वही कहता है gazalen roz wahee kahataa hai ग़ज़लें रोज़ वही कहता है
जो
रब याद सदा रखता है
कभी
न उसको जग ठगता है
एक
अदद रोटी का सपना
भूखों
को हर दिन छलता है
शेर
खड़ा कर घास डाल दो
तो
क्या बकरा चर सकता है?
सिर्फ
प्यार से हाथ फेरकर
देखो
गुल कैसे खिलता है
जलता
दीपक नहीं सोचता
सूर्य
डूबता या उगता है
हँसी
उड़ाओ,
करो
बुराई
फर्क
बधिर को क्या पड़ता है
नूर
खो चुका जो सावन में
हर दिन हरा उसे दिखता है
मन
जिसका नीरोग 'कल्पना'
ग़ज़लें
रोज़ वही कहता है
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
jo
rab yaad sadaa rakhataa hai
kabhee
n usako jag thagataa hai
ek
adad rotee kaa sapanaa
bhookhon
ko har din chalataa hai
sher
khadaa kar ghaas daal do
to
kyaa bakaraa char sakataa hai?
sirph
pyaar se haath pherakar
dekho
gul kaise khilataa hai
jalataa
deepak naheen sochataa
soory
doobataa yaa ugataa hai
hansee
udaao,
karo
buraaee
phark
badhir ko kyaa padataa hai
noor
kho chukaa jo saawan men
har din haraa use dikhataa hai
man
jisakaa neerog 'kalpanaa'
gazalen
roz wahee kahataa hai
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
जो
रब याद सदा रखता है
कभी
न उसको जग ठगता है
एक
अदद रोटी का सपना
भूखों
को हर दिन छलता है
शेर
खड़ा कर घास डाल दो
तो
क्या बकरा चर सकता है?
सिर्फ
प्यार से हाथ फेरकर
देखो
गुल कैसे खिलता है
जलता
दीपक नहीं सोचता
सूर्य
डूबता या उगता है
हँसी
उड़ाओ,
करो
बुराई
फर्क
बधिर को क्या पड़ता है
नूर
खो चुका जो सावन में
हर दिन हरा उसे दिखता है
मन
जिसका नीरोग 'कल्पना'
ग़ज़लें
रोज़ वही कहता है
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी