कभी न धूमिल होना चम्पा kabhee n dhoomil honaa champaa कभी न धूमिल होना चम्पा
जब जब ताप
बढ़ेगा चम्पा
पेड़ तुम्हारे
छाँव करेंगे
रूप, सुगंध, गुणों की मलिका
तुम महकोगी, हम
महकेंगे।
नागफनी ने
किया आक्रमण
जीवन के
उद्यानों पर।
हर आँगन में
बसा लिए हैं
अपने साथी
अपने घर।
विचलित है
अंतर जन-जन का
रंग तुम्हारे
भाव भरेंगे।
तन कंचन, मन कोमल कलिका
तुम किलकोगी, हम
किलकेंगे।
जहाँ नहीं शुभ
कदम तुम्हारे
हम बोएँगे बीज
वहाँ।
अमलतास, कचनार, बाँस भी
संग तुम्हारे
होंगे
jab jab taap
bढ़egaa champaa
ped tumhaare
chaanv karenge
roop, sugandh, gunon kee malikaa
tum mahakogee, ham
mahakenge
naagaphanee ne
kiyaa aakraman
jeewan ke
udyaanon par
har aangan men
basaa lie hain
apane saathee
apane ghar
wichalit hai
antar jan-jan kaa
rang tumhaare
bhaaw bharenge
tan kanchan, man komal kalikaa
tum kilakogee, ham
kilakenge
jahaan naheen shubh
kadam tumhaare
ham boenge beej
wahaan
amalataas, kachanaar, baans bhee
sang tumhaare
honge
जब जब ताप
बढ़ेगा चम्पा
पेड़ तुम्हारे
छाँव करेंगे
रूप, सुगंध, गुणों की मलिका
तुम महकोगी, हम
महकेंगे।
नागफनी ने
किया आक्रमण
जीवन के
उद्यानों पर।
हर आँगन में
बसा लिए हैं
अपने साथी
अपने घर।
विचलित है
अंतर जन-जन का
रंग तुम्हारे
भाव भरेंगे।
तन कंचन, मन कोमल कलिका
तुम किलकोगी, हम
किलकेंगे।
जहाँ नहीं शुभ
कदम तुम्हारे
हम बोएँगे बीज
वहाँ।
अमलतास, कचनार, बाँस भी
संग तुम्हारे
होंगे