पहली बरखा pahalee barakhaa पहली बरखा
बदरा गरजे, बिजुरी चमकी।
घनघोर गिरी पहली बरखा।
तरसी धरती फिर तृप्त हुई।
अकुलाहट मनकी लुप्त हुई।
नदियाँ, नद, सागर झूम उठे।
गिरते जल के लब चूम उठे।
विहगों पर नूतन जोश दिखा।
चितचोर गिरी पहली बरखा।
दिन में दिवसेश्वर अस्त हुए।
जन, पर्व मनाकर मस्त हुए।
कब शाम ढली कब रात हुई।
कब दीप जले कब प्रात हुई।
सब भूल गए बस याद रखा।
पुरजोर गिरी
badaraa garaje, bijuree chamakee
ghanaghor giree pahalee barakhaa
tarasee dharatee phir triipt huee
akulaahat manakee lupt huee
nadiyaan, nad, saagar jhoom uthe
girate jal ke lab choom uthe
wihagon par nootan josh dikhaa
chitachor giree pahalee barakhaa
din men diwaseshvar ast hue
jan, parv manaakar mast hue
kab shaam dhalee kab raat huee
kab deep jale kab praat huee
sab bhool gae bas yaad rakhaa
purajor giree
बदरा गरजे, बिजुरी चमकी।
घनघोर गिरी पहली बरखा।
तरसी धरती फिर तृप्त हुई।
अकुलाहट मनकी लुप्त हुई।
नदियाँ, नद, सागर झूम उठे।
गिरते जल के लब चूम उठे।
विहगों पर नूतन जोश दिखा।
चितचोर गिरी पहली बरखा।
दिन में दिवसेश्वर अस्त हुए।
जन, पर्व मनाकर मस्त हुए।
कब शाम ढली कब रात हुई।
कब दीप जले कब प्रात हुई।
सब भूल गए बस याद रखा।
पुरजोर गिरी