कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ९७ / ११४ № 97 of 114 रचना ९७ / ११४
१ मई २०२० 1 May 2020 १ मई २०२०

ससुराल नहीं जाऊँगी sasuraal naheen jaaoongee ससुराल नहीं जाऊँगी

दो दिन बाद ही शुभदा का विवाह है, आज मेहंदी की रस्म के लिए आमंत्रित की हुई सखियाँ ढोलक की थाप पर झूम रही थीं, मंगल गीत गाए जा रहे थे. उसके सपनों का राजकुमार प्रभात बारात लेकर आएगा और शुभदा सात फेरों के बंधन में बंधकर हमेशा के लिए उसकी हो जाएगी. सखियों से घिरी शुभदा के हाथों व पैरों में मेहंदी रचाई जा रही थी. हाल में धीमा सा मधुर संगीत गूँज रहा था. खुशनुमा वातावरण में चाय-नाश्ता,

do din baad hee shubhadaa kaa wiwaah hai, aaj mehandee kee rasm ke lie aamantrit kee huee sakhiyaan dholak kee thaap par jhoom rahee theen, mangal geet gaae jaa rahe the usake sapanon kaa raajakumaar prabhaat baaraat lekar aaegaa aur shubhadaa saat pheron ke bandhan men bandhakar hameshaa ke lie usakee ho jaaegee sakhiyon se ghiree shubhadaa ke haathon w pairon men mehandee rachaaee jaa rahee thee haal men dheemaa saa madhur sangeet goonj rahaa thaa khushanumaa waataawaran men chaay-naashtaa,

दो दिन बाद ही शुभदा का विवाह है, आज मेहंदी की रस्म के लिए आमंत्रित की हुई सखियाँ ढोलक की थाप पर झूम रही थीं, मंगल गीत गाए जा रहे थे. उसके सपनों का राजकुमार प्रभात बारात लेकर आएगा और शुभदा सात फेरों के बंधन में बंधकर हमेशा के लिए उसकी हो जाएगी. सखियों से घिरी शुभदा के हाथों व पैरों में मेहंदी रचाई जा रही थी. हाल में धीमा सा मधुर संगीत गूँज रहा था. खुशनुमा वातावरण में चाय-नाश्ता,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗