कल हो न हो kal ho n ho कल हो न हो
आज सच है।
आज को हल कीजिये
कल हो न हो।
स्वप्न जो देखे उन्हें आकार दें।
भाव मन में जो बहें विस्तार दें।
बाँध मुट्ठी आज ही संकल्प की
कल्पनाओं को नया आकार दें।
साधना से
सफल हर-पल कीजिये
कल हो न हो।
मन समंदर गूढ़ है मंथन करें
धूप हो या छाँव बस चिंतन करें।
मूल-मुद्दों पर मनन हो आज ही
कर्म तप से ताप तन कंचन करें।
चिर विजय है
चाह चित से कीजिये
कल हो न हो।
आज सोए आप तो खो जाएँगे।
गुमशुदा इतिहास को दुहराएँगे।
फिसल जाएगा समय यह रेत सा
क्या हुआ जो बाद में पछताएँगे।
मन-तमस हर
आत्म उज्जवल कीजिये
कल हो न हो।
aaj sach hai
aaj ko hal keejiye
kal ho n ho
svapn jo dekhe unhen aakaar den
bhaaw man men jo bahen wistaar den
baandh mutthee aaj hee sankalp kee
kalpanaaon ko nayaa aakaar den
saadhanaa se
saphal har-pal keejiye
kal ho n ho
man samandar gooढ़ hai manthan karen
dhoop ho yaa chaanv bas chintan karen
mool-muddon par manan ho aaj hee
karm tap se taap tan kanchan karen
chir wijay hai
chaah chit se keejiye
kal ho n ho
aaj soe aap to kho jaaenge
gumashudaa itihaas ko duharaaenge
phisal jaaegaa samay yah ret saa
kyaa huaa jo baad men pachataaenge
man-tamas har
aatm ujjawal keejiye
kal ho n ho
आज सच है।
आज को हल कीजिये
कल हो न हो।
स्वप्न जो देखे उन्हें आकार दें।
भाव मन में जो बहें विस्तार दें।
बाँध मुट्ठी आज ही संकल्प की
कल्पनाओं को नया आकार दें।
साधना से
सफल हर-पल कीजिये
कल हो न हो।
मन समंदर गूढ़ है मंथन करें
धूप हो या छाँव बस चिंतन करें।
मूल-मुद्दों पर मनन हो आज ही
कर्म तप से ताप तन कंचन करें।
चिर विजय है
चाह चित से कीजिये
कल हो न हो।
आज सोए आप तो खो जाएँगे।
गुमशुदा इतिहास को दुहराएँगे।
फिसल जाएगा समय यह रेत सा
क्या हुआ जो बाद में पछताएँगे।
मन-तमस हर
आत्म उज्जवल कीजिये
कल हो न हो।