कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ७६ / १६४ № 76 of 164 रचना ७६ / १६४
२० अगस्त २०१४ 20 August 2014 २० अगस्त २०१४

घाट से मंदिर तलक ghaat se mandir talak घाट से मंदिर तलक

बदनसीबों को बसाकर गोद

में,

॥

ढँकती रहीं ये सीढ़ियाँ।

॥

घाट से मंदिर तलक बढ़ते कदम,

॥

तकती रहीं ये सीढ़ियाँ।

॥

धूप, दीपक आरती

॥

से, जाग जाती रोज़ प्रात।

॥

दिन भजन करते मगन

॥

औ’ बाँटतीं शामें प्रसाद।

॥

शेष को भूखे नयन तरसा

किए,

॥

लखती रहीं ये सीढ़ियाँ।

॥

मूर्तियों के सामने,

॥

लगते रहे नित रत्न ढेर।

॥

तिलक

badanaseebon ko basaakar god

men,

·

dhankatee raheen ye seeढ़iyaan

·

ghaat se mandir talak bढ़te kadam,

·

takatee raheen ye seeढ़iyaan

·

dhoop, deepak aaratee

·

se, jaag jaatee roz praat

·

din bhajan karate magan

·

au’ baantateen shaamen prasaad

·

shesh ko bhookhe nayan tarasaa

kie,

·

lakhatee raheen ye seeढ़iyaan

·

moortiyon ke saamane,

·

lagate rahe nit ratn dher

·

tilak

बदनसीबों को बसाकर गोद

में,

॥

ढँकती रहीं ये सीढ़ियाँ।

॥

घाट से मंदिर तलक बढ़ते कदम,

॥

तकती रहीं ये सीढ़ियाँ।

॥

धूप, दीपक आरती

॥

से, जाग जाती रोज़ प्रात।

॥

दिन भजन करते मगन

॥

औ’ बाँटतीं शामें प्रसाद।

॥

शेष को भूखे नयन तरसा

किए,

॥

लखती रहीं ये सीढ़ियाँ।

॥

मूर्तियों के सामने,

॥

लगते रहे नित रत्न ढेर।

॥

तिलक

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗