कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १४७ / १६४ № 147 of 164 रचना १४७ / १६४
२७ नवम्बर २०१९ 27 November 2019 २७ नवम्बर २०१९

उड़ परिंदे ud parinde उड़ परिंदे

उड़ परिंदे!

आ रहा पीछे शिकारी।

देख उसके हाथ में वो जाल है।

जेब है फूली  मगर कंगाल है।

तू धनी  संतुष्ट मन तेरा सदा

वो सदा ही भूख से बेहाल है।

अरे  चल दे!

पंख नोचेगा भिखारी।

जीव हत्या उस वधिक का लक्ष्य है।

जीव का ही रक्त उसका भक्ष्य है।

आसमाँ तेरा    सदा आज़ाद तू

जा वहाँ जिस छोर पर तू रक्ष्य है।

जाग बंदे!

वरन कटने की है बारी।

जाल में दाने बिछाकर वो खड़ा।

मौत की दावत तुझे देने अड़ा।

देख लालच में न आना जान ले।

धूर्त पापी  है कुटिल कातिल बड़ा।

उस दरिंदे

की सदा खाली पिटारी।

ud parinde!

aa rahaa peeche shikaaree

·

dekh usake haath men wo jaal hai

jeb hai phoolee magar kangaal hai

too dhanee santusht man teraa sadaa

wo sadaa hee bhookh se behaal hai

·

are chal de!

pankh nochegaa bhikhaaree

·

jeew hatyaa us wadhik kaa lakshy hai

jeew kaa hee rakt usakaa bhakshy hai

aasamaan teraa sadaa aazaad too

jaa wahaan jis chor par too rakshy hai

·

jaag bande!

waran katane kee hai baaree

·

jaal men daane bichaakar wo khadaa

maut kee daawat tujhe dene adaa

·

dekh laalach men n aanaa jaan le

dhoort paapee hai kutil kaatil badaa

·

us darinde

kee sadaa khaalee pitaaree

उड़ परिंदे!

आ रहा पीछे शिकारी।

देख उसके हाथ में वो जाल है।

जेब है फूली  मगर कंगाल है।

तू धनी  संतुष्ट मन तेरा सदा

वो सदा ही भूख से बेहाल है।

अरे  चल दे!

पंख नोचेगा भिखारी।

जीव हत्या उस वधिक का लक्ष्य है।

जीव का ही रक्त उसका भक्ष्य है।

आसमाँ तेरा    सदा आज़ाद तू

जा वहाँ जिस छोर पर तू रक्ष्य है।

जाग बंदे!

वरन कटने की है बारी।

जाल में दाने बिछाकर वो खड़ा।

मौत की दावत तुझे देने अड़ा।

देख लालच में न आना जान ले।

धूर्त पापी  है कुटिल कातिल बड़ा।

उस दरिंदे

की सदा खाली पिटारी।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗