कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २६ / २०४ № 26 of 204 रचना २६ / २०४
१ जनवरी २०१४ 1 January 2014 १ जनवरी २०१४

नूतन साल आया nootan saal aayaa नूतन साल आया

पूर्ण कर अरमान, नूतन साल आया।

जाग रे इंसान, नूतन साल आया।

ख़ुशबुओं से तर हुईं बहती हवाएँ

थम गए तूफान, नूतन साल आया।

गत भुलाकर खोल दे आगत के रस्ते

छेड़ दे जय गान, नूतन साल आया।

कर विसर्जित अस्थियाँ गम के क्षणों की

बाँटकर मुस्कान, नूतन साल आया।

मन ये तेरा अब किसी भी लोभ मद से

हो न पाए म्लान, नूतन साल आया।

रब रहा है पूछ तेरी, क्या रज़ा है

माँग ले वरदान, नूतन साल आया।

आसमां आतुर तुझे हिय से लगाने

चढ़ नए सोपान, नूतन साल आया।

यत्न कर प्राणी, कहीं तेरी मनुजता

खो न दे पहचान, नूतन साल आया।

- कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

poorn kar aramaan, nootan saal aayaa

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jaag re insaan, nootan saal aayaa

·

kushabuon se tar hueen bahatee hawaaen

·

tham gae toophaan, nootan saal aayaa

·

gat bhulaakar khol de aagat ke raste

·

ched de jay gaan, nootan saal aayaa

·

kar wisarjit asthiyaan gam ke kshanon kee

·

baantakar muskaan, nootan saal aayaa

·

man ye teraa ab kisee bhee lobh mad se

·

ho n paae mlaan, nootan saal aayaa

·

rab rahaa hai pooch teree, kyaa razaa hai

·

maang le waradaan, nootan saal aayaa

·

aasamaan aatur tujhe hiy se lagaane

·

chढ़ nae sopaan, nootan saal aayaa

·

yatn kar praanee, kaheen teree manujataa

·

kho n de pahachaan, nootan saal aayaa

·

- kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

पूर्ण कर अरमान, नूतन साल आया।

जाग रे इंसान, नूतन साल आया।

ख़ुशबुओं से तर हुईं बहती हवाएँ

थम गए तूफान, नूतन साल आया।

गत भुलाकर खोल दे आगत के रस्ते

छेड़ दे जय गान, नूतन साल आया।

कर विसर्जित अस्थियाँ गम के क्षणों की

बाँटकर मुस्कान, नूतन साल आया।

मन ये तेरा अब किसी भी लोभ मद से

हो न पाए म्लान, नूतन साल आया।

रब रहा है पूछ तेरी, क्या रज़ा है

माँग ले वरदान, नूतन साल आया।

आसमां आतुर तुझे हिय से लगाने

चढ़ नए सोपान, नूतन साल आया।

यत्न कर प्राणी, कहीं तेरी मनुजता

खो न दे पहचान, नूतन साल आया।

- कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗