याद आ गया गुज़रा दौर yaad aa gayaa guzaraa daur याद आ गया गुज़रा दौर
शॉल लपेटे चली सैर को
देखी आज अनोखी भोर।
ओस कणों से लॉन
ढँका था।
सर्द हवा से काँप
रहा था।
लेकिन दूर व्योम
में हँसकर
सूर्य रश्मियाँ
बाँट रहा था।
शायद किसी गाँव
ने पल भर
झाँका आज शहर की
ओर।
इमारतों के बीच
झिरी थी।
कुछ कुछ धूप वहाँ
बिखरी थी।
मगर न पहुँचे
पाँव वहाँ तक
दीवारें ऊँची प्रहरी थीं।
हुआ सुखद एहसास
ताप का
याद आ गया
shॉl lapete chalee sair ko
dekhee aaj anokhee bhor
os kanon se lॉn
dhankaa thaa
sard hawaa se kaanp
rahaa thaa
lekin door wyom
men hansakar
soory rashmiyaan
baant rahaa thaa
shaayad kisee gaanv
ne pal bhar
jhaankaa aaj shahar kee
or
imaaraton ke beech
jhiree thee
kuch kuch dhoop wahaan
bikharee thee
magar n pahunche
paanv wahaan tak
deewaaren oonchee praharee theen
huaa sukhad ehasaas
taap kaa
yaad aa gayaa
शॉल लपेटे चली सैर को
देखी आज अनोखी भोर।
ओस कणों से लॉन
ढँका था।
सर्द हवा से काँप
रहा था।
लेकिन दूर व्योम
में हँसकर
सूर्य रश्मियाँ
बाँट रहा था।
शायद किसी गाँव
ने पल भर
झाँका आज शहर की
ओर।
इमारतों के बीच
झिरी थी।
कुछ कुछ धूप वहाँ
बिखरी थी।
मगर न पहुँचे
पाँव वहाँ तक
दीवारें ऊँची प्रहरी थीं।
हुआ सुखद एहसास
ताप का
याद आ गया