कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ११७ / २०४ № 117 of 204 रचना ११७ / २०४
२३ मार्च २०१६ 23 March 2016 २३ मार्च २०१६

रंगों भरा मौसम rangon bharaa mausam रंगों भरा मौसम

गुल

खिले, गुलशन जगे, खुशबू बना मौसम

सृष्टि

का कण-कण हुआ,

रंगों

भरा मौसम

क्यारियाँ, फुलवारियाँ, सजने लगीं खुश हो

बालपन

में रंग नव,

भरने

लगा मौसम

गोद

ले कलियाँ,

तितलियाँ, ओस-कण, भँवरे

दे

रहा हर-मन सुकूँ, यह खुशनुमा मौसम

अंकुरित

होने लगे,

उल्लास

के पौधे

आस

के फूलों-फलों से, लद गया मौसम

सूर्य-रथ

से सात-रंगी नव्य किरणों को

देख

उतरता भूमि पर,

खुलकर

खिला मौसम

लाल, नारंगी, गुलाबी, पीत या नीला

रंग

सब मिल कर बनाते, प्यार का मौसम

फागुनी

दिन फिर मिले,

जी

भर कहो ग़ज़लें

भावों

का भंडार ले,

सम्मुख

खड़ा मौसम

धूल

धूमिल ज़िन्दगी को, घोल रंगों में

‘कल्पना’ प्रेमिल बना लो, कह रहा मौसम

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

gul

khile, gulashan jage, khushaboo banaa mausam

·

sriishti

kaa kan-kan huaa,

rangon

bharaa mausam

·

kyaariyaan, phulawaariyaan, sajane lageen khush ho

·

baalapan

men rang naw,

bharane

lagaa mausam

·

god

le kaliyaan,

titaliyaan, os-kan, bhanvare

·

de

rahaa har-man sukoon, yah khushanumaa mausam

·

ankurit

hone lage,

ullaas

ke paudhe

·

aas

ke phoolon-phalon se, lad gayaa mausam

·

soory-rath

se saat-rangee navy kiranon ko

·

dekh

utarataa bhoomi par,

khulakar

khilaa mausam

·

laal, naarangee, gulaabee, peet yaa neelaa

·

rang

sab mil kar banaate, pyaar kaa mausam

·

phaagunee

din phir mile,

jee

bhar kaho gazalen

·

bhaawon

kaa bhandaar le,

sammukh

khadaa mausam

·

dhool

dhoomil zindagee ko, ghol rangon men

·

‘kalpanaa’ premil banaa lo, kah rahaa mausam

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

गुल

खिले, गुलशन जगे, खुशबू बना मौसम

सृष्टि

का कण-कण हुआ,

रंगों

भरा मौसम

क्यारियाँ, फुलवारियाँ, सजने लगीं खुश हो

बालपन

में रंग नव,

भरने

लगा मौसम

गोद

ले कलियाँ,

तितलियाँ, ओस-कण, भँवरे

दे

रहा हर-मन सुकूँ, यह खुशनुमा मौसम

अंकुरित

होने लगे,

उल्लास

के पौधे

आस

के फूलों-फलों से, लद गया मौसम

सूर्य-रथ

से सात-रंगी नव्य किरणों को

देख

उतरता भूमि पर,

खुलकर

खिला मौसम

लाल, नारंगी, गुलाबी, पीत या नीला

रंग

सब मिल कर बनाते, प्यार का मौसम

फागुनी

दिन फिर मिले,

जी

भर कहो ग़ज़लें

भावों

का भंडार ले,

सम्मुख

खड़ा मौसम

धूल

धूमिल ज़िन्दगी को, घोल रंगों में

‘कल्पना’ प्रेमिल बना लो, कह रहा मौसम

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗