कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२२ / १६३ № 122 of 163 रचना १२२ / १६३
२८ अप्रैल २०१६ 28 April 2016 २८ अप्रैल २०१६

कभी न धूमिल होना चम्पा kabhee n dhoomil honaa champaa कभी न धूमिल होना चम्पा

जब जब ताप

बढ़ेगा चम्पा

पेड़ तुम्हारे

छाँव करेंगे

रूप, सुगंध, गुणों की मलिका

तुम महकोगी, हम

महकेंगे।

नागफनी ने

किया आक्रमण

जीवन के

उद्यानों पर।

हर आँगन में

बसा लिए हैं

अपने साथी

अपने घर।

विचलित है

अंतर जन-जन का

रंग तुम्हारे

भाव भरेंगे।

तन कंचन, मन कोमल कलिका

तुम किलकोगी, हम

किलकेंगे।

जहाँ नहीं शुभ

कदम तुम्हारे

हम बोएँगे बीज

वहाँ।

अमलतास, कचनार, बाँस भी

संग तुम्हारे

होंगे

jab jab taap

bढ़egaa champaa

·

ped tumhaare

chaanv karenge

·

roop, sugandh, gunon kee malikaa

·

tum mahakogee, ham

·

mahakenge

·

naagaphanee ne

kiyaa aakraman

·

jeewan ke

udyaanon par

·

har aangan men

basaa lie hain

·

apane saathee

apane ghar

·

wichalit hai

antar jan-jan kaa

·

rang tumhaare

bhaaw bharenge

·

tan kanchan, man komal kalikaa

·

tum kilakogee, ham

·

kilakenge

·

jahaan naheen shubh

kadam tumhaare

·

ham boenge beej

wahaan

·

amalataas, kachanaar, baans bhee

·

sang tumhaare

honge

जब जब ताप

बढ़ेगा चम्पा

पेड़ तुम्हारे

छाँव करेंगे

रूप, सुगंध, गुणों की मलिका

तुम महकोगी, हम

महकेंगे।

नागफनी ने

किया आक्रमण

जीवन के

उद्यानों पर।

हर आँगन में

बसा लिए हैं

अपने साथी

अपने घर।

विचलित है

अंतर जन-जन का

रंग तुम्हारे

भाव भरेंगे।

तन कंचन, मन कोमल कलिका

तुम किलकोगी, हम

किलकेंगे।

जहाँ नहीं शुभ

कदम तुम्हारे

हम बोएँगे बीज

वहाँ।

अमलतास, कचनार, बाँस भी

संग तुम्हारे

होंगे

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗