कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ११८ / २०५ № 118 of 205 रचना ११८ / २०५
२३ मार्च २०१६ 23 March 2016 २३ मार्च २०१६

रंगों भरा मौसम rangon bharaa mausam रंगों भरा मौसम

गुल

खिले, गुलशन जगे, खुशबू बना मौसम

॥

सृष्टि

का कण-कण हुआ,

रंगों

भरा मौसम

॥

क्यारियाँ, फुलवारियाँ, सजने लगीं खुश हो

॥

बालपन

में रंग नव,

भरने

लगा मौसम

॥

गोद

ले कलियाँ,

तितलियाँ, ओस-कण, भँवरे

॥

दे

रहा हर-मन सुकूँ, यह खुशनुमा मौसम

॥

अंकुरित

होने लगे,

उल्लास

के पौधे

॥

आस

के फूलों-फलों से, लद गया मौसम

॥

सूर्य-रथ

से सात-रंगी नव्य किरणों को

॥

देख

उतरता भूमि पर,

खुलकर

खिला मौसम

॥

लाल, नारंगी, गुलाबी, पीत या नीला

॥

रंग

सब मिल कर बनाते, प्यार का मौसम

॥

फागुनी

दिन फिर मिले,

जी

भर कहो ग़ज़लें

॥

भावों

का भंडार ले,

सम्मुख

खड़ा मौसम

॥

धूल

धूमिल ज़िन्दगी को, घोल रंगों में

॥

‘कल्पना’ प्रेमिल बना लो, कह रहा मौसम

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

gul

khile, gulashan jage, khushaboo banaa mausam

·

sriishti

kaa kan-kan huaa,

rangon

bharaa mausam

·

kyaariyaan, phulawaariyaan, sajane lageen khush ho

·

baalapan

men rang naw,

bharane

lagaa mausam

·

god

le kaliyaan,

titaliyaan, os-kan, bhanvare

·

de

rahaa har-man sukoon, yah khushanumaa mausam

·

ankurit

hone lage,

ullaas

ke paudhe

·

aas

ke phoolon-phalon se, lad gayaa mausam

·

soory-rath

se saat-rangee navy kiranon ko

·

dekh

utarataa bhoomi par,

khulakar

khilaa mausam

·

laal, naarangee, gulaabee, peet yaa neelaa

·

rang

sab mil kar banaate, pyaar kaa mausam

·

phaagunee

din phir mile,

jee

bhar kaho gazalen

·

bhaawon

kaa bhandaar le,

sammukh

khadaa mausam

·

dhool

dhoomil zindagee ko, ghol rangon men

·

‘kalpanaa’ premil banaa lo, kah rahaa mausam

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

गुल

खिले, गुलशन जगे, खुशबू बना मौसम

॥

सृष्टि

का कण-कण हुआ,

रंगों

भरा मौसम

॥

क्यारियाँ, फुलवारियाँ, सजने लगीं खुश हो

॥

बालपन

में रंग नव,

भरने

लगा मौसम

॥

गोद

ले कलियाँ,

तितलियाँ, ओस-कण, भँवरे

॥

दे

रहा हर-मन सुकूँ, यह खुशनुमा मौसम

॥

अंकुरित

होने लगे,

उल्लास

के पौधे

॥

आस

के फूलों-फलों से, लद गया मौसम

॥

सूर्य-रथ

से सात-रंगी नव्य किरणों को

॥

देख

उतरता भूमि पर,

खुलकर

खिला मौसम

॥

लाल, नारंगी, गुलाबी, पीत या नीला

॥

रंग

सब मिल कर बनाते, प्यार का मौसम

॥

फागुनी

दिन फिर मिले,

जी

भर कहो ग़ज़लें

॥

भावों

का भंडार ले,

सम्मुख

खड़ा मौसम

॥

धूल

धूमिल ज़िन्दगी को, घोल रंगों में

॥

‘कल्पना’ प्रेमिल बना लो, कह रहा मौसम

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗