कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४८ / २०५ № 48 of 205 रचना ४८ / २०५
२३ जून २०१४ 23 June 2014 २३ जून २०१४

किताबें कहती हैं kitaaben kahatee hain किताबें कहती हैं

हमसे रखो न खार,

किताबें कहती हैं।

॥

हम भी चाहें प्यार,

किताबें कहती हैं।

॥

घर के अंदर घर हो एक हमारा भी।

॥

भव्य भाव संसार,

किताबें कहती हैं।

॥

बतियाएगा मित्र हमारा नित तुमसे,

॥

हँसकर हर किरदार,

किताबें कहती हैं।

॥

खरीदकर ही साथ सहेजो,

जीवन भर,

॥

लेना नहीं उधार,

किताबें कहती हैं।

॥

धूल, नमी, दीमक से डर लगता हमको,

॥

रखो स्वच्छ आगार,

किताबें कहती हैं।

॥

कभी न भूलो जो संदेश मिले हमसे,

॥

ऐसा हो इकरार,

किताबें कहती हैं।

॥

सजावटी ही नहीं सिर्फ हमसे हर दिन,

॥

करो विमर्श विचार,

किताबें कहती हैं।

॥

सैर करो कोने कोने की खोल हमें,

॥

चाहे जितनी बार,

किताबें कहती हैं।

॥

रखो ‘कल्पना’ हर-पल हमें विचारों में

॥

उपजेंगे सुविचार किताबें कहती हैं।

॥

- कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

hamase rakho n khaar,

kitaaben kahatee hain

·

ham bhee chaahen pyaar,

kitaaben kahatee hain

·

ghar ke andar ghar ho ek hamaaraa bhee

·

bhavy bhaaw sansaar,

kitaaben kahatee hain

·

batiyaaegaa mitr hamaaraa nit tumase,

·

hansakar har kiradaar,

kitaaben kahatee hain

·

khareedakar hee saath sahejo,

jeewan bhar,

·

lenaa naheen udhaar,

kitaaben kahatee hain

·

dhool, namee, deemak se dar lagataa hamako,

·

rakho svachch aagaar,

kitaaben kahatee hain

·

kabhee n bhoolo jo sandesh mile hamase,

·

aisaa ho ikaraar,

kitaaben kahatee hain

·

sajaawatee hee naheen sirph hamase har din,

·

karo wimarsh wichaar,

kitaaben kahatee hain

·

sair karo kone kone kee khol hamen,

·

chaahe jitanee baar,

kitaaben kahatee hain

·

rakho ‘kalpanaa’ har-pal hamen wichaaron men

·

upajenge suwichaar kitaaben kahatee hain

·

- kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

हमसे रखो न खार,

किताबें कहती हैं।

॥

हम भी चाहें प्यार,

किताबें कहती हैं।

॥

घर के अंदर घर हो एक हमारा भी।

॥

भव्य भाव संसार,

किताबें कहती हैं।

॥

बतियाएगा मित्र हमारा नित तुमसे,

॥

हँसकर हर किरदार,

किताबें कहती हैं।

॥

खरीदकर ही साथ सहेजो,

जीवन भर,

॥

लेना नहीं उधार,

किताबें कहती हैं।

॥

धूल, नमी, दीमक से डर लगता हमको,

॥

रखो स्वच्छ आगार,

किताबें कहती हैं।

॥

कभी न भूलो जो संदेश मिले हमसे,

॥

ऐसा हो इकरार,

किताबें कहती हैं।

॥

सजावटी ही नहीं सिर्फ हमसे हर दिन,

॥

करो विमर्श विचार,

किताबें कहती हैं।

॥

सैर करो कोने कोने की खोल हमें,

॥

चाहे जितनी बार,

किताबें कहती हैं।

॥

रखो ‘कल्पना’ हर-पल हमें विचारों में

॥

उपजेंगे सुविचार किताबें कहती हैं।

॥

- कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗