कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १७८ / २०४ № 178 of 204 रचना १७८ / २०४
२९ नवम्बर २०१९ 29 November 2019 २९ नवम्बर २०१९

खुशबुओं के बंद सब khushabuon ke band sab खुशबुओं के बंद सब

ख़ुशबुओं के बंद सब बाज़ार हैं

बिक रहे चहुं ओर केवल खार हैं

पिस रही कदमों तले इंसानियत

शीर्ष सजते पाशविक व्यवहार हैं

वक्र रेखाओं से हैं सहमी सरल

उलझनों में ज्यामितिक आकार हैं

भ्रमित ना हों देखकर आकाश को

भूमि पर दम तोड़ते आधार हैं

क्या वे सब हकदार हैं सम्मान के

कंठ में जिनके पड़े गुल हार हैं?

बाँध लें पुल प्रेम का उनके लिए

जो खड़े नफ़रत लिए उस पार हैं

उन जड़ों पर बेअसर हैं विष सभी

सींचते जिनको अमिय-संस्कार हैं

ज़िंदगी को अर्थ दें, इस जन्म में

‘कल्पना’ केवल मिले दिन चार हैं

kushabuon ke band sab baazaar hain

bik rahe chahun or kewal khaar hain

·

pis rahee kadamon tale insaaniyat

sheersh sajate paashawik wyawahaar hain

·

wakr rekhaaon se hain sahamee saral

ulajhanon men jyaamitik aakaar hain

·

bhramit naa hon dekhakar aakaash ko

bhoomi par dam todate aadhaar hain

·

kyaa we sab hakadaar hain sammaan ke

kanth men jinake pade gul haar hain?

·

baandh len pul prem kaa unake lie

jo khade nafarat lie us paar hain

·

un jadon par beasar hain wish sabhee

seenchate jinako amiy-sanskaar hain

·

zindagee ko arth den, is janm men

‘kalpanaa’ kewal mile din chaar hain

ख़ुशबुओं के बंद सब बाज़ार हैं

बिक रहे चहुं ओर केवल खार हैं

पिस रही कदमों तले इंसानियत

शीर्ष सजते पाशविक व्यवहार हैं

वक्र रेखाओं से हैं सहमी सरल

उलझनों में ज्यामितिक आकार हैं

भ्रमित ना हों देखकर आकाश को

भूमि पर दम तोड़ते आधार हैं

क्या वे सब हकदार हैं सम्मान के

कंठ में जिनके पड़े गुल हार हैं?

बाँध लें पुल प्रेम का उनके लिए

जो खड़े नफ़रत लिए उस पार हैं

उन जड़ों पर बेअसर हैं विष सभी

सींचते जिनको अमिय-संस्कार हैं

ज़िंदगी को अर्थ दें, इस जन्म में

‘कल्पना’ केवल मिले दिन चार हैं

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗