कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५९ / १६४ № 159 of 164 रचना १५९ / १६४
२९ मई २०२० 29 May 2020 २९ मई २०२०

सावन का सत्कार saawan kaa satkaar सावन का सत्कार

जाने कौन दिशा से आए

बादल मेरे द्वार।

सारे जतन किए मौसम के

मन से हूँ तैयार।

भर भंडार अनाज सहेजा

डिब्बों में भर लिया मसाला।

पशुधन रहे न भूखा उनका

समुचित चारा  चना सँभाला।

वस्त्र सुखाने रस्सी बाँधी

छुए न ज्यों बौछार।

आड़े समय साथ दें ऐसी

कुछ सागों को चुना  सुखाया।

कुछ स्थान मुरब्बों ने भी

भरे रसोई घर में पाया।

सबसे आगे आकर जम गए

पापड़  बड़ी  अचार।

सारे गमलों को सरकाकर

कोने में कर लिया सुरक्षित

और क्यारियों को कर डाला

जल निकास के लिए व्यवस्थित।

कीट न बोलें हल्ला इनपर

ऐसा किया जुगाड़।

बेलों वाली चुनी सब्जियाँ

बीज बो दिये डोरी तानी।

भर मौसम होगी भरपाई

जब आएगी बरखा रानी।

झूल झूलते गीत करेंगे

सावन का सत्कार।

jaane kaun dishaa se aae

baadal mere dvaar

saare jatan kie mausam ke

man se hoon taiyaar

·

bhar bhandaar anaaj sahejaa

dibbon men bhar liyaa masaalaa

pashudhan rahe n bhookhaa unakaa

samuchit chaaraa chanaa sanbhaalaa

·

wastr sukhaane rassee baandhee

chue n jyon bauchaar

·

aade samay saath den aisee

kuch saagon ko chunaa sukhaayaa

kuch sthaan murabbon ne bhee

bhare rasoee ghar men paayaa

·

sabase aage aakar jam gae

paapad badee achaar

·

saare gamalon ko sarakaakar

kone men kar liyaa surakshit

aur kyaariyon ko kar daalaa

jal nikaas ke lie wyawasthit

·

keet n bolen hallaa inapar

aisaa kiyaa jugaad

·

belon waalee chunee sabjiyaan

beej bo diye doree taanee

bhar mausam hogee bharapaaee

jab aaegee barakhaa raanee

·

jhool jhoolate geet karenge

saawan kaa satkaar

जाने कौन दिशा से आए

बादल मेरे द्वार।

सारे जतन किए मौसम के

मन से हूँ तैयार।

भर भंडार अनाज सहेजा

डिब्बों में भर लिया मसाला।

पशुधन रहे न भूखा उनका

समुचित चारा  चना सँभाला।

वस्त्र सुखाने रस्सी बाँधी

छुए न ज्यों बौछार।

आड़े समय साथ दें ऐसी

कुछ सागों को चुना  सुखाया।

कुछ स्थान मुरब्बों ने भी

भरे रसोई घर में पाया।

सबसे आगे आकर जम गए

पापड़  बड़ी  अचार।

सारे गमलों को सरकाकर

कोने में कर लिया सुरक्षित

और क्यारियों को कर डाला

जल निकास के लिए व्यवस्थित।

कीट न बोलें हल्ला इनपर

ऐसा किया जुगाड़।

बेलों वाली चुनी सब्जियाँ

बीज बो दिये डोरी तानी।

भर मौसम होगी भरपाई

जब आएगी बरखा रानी।

झूल झूलते गीत करेंगे

सावन का सत्कार।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗