कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७१ / २०५ № 71 of 205 रचना ७१ / २०५
२६ फ़रवरी २०१५ 26 February 2015 २६ फ़रवरी २०१५

मीत जागते रहो meet jaagate raho मीत जागते रहो

वसुंधरा

करे पुकार, मीत जागते रहो

॥

कि

लौट जाए ना बहार, मीत जागते रहो

॥

उमड़

रहे हैं उपवनों में, कंटकों के काफिले

॥

करें

न कलियों पर प्रहार, मीत जागते रहो

॥

समंदरों

की सैर को सँवर रहीं सुनामियाँ

॥

निगल

न जाए तट को ज्वार, मीत जागते रहो

॥

छलों-बलों को छोड़के, रखो दिलों

को जोड़के

॥

न

टूट जाएँ नेह-तार, मीत जागते रहो

॥

गला

ही घोंटते रहे, जो वोट करके वायदे

॥

करें

न चोट बार-बार, मीत जागते रहो

॥

चलो

न छाँह छीनकर,

छुड़ाके बाँह गाँव की

॥

न

होगा कोई गमगुसार,

मीत जागते रहो

॥

तरक्कियों

के दर कई, अखंड हो जो एकता

॥

न

खंड-खंड हों विचार,

मीत जागते रहो

॥

बनो

न खुद खुदा कि रूठ जाए रब-रसूल ही

॥

न

बंद हों दुआ के द्वार, मीत जागते रहो

॥

प्रलोभ-ज्वाल

देश को, न लील जाए “कल्पना”

॥

जगो, उठो, तजो खुमार, मीत जागते रहो

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

wasundharaa

kare pukaar, meet jaagate raho

·

ki

laut jaae naa bahaar, meet jaagate raho

·

umad

rahe hain upawanon men, kantakon ke kaaphile

·

karen

n kaliyon par prahaar, meet jaagate raho

·

samandaron

kee sair ko sanvar raheen sunaamiyaan

·

nigal

n jaae tat ko jvaar, meet jaagate raho

·

chalon-balon ko chodake, rakho dilon

ko jodake

·

n

toot jaaen neh-taar, meet jaagate raho

·

galaa

hee ghontate rahe, jo wot karake waayade

·

karen

n chot baar-baar, meet jaagate raho

·

chalo

n chaanh cheenakar,

chudaake baanh gaanv kee

·

n

hogaa koee gamagusaar,

meet jaagate raho

·

tarakkiyon

ke dar kaee, akhand ho jo ekataa

·

n

khand-khand hon wichaar,

meet jaagate raho

·

bano

n khud khudaa ki rooth jaae rab-rasool hee

·

n

band hon duaa ke dvaar, meet jaagate raho

·

pralobh-jvaal

desh ko, n leel jaae “kalpanaa”

·

jago, utho, tajo khumaar, meet jaagate raho

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

वसुंधरा

करे पुकार, मीत जागते रहो

॥

कि

लौट जाए ना बहार, मीत जागते रहो

॥

उमड़

रहे हैं उपवनों में, कंटकों के काफिले

॥

करें

न कलियों पर प्रहार, मीत जागते रहो

॥

समंदरों

की सैर को सँवर रहीं सुनामियाँ

॥

निगल

न जाए तट को ज्वार, मीत जागते रहो

॥

छलों-बलों को छोड़के, रखो दिलों

को जोड़के

॥

न

टूट जाएँ नेह-तार, मीत जागते रहो

॥

गला

ही घोंटते रहे, जो वोट करके वायदे

॥

करें

न चोट बार-बार, मीत जागते रहो

॥

चलो

न छाँह छीनकर,

छुड़ाके बाँह गाँव की

॥

न

होगा कोई गमगुसार,

मीत जागते रहो

॥

तरक्कियों

के दर कई, अखंड हो जो एकता

॥

न

खंड-खंड हों विचार,

मीत जागते रहो

॥

बनो

न खुद खुदा कि रूठ जाए रब-रसूल ही

॥

न

बंद हों दुआ के द्वार, मीत जागते रहो

॥

प्रलोभ-ज्वाल

देश को, न लील जाए “कल्पना”

॥

जगो, उठो, तजो खुमार, मीत जागते रहो

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗