कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ५१ / १६४ № 51 of 164 रचना ५१ / १६४
४ जनवरी २०१४ 4 January 2014 ४ जनवरी २०१४

याद आ गया गुज़रा दौर yaad aa gayaa guzaraa daur याद आ गया गुज़रा दौर

शॉल लपेटे चली सैर को

देखी आज अनोखी भोर।

॥

ओस कणों से लॉन

ढँका था।

॥

सर्द हवा से काँप

रहा था।

॥

लेकिन दूर व्योम

में हँसकर

॥

सूर्य रश्मियाँ

बाँट रहा था।

॥

शायद किसी गाँव

ने पल भर

॥

झाँका आज शहर की

ओर।

॥

इमारतों के बीच

झिरी थी।

॥

कुछ कुछ धूप वहाँ

बिखरी थी।

॥

मगर न पहुँचे

पाँव वहाँ तक

॥

दीवारें ऊँची प्रहरी थीं।

॥

हुआ सुखद एहसास

ताप का

॥

याद आ गया

shॉl lapete chalee sair ko

dekhee aaj anokhee bhor

·

os kanon se lॉn

dhankaa thaa

·

sard hawaa se kaanp

rahaa thaa

·

lekin door wyom

men hansakar

·

soory rashmiyaan

baant rahaa thaa

·

shaayad kisee gaanv

ne pal bhar

·

jhaankaa aaj shahar kee

or

·

imaaraton ke beech

jhiree thee

·

kuch kuch dhoop wahaan

bikharee thee

·

magar n pahunche

paanv wahaan tak

·

deewaaren oonchee praharee theen

·

huaa sukhad ehasaas

taap kaa

·

yaad aa gayaa

शॉल लपेटे चली सैर को

देखी आज अनोखी भोर।

॥

ओस कणों से लॉन

ढँका था।

॥

सर्द हवा से काँप

रहा था।

॥

लेकिन दूर व्योम

में हँसकर

॥

सूर्य रश्मियाँ

बाँट रहा था।

॥

शायद किसी गाँव

ने पल भर

॥

झाँका आज शहर की

ओर।

॥

इमारतों के बीच

झिरी थी।

॥

कुछ कुछ धूप वहाँ

बिखरी थी।

॥

मगर न पहुँचे

पाँव वहाँ तक

॥

दीवारें ऊँची प्रहरी थीं।

॥

हुआ सुखद एहसास

ताप का

॥

याद आ गया

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗