कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ७० / १६३ № 70 of 163 रचना ७० / १६३
२० जून २०१४ 20 June 2014 २० जून २०१४

खुद थामो पतवार बेटियों... khud thaamo patawaar betiyon खुद थामो पतवार बेटियों...

खुद थामो पतवार,

बेटियों, नाव बचानी है।

मझधारे से तार,

तीर तक लेकर जानी

है।

यह समाज बैठा है

तत्पर।

गहराई तक घात लगाकर।

तुम्हें घेरकर चट

कर लेगा,

मगरमच्छ ये पूर्ण

निगलकर।

हो जाए लाचार,

इस तरह, जुगत भिड़ानी है।

यह सैय्याद

कुटिलतम कातिल।

वसन श्वेत, रखता काला दिल।

उग्र रूप वो धरो

बेटियों,

झुके तुम्हारे

khud thaamo patawaar,

·

betiyon, naaw bachaanee hai

·

majhadhaare se taar,

·

teer tak lekar jaanee

hai

·

yah samaaj baithaa hai

tatpar

·

gaharaaee tak ghaat lagaakar

·

tumhen gherakar chat

kar legaa,

·

magaramachch ye poorn

nigalakar

·

ho jaae laachaar,

·

is tarah, jugat bhidaanee hai

·

yah saiyyaad

kutilatam kaatil

·

wasan shvet, rakhataa kaalaa dil

·

ugr roop wo dharo

betiyon,

·

jhuke tumhaare

खुद थामो पतवार,

बेटियों, नाव बचानी है।

मझधारे से तार,

तीर तक लेकर जानी

है।

यह समाज बैठा है

तत्पर।

गहराई तक घात लगाकर।

तुम्हें घेरकर चट

कर लेगा,

मगरमच्छ ये पूर्ण

निगलकर।

हो जाए लाचार,

इस तरह, जुगत भिड़ानी है।

यह सैय्याद

कुटिलतम कातिल।

वसन श्वेत, रखता काला दिल।

उग्र रूप वो धरो

बेटियों,

झुके तुम्हारे

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗