सावन का सत्कार saawan kaa satkaar सावन का सत्कार
जाने कौन दिशा से आए
बादल मेरे द्वार।
सारे जतन किए मौसम के
मन से हूँ तैयार।
भर भंडार अनाज सहेजा
डिब्बों में भर लिया मसाला।
पशुधन रहे न भूखा उनका
समुचित चारा चना सँभाला।
वस्त्र सुखाने रस्सी बाँधी
छुए न ज्यों बौछार।
आड़े समय साथ दें ऐसी
कुछ सागों को चुना सुखाया।
कुछ स्थान मुरब्बों ने भी
भरे रसोई घर में पाया।
सबसे आगे आकर जम गए
पापड़ बड़ी अचार।
सारे गमलों को सरकाकर
कोने में कर लिया सुरक्षित
और क्यारियों को कर डाला
जल निकास के लिए व्यवस्थित।
कीट न बोलें हल्ला इनपर
ऐसा किया जुगाड़।
बेलों वाली चुनी सब्जियाँ
बीज बो दिये डोरी तानी।
भर मौसम होगी भरपाई
जब आएगी बरखा रानी।
झूल झूलते गीत करेंगे
सावन का सत्कार।
jaane kaun dishaa se aae
baadal mere dvaar
saare jatan kie mausam ke
man se hoon taiyaar
bhar bhandaar anaaj sahejaa
dibbon men bhar liyaa masaalaa
pashudhan rahe n bhookhaa unakaa
samuchit chaaraa chanaa sanbhaalaa
wastr sukhaane rassee baandhee
chue n jyon bauchaar
aade samay saath den aisee
kuch saagon ko chunaa sukhaayaa
kuch sthaan murabbon ne bhee
bhare rasoee ghar men paayaa
sabase aage aakar jam gae
paapad badee achaar
saare gamalon ko sarakaakar
kone men kar liyaa surakshit
aur kyaariyon ko kar daalaa
jal nikaas ke lie wyawasthit
keet n bolen hallaa inapar
aisaa kiyaa jugaad
belon waalee chunee sabjiyaan
beej bo diye doree taanee
bhar mausam hogee bharapaaee
jab aaegee barakhaa raanee
jhool jhoolate geet karenge
saawan kaa satkaar
जाने कौन दिशा से आए
बादल मेरे द्वार।
सारे जतन किए मौसम के
मन से हूँ तैयार।
भर भंडार अनाज सहेजा
डिब्बों में भर लिया मसाला।
पशुधन रहे न भूखा उनका
समुचित चारा चना सँभाला।
वस्त्र सुखाने रस्सी बाँधी
छुए न ज्यों बौछार।
आड़े समय साथ दें ऐसी
कुछ सागों को चुना सुखाया।
कुछ स्थान मुरब्बों ने भी
भरे रसोई घर में पाया।
सबसे आगे आकर जम गए
पापड़ बड़ी अचार।
सारे गमलों को सरकाकर
कोने में कर लिया सुरक्षित
और क्यारियों को कर डाला
जल निकास के लिए व्यवस्थित।
कीट न बोलें हल्ला इनपर
ऐसा किया जुगाड़।
बेलों वाली चुनी सब्जियाँ
बीज बो दिये डोरी तानी।
भर मौसम होगी भरपाई
जब आएगी बरखा रानी।
झूल झूलते गीत करेंगे
सावन का सत्कार।