कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २७ / २०५ № 27 of 205 रचना २७ / २०५
१ जनवरी २०१४ 1 January 2014 १ जनवरी २०१४

नूतन साल आया nootan saal aayaa नूतन साल आया

पूर्ण कर अरमान, नूतन साल आया।

॥

जाग रे इंसान, नूतन साल आया।

॥

ख़ुशबुओं से तर हुईं बहती हवाएँ

॥

थम गए तूफान, नूतन साल आया।

॥

गत भुलाकर खोल दे आगत के रस्ते

॥

छेड़ दे जय गान, नूतन साल आया।

॥

कर विसर्जित अस्थियाँ गम के क्षणों की

॥

बाँटकर मुस्कान, नूतन साल आया।

॥

मन ये तेरा अब किसी भी लोभ मद से

॥

हो न पाए म्लान, नूतन साल आया।

॥

रब रहा है पूछ तेरी, क्या रज़ा है

॥

माँग ले वरदान, नूतन साल आया।

॥

आसमां आतुर तुझे हिय से लगाने

॥

चढ़ नए सोपान, नूतन साल आया।

॥

यत्न कर प्राणी, कहीं तेरी मनुजता

॥

खो न दे पहचान, नूतन साल आया।

॥

- कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

poorn kar aramaan, nootan saal aayaa

·

jaag re insaan, nootan saal aayaa

·

kushabuon se tar hueen bahatee hawaaen

·

tham gae toophaan, nootan saal aayaa

·

gat bhulaakar khol de aagat ke raste

·

ched de jay gaan, nootan saal aayaa

·

kar wisarjit asthiyaan gam ke kshanon kee

·

baantakar muskaan, nootan saal aayaa

·

man ye teraa ab kisee bhee lobh mad se

·

ho n paae mlaan, nootan saal aayaa

·

rab rahaa hai pooch teree, kyaa razaa hai

·

maang le waradaan, nootan saal aayaa

·

aasamaan aatur tujhe hiy se lagaane

·

chढ़ nae sopaan, nootan saal aayaa

·

yatn kar praanee, kaheen teree manujataa

·

kho n de pahachaan, nootan saal aayaa

·

- kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

पूर्ण कर अरमान, नूतन साल आया।

॥

जाग रे इंसान, नूतन साल आया।

॥

ख़ुशबुओं से तर हुईं बहती हवाएँ

॥

थम गए तूफान, नूतन साल आया।

॥

गत भुलाकर खोल दे आगत के रस्ते

॥

छेड़ दे जय गान, नूतन साल आया।

॥

कर विसर्जित अस्थियाँ गम के क्षणों की

॥

बाँटकर मुस्कान, नूतन साल आया।

॥

मन ये तेरा अब किसी भी लोभ मद से

॥

हो न पाए म्लान, नूतन साल आया।

॥

रब रहा है पूछ तेरी, क्या रज़ा है

॥

माँग ले वरदान, नूतन साल आया।

॥

आसमां आतुर तुझे हिय से लगाने

॥

चढ़ नए सोपान, नूतन साल आया।

॥

यत्न कर प्राणी, कहीं तेरी मनुजता

॥

खो न दे पहचान, नूतन साल आया।

॥

- कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗