खुशबुओं के बंद सब khushabuon ke band sab खुशबुओं के बंद सब
ख़ुशबुओं के बंद सब बाज़ार हैं
बिक रहे चहुं ओर केवल खार हैं
पिस रही कदमों तले इंसानियत
शीर्ष सजते पाशविक व्यवहार हैं
वक्र रेखाओं से हैं सहमी सरल
उलझनों में ज्यामितिक आकार हैं
भ्रमित ना हों देखकर आकाश को
भूमि पर दम तोड़ते आधार हैं
क्या वे सब हकदार हैं सम्मान के
कंठ में जिनके पड़े गुल हार हैं?
बाँध लें पुल प्रेम का उनके लिए
जो खड़े नफ़रत लिए उस पार हैं
उन जड़ों पर बेअसर हैं विष सभी
सींचते जिनको अमिय-संस्कार हैं
ज़िंदगी को अर्थ दें, इस जन्म में
‘कल्पना’ केवल मिले दिन चार हैं
kushabuon ke band sab baazaar hain
bik rahe chahun or kewal khaar hain
pis rahee kadamon tale insaaniyat
sheersh sajate paashawik wyawahaar hain
wakr rekhaaon se hain sahamee saral
ulajhanon men jyaamitik aakaar hain
bhramit naa hon dekhakar aakaash ko
bhoomi par dam todate aadhaar hain
kyaa we sab hakadaar hain sammaan ke
kanth men jinake pade gul haar hain?
baandh len pul prem kaa unake lie
jo khade nafarat lie us paar hain
un jadon par beasar hain wish sabhee
seenchate jinako amiy-sanskaar hain
zindagee ko arth den, is janm men
‘kalpanaa’ kewal mile din chaar hain
ख़ुशबुओं के बंद सब बाज़ार हैं
बिक रहे चहुं ओर केवल खार हैं
पिस रही कदमों तले इंसानियत
शीर्ष सजते पाशविक व्यवहार हैं
वक्र रेखाओं से हैं सहमी सरल
उलझनों में ज्यामितिक आकार हैं
भ्रमित ना हों देखकर आकाश को
भूमि पर दम तोड़ते आधार हैं
क्या वे सब हकदार हैं सम्मान के
कंठ में जिनके पड़े गुल हार हैं?
बाँध लें पुल प्रेम का उनके लिए
जो खड़े नफ़रत लिए उस पार हैं
उन जड़ों पर बेअसर हैं विष सभी
सींचते जिनको अमिय-संस्कार हैं
ज़िंदगी को अर्थ दें, इस जन्म में
‘कल्पना’ केवल मिले दिन चार हैं