कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ७१ / १६४ № 71 of 164 रचना ७१ / १६४
२३ जून २०१४ 23 June 2014 २३ जून २०१४

पहली बरखा pahalee barakhaa पहली बरखा

बदरा गरजे, बिजुरी चमकी।

घनघोर गिरी पहली बरखा।

तरसी धरती फिर तृप्त हुई।

अकुलाहट मनकी लुप्त हुई।

नदियाँ, नद, सागर झूम उठे।

गिरते जल के लब चूम उठे।

विहगों पर नूतन जोश दिखा।

चितचोर गिरी पहली बरखा।

दिन में दिवसेश्वर अस्त हुए।

जन, पर्व मनाकर मस्त हुए।

कब शाम ढली कब रात हुई।

कब दीप जले कब प्रात हुई।

सब भूल गए बस याद रखा।

पुरजोर गिरी

badaraa garaje, bijuree chamakee

·

ghanaghor giree pahalee barakhaa

·

tarasee dharatee phir triipt huee

·

akulaahat manakee lupt huee

·

nadiyaan, nad, saagar jhoom uthe

·

girate jal ke lab choom uthe

·

wihagon par nootan josh dikhaa

·

chitachor giree pahalee barakhaa

·

din men diwaseshvar ast hue

·

jan, parv manaakar mast hue

·

kab shaam dhalee kab raat huee

·

kab deep jale kab praat huee

·

sab bhool gae bas yaad rakhaa

·

purajor giree

बदरा गरजे, बिजुरी चमकी।

घनघोर गिरी पहली बरखा।

तरसी धरती फिर तृप्त हुई।

अकुलाहट मनकी लुप्त हुई।

नदियाँ, नद, सागर झूम उठे।

गिरते जल के लब चूम उठे।

विहगों पर नूतन जोश दिखा।

चितचोर गिरी पहली बरखा।

दिन में दिवसेश्वर अस्त हुए।

जन, पर्व मनाकर मस्त हुए।

कब शाम ढली कब रात हुई।

कब दीप जले कब प्रात हुई।

सब भूल गए बस याद रखा।

पुरजोर गिरी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗