कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १३६ / १६३ № 136 of 163 रचना १३६ / १६३
११ नवम्बर २०१९ 11 November 2019 ११ नवम्बर २०१९

जंगल चीखा jangal cheekhaa जंगल चीखा

जंगल चीखा चली कुल्हाड़ी

चुन चुन पेड़ चीरती आरी

कल उसकी अब इसकी बारी

पंछी नीड़ यहाँ मत बाँधो।

क्या आरक्षण यहाँ तुम्हारा?

जो तुम तिनके लेकर आए।

क्या तुमने दी घूस किसी को

जो संरक्षण तुम्हें दिलाए?

अगर हो गए घायल चूज़े

क्या होगा फिर साधो! साधो!

गाँव नहीं यह शहर बंधुवर

कहर वनों पर आ टूटा है।

क्रूर कुटिलतम इन्सानों ने

वन जीवों का घर लूटा है।

जारी है चहुं ओर अतिक्रमण

निपट अकेले तुम हो माधो!

जाओ दूर कहीं प्रिय पंछी

डालो किसी गाँव में डेरा।

हरे पेड़ हों सुखद धूप हो

खेतों में जल अन्न घनेरा।

वहाँ तुम्हारा स्वागत होगा

पुरखों का यह शहर भुला दो।

jangal cheekhaa chalee kulhaadee

chun chun ped cheeratee aaree

kal usakee ab isakee baaree

panchee need yahaan mat baandho

·

kyaa aarakshan yahaan tumhaaraa?

jo tum tinake lekar aae

kyaa tumane dee ghoos kisee ko

jo sanrakshan tumhen dilaae?

·

agar ho gae ghaayal chooze

kyaa hogaa phir saadho! saadho!

·

gaanv naheen yah shahar bandhuwar

kahar wanon par aa tootaa hai

kroor kutilatam insaanon ne

wan jeewon kaa ghar lootaa hai

·

jaaree hai chahun or atikraman

nipat akele tum ho maadho!

·

jaao door kaheen priy panchee

daalo kisee gaanv men deraa

hare ped hon sukhad dhoop ho

kheton men jal ann ghaneraa

·

wahaan tumhaaraa svaagat hogaa

purakhon kaa yah shahar bhulaa do

जंगल चीखा चली कुल्हाड़ी

चुन चुन पेड़ चीरती आरी

कल उसकी अब इसकी बारी

पंछी नीड़ यहाँ मत बाँधो।

क्या आरक्षण यहाँ तुम्हारा?

जो तुम तिनके लेकर आए।

क्या तुमने दी घूस किसी को

जो संरक्षण तुम्हें दिलाए?

अगर हो गए घायल चूज़े

क्या होगा फिर साधो! साधो!

गाँव नहीं यह शहर बंधुवर

कहर वनों पर आ टूटा है।

क्रूर कुटिलतम इन्सानों ने

वन जीवों का घर लूटा है।

जारी है चहुं ओर अतिक्रमण

निपट अकेले तुम हो माधो!

जाओ दूर कहीं प्रिय पंछी

डालो किसी गाँव में डेरा।

हरे पेड़ हों सुखद धूप हो

खेतों में जल अन्न घनेरा।

वहाँ तुम्हारा स्वागत होगा

पुरखों का यह शहर भुला दो।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗