जंगल चीखा jangal cheekhaa जंगल चीखा
जंगल चीखा चली कुल्हाड़ी
चुन चुन पेड़ चीरती आरी
कल उसकी अब इसकी बारी
पंछी नीड़ यहाँ मत बाँधो।
क्या आरक्षण यहाँ तुम्हारा?
जो तुम तिनके लेकर आए।
क्या तुमने दी घूस किसी को
जो संरक्षण तुम्हें दिलाए?
अगर हो गए घायल चूज़े
क्या होगा फिर साधो! साधो!
गाँव नहीं यह शहर बंधुवर
कहर वनों पर आ टूटा है।
क्रूर कुटिलतम इन्सानों ने
वन जीवों का घर लूटा है।
जारी है चहुं ओर अतिक्रमण
निपट अकेले तुम हो माधो!
जाओ दूर कहीं प्रिय पंछी
डालो किसी गाँव में डेरा।
हरे पेड़ हों सुखद धूप हो
खेतों में जल अन्न घनेरा।
वहाँ तुम्हारा स्वागत होगा
पुरखों का यह शहर भुला दो।
jangal cheekhaa chalee kulhaadee
chun chun ped cheeratee aaree
kal usakee ab isakee baaree
panchee need yahaan mat baandho
kyaa aarakshan yahaan tumhaaraa?
jo tum tinake lekar aae
kyaa tumane dee ghoos kisee ko
jo sanrakshan tumhen dilaae?
agar ho gae ghaayal chooze
kyaa hogaa phir saadho! saadho!
gaanv naheen yah shahar bandhuwar
kahar wanon par aa tootaa hai
kroor kutilatam insaanon ne
wan jeewon kaa ghar lootaa hai
jaaree hai chahun or atikraman
nipat akele tum ho maadho!
jaao door kaheen priy panchee
daalo kisee gaanv men deraa
hare ped hon sukhad dhoop ho
kheton men jal ann ghaneraa
wahaan tumhaaraa svaagat hogaa
purakhon kaa yah shahar bhulaa do
जंगल चीखा चली कुल्हाड़ी
चुन चुन पेड़ चीरती आरी
कल उसकी अब इसकी बारी
पंछी नीड़ यहाँ मत बाँधो।
क्या आरक्षण यहाँ तुम्हारा?
जो तुम तिनके लेकर आए।
क्या तुमने दी घूस किसी को
जो संरक्षण तुम्हें दिलाए?
अगर हो गए घायल चूज़े
क्या होगा फिर साधो! साधो!
गाँव नहीं यह शहर बंधुवर
कहर वनों पर आ टूटा है।
क्रूर कुटिलतम इन्सानों ने
वन जीवों का घर लूटा है।
जारी है चहुं ओर अतिक्रमण
निपट अकेले तुम हो माधो!
जाओ दूर कहीं प्रिय पंछी
डालो किसी गाँव में डेरा।
हरे पेड़ हों सुखद धूप हो
खेतों में जल अन्न घनेरा।
वहाँ तुम्हारा स्वागत होगा
पुरखों का यह शहर भुला दो।