गोल चाँद की रात gol chaand kee raat गोल चाँद की रात
बहुत दिनों के बाद आज माँ
रोटी की फिर याद आई है।
कल भी तूने प्याज दिया था।
परसों बस जल घूँट पिया था।
कई दिनों तक सूखे टुकड़े
भिगो भिगो कर स्वाद लिया था।
बात मगर यह भूल गया हूँ
रोटी किस दिन हाथ आई है।
माँ! क्यों नहीं हमारे घर में
रोज रोज रोटी बनती है?
बस डिब्बों को खोल खोल कर
बचे हुए दाने गिनती है।
महँगाई क्या होती है माँ
इस घर के क्यों पास आई है?
कहती तो है मेरे चंदा!
चंदा जैसी रोटी दूँगी।
जिस दिन जैसा चाँद दिखेगा
उस दिन उतनी मोटी दूँगी।
आज दिखेगा बड़ा चंद्रमा
कहती बस यह बात आई है।
कब तक चने चबाऊँगा माँ
कब तक सत्तू खाऊँगा मैं
क्या यों ही भूखे रह रह कर
कभी बड़ा हो पाऊँगा मैं?
सच कह दे माँ! कब बोलेगी
गोल चाँद की रात आई है!!
bahut dinon ke baad aaj maan
rotee kee phir yaad aaee hai
kal bhee toone pyaaj diyaa thaa
parason bas jal ghoont piyaa thaa
kaee dinon tak sookhe tukade
bhigo bhigo kar svaad liyaa thaa
baat magar yah bhool gayaa hoon
rotee kis din haath aaee hai
maan! kyon naheen hamaare ghar men
roj roj rotee banatee hai?
bas dibbon ko khol khol kar
bache hue daane ginatee hai
mahangaaee kyaa hotee hai maan
is ghar ke kyon paas aaee hai?
kahatee to hai mere chandaa!
chandaa jaisee rotee doongee
jis din jaisaa chaand dikhegaa
us din utanee motee doongee
aaj dikhegaa badaa chandramaa
kahatee bas yah baat aaee hai
kab tak chane chabaaoongaa maan
kab tak sattoo khaaoongaa main
kyaa yon hee bhookhe rah rah kar
kabhee badaa ho paaoongaa main?
sach kah de maan! kab bolegee
gol chaand kee raat aaee hai!!
बहुत दिनों के बाद आज माँ
रोटी की फिर याद आई है।
कल भी तूने प्याज दिया था।
परसों बस जल घूँट पिया था।
कई दिनों तक सूखे टुकड़े
भिगो भिगो कर स्वाद लिया था।
बात मगर यह भूल गया हूँ
रोटी किस दिन हाथ आई है।
माँ! क्यों नहीं हमारे घर में
रोज रोज रोटी बनती है?
बस डिब्बों को खोल खोल कर
बचे हुए दाने गिनती है।
महँगाई क्या होती है माँ
इस घर के क्यों पास आई है?
कहती तो है मेरे चंदा!
चंदा जैसी रोटी दूँगी।
जिस दिन जैसा चाँद दिखेगा
उस दिन उतनी मोटी दूँगी।
आज दिखेगा बड़ा चंद्रमा
कहती बस यह बात आई है।
कब तक चने चबाऊँगा माँ
कब तक सत्तू खाऊँगा मैं
क्या यों ही भूखे रह रह कर
कभी बड़ा हो पाऊँगा मैं?
सच कह दे माँ! कब बोलेगी
गोल चाँद की रात आई है!!