तुम पथिक आए कहाँ से tum pathik aae kahaan se तुम पथिक आए कहाँ से
तुम पथिक, आए कहाँ से
ठौर किस तुमको ठहरना?
इस शहर के रास्तों पर
कुछ सँभलकर पाँव धरना।
बात कल की है, यहाँ पर
कत्ल जीवित वन हुआ था।
जड़ मशीनें जी उठी थीं
और जड़ जीवन हुआ था।
देख थी हैरान कुदरत
रात का दिन में उतरना।
जो युगों से थे खड़े
वे पेड़ धरती पर पड़े थे।
उस कुटिल तूफान से
तुम पूछना कैसे लड़े थे।
याद होगा हर दिशा को
डालियों का वो सिहरना।
घर बसे हैं अब जहाँ
लाखों वहीं बेघर हुए थे।
बेरहम भूकम्प से तब
बेवतन वनचर हुए थे।
खिलखिलाहट आज है, कल
था यहीं पर अश्रु-झरना।
हो सके, उनको चढ़ाना
कुछ सुमन संकल्प करके।
कुछ वचन देकर निभाना
बंधु, परवर, धीर धरके।
याद में उनकी पथिक! तुम
एक वन आबाद करना।
tum pathik, aae kahaan se
thaur kis tumako thaharanaa?
is shahar ke raaston par
kuch sanbhalakar paanv dharanaa
baat kal kee hai, yahaan par
katl jeewit wan huaa thaa
jad masheenen jee uthee theen
aur jad jeewan huaa thaa
dekh thee hairaan kudarat
raat kaa din men utaranaa
jo yugon se the khade
we ped dharatee par pade the
us kutil toophaan se
tum poochanaa kaise lade the
yaad hogaa har dishaa ko
daaliyon kaa wo siharanaa
ghar base hain ab jahaan
laakhon waheen beghar hue the
beraham bhookamp se tab
bewatan wanachar hue the
khilakhilaahat aaj hai, kal
thaa yaheen par ashru-jharanaa
ho sake, unako chढ़aanaa
kuch suman sankalp karake
kuch wachan dekar nibhaanaa
bandhu, parawar, dheer dharake
yaad men unakee pathik! tum
ek wan aabaad karanaa
तुम पथिक, आए कहाँ से
ठौर किस तुमको ठहरना?
इस शहर के रास्तों पर
कुछ सँभलकर पाँव धरना।
बात कल की है, यहाँ पर
कत्ल जीवित वन हुआ था।
जड़ मशीनें जी उठी थीं
और जड़ जीवन हुआ था।
देख थी हैरान कुदरत
रात का दिन में उतरना।
जो युगों से थे खड़े
वे पेड़ धरती पर पड़े थे।
उस कुटिल तूफान से
तुम पूछना कैसे लड़े थे।
याद होगा हर दिशा को
डालियों का वो सिहरना।
घर बसे हैं अब जहाँ
लाखों वहीं बेघर हुए थे।
बेरहम भूकम्प से तब
बेवतन वनचर हुए थे।
खिलखिलाहट आज है, कल
था यहीं पर अश्रु-झरना।
हो सके, उनको चढ़ाना
कुछ सुमन संकल्प करके।
कुछ वचन देकर निभाना
बंधु, परवर, धीर धरके।
याद में उनकी पथिक! तुम
एक वन आबाद करना।