उड़ परिंदे ud parinde उड़ परिंदे
उड़ परिंदे!
आ रहा पीछे शिकारी।
देख उसके हाथ में वो जाल है।
जेब है फूली मगर कंगाल है।
तू धनी संतुष्ट मन तेरा सदा
वो सदा ही भूख से बेहाल है।
अरे चल दे!
पंख नोचेगा भिखारी।
जीव हत्या उस वधिक का लक्ष्य है।
जीव का ही रक्त उसका भक्ष्य है।
आसमाँ तेरा सदा आज़ाद तू
जा वहाँ जिस छोर पर तू रक्ष्य है।
जाग बंदे!
वरन कटने की है बारी।
जाल में दाने बिछाकर वो खड़ा।
मौत की दावत तुझे देने अड़ा।
देख लालच में न आना जान ले।
धूर्त पापी है कुटिल कातिल बड़ा।
उस दरिंदे
की सदा खाली पिटारी।
ud parinde!
aa rahaa peeche shikaaree
dekh usake haath men wo jaal hai
jeb hai phoolee magar kangaal hai
too dhanee santusht man teraa sadaa
wo sadaa hee bhookh se behaal hai
are chal de!
pankh nochegaa bhikhaaree
jeew hatyaa us wadhik kaa lakshy hai
jeew kaa hee rakt usakaa bhakshy hai
aasamaan teraa sadaa aazaad too
jaa wahaan jis chor par too rakshy hai
jaag bande!
waran katane kee hai baaree
jaal men daane bichaakar wo khadaa
maut kee daawat tujhe dene adaa
dekh laalach men n aanaa jaan le
dhoort paapee hai kutil kaatil badaa
us darinde
kee sadaa khaalee pitaaree
उड़ परिंदे!
आ रहा पीछे शिकारी।
देख उसके हाथ में वो जाल है।
जेब है फूली मगर कंगाल है।
तू धनी संतुष्ट मन तेरा सदा
वो सदा ही भूख से बेहाल है।
अरे चल दे!
पंख नोचेगा भिखारी।
जीव हत्या उस वधिक का लक्ष्य है।
जीव का ही रक्त उसका भक्ष्य है।
आसमाँ तेरा सदा आज़ाद तू
जा वहाँ जिस छोर पर तू रक्ष्य है।
जाग बंदे!
वरन कटने की है बारी।
जाल में दाने बिछाकर वो खड़ा।
मौत की दावत तुझे देने अड़ा।
देख लालच में न आना जान ले।
धूर्त पापी है कुटिल कातिल बड़ा।
उस दरिंदे
की सदा खाली पिटारी।