कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना १७ / ११४ № 17 of 114 रचना १७ / ११४
२६ अप्रैल २०१६ 26 April 2016 २६ अप्रैल २०१६

महिला-मण्डल mahilaa-mandal महिला-मण्डल

गरमी के

मौसम में शाम होते ही सोसायटी का मनोरंजन स्थल गुलज़ार होने लगता है। कुछ

बाल-बच्चे और युवतियाँ तरण ताल को अपनी क्रीड़ाओं से आल्हादित करते हैं तो कुछ

झूलों पर अपना आसन जमाए दिखते हैं। यहीं कुछ

वरिष्ठ महिलाओं का समूह लॉन की हरी घास पर

बैठकर अपने बतरस की बौछारों से वातावरण में रस घोलने का काम करता है। इनमें रमा,

उमा,

विमला

और कांता बड़बोली हैं बाकी सब सुनना अधिक, बोलना

garamee ke

mausam men shaam hote hee sosaayatee kaa manoranjan sthal gulazaar hone lagataa hai kuch

baal-bachche aur yuwatiyaan taran taal ko apanee kreedaaon se aalhaadit karate hain to kuch

jhoolon par apanaa aasan jamaae dikhate hain yaheen kuch

warishth mahilaaon kaa samooh lॉn kee haree ghaas par

baithakar apane bataras kee bauchaaron se waataawaran men ras gholane kaa kaam karataa hai inamen ramaa,

umaa,

wimalaa

aur kaantaa badabolee hain baakee sab sunanaa adhik, bolanaa

गरमी के

मौसम में शाम होते ही सोसायटी का मनोरंजन स्थल गुलज़ार होने लगता है। कुछ

बाल-बच्चे और युवतियाँ तरण ताल को अपनी क्रीड़ाओं से आल्हादित करते हैं तो कुछ

झूलों पर अपना आसन जमाए दिखते हैं। यहीं कुछ

वरिष्ठ महिलाओं का समूह लॉन की हरी घास पर

बैठकर अपने बतरस की बौछारों से वातावरण में रस घोलने का काम करता है। इनमें रमा,

उमा,

विमला

और कांता बड़बोली हैं बाकी सब सुनना अधिक, बोलना

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗