कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७० / २०४ № 70 of 204 रचना ७० / २०४
२६ फ़रवरी २०१५ 26 February 2015 २६ फ़रवरी २०१५

मीत जागते रहो meet jaagate raho मीत जागते रहो

वसुंधरा

करे पुकार, मीत जागते रहो

कि

लौट जाए ना बहार, मीत जागते रहो

उमड़

रहे हैं उपवनों में, कंटकों के काफिले

करें

न कलियों पर प्रहार, मीत जागते रहो

समंदरों

की सैर को सँवर रहीं सुनामियाँ

निगल

न जाए तट को ज्वार, मीत जागते रहो

छलों-बलों को छोड़के, रखो दिलों

को जोड़के

टूट जाएँ नेह-तार, मीत जागते रहो

गला

ही घोंटते रहे, जो वोट करके वायदे

करें

न चोट बार-बार, मीत जागते रहो

चलो

न छाँह छीनकर,

छुड़ाके बाँह गाँव की

होगा कोई गमगुसार,

मीत जागते रहो

तरक्कियों

के दर कई, अखंड हो जो एकता

खंड-खंड हों विचार,

मीत जागते रहो

बनो

न खुद खुदा कि रूठ जाए रब-रसूल ही

बंद हों दुआ के द्वार, मीत जागते रहो

प्रलोभ-ज्वाल

देश को, न लील जाए “कल्पना”

जगो, उठो, तजो खुमार, मीत जागते रहो

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

wasundharaa

kare pukaar, meet jaagate raho

·

ki

laut jaae naa bahaar, meet jaagate raho

·

umad

rahe hain upawanon men, kantakon ke kaaphile

·

karen

n kaliyon par prahaar, meet jaagate raho

·

samandaron

kee sair ko sanvar raheen sunaamiyaan

·

nigal

n jaae tat ko jvaar, meet jaagate raho

·

chalon-balon ko chodake, rakho dilon

ko jodake

·

n

toot jaaen neh-taar, meet jaagate raho

·

galaa

hee ghontate rahe, jo wot karake waayade

·

karen

n chot baar-baar, meet jaagate raho

·

chalo

n chaanh cheenakar,

chudaake baanh gaanv kee

·

n

hogaa koee gamagusaar,

meet jaagate raho

·

tarakkiyon

ke dar kaee, akhand ho jo ekataa

·

n

khand-khand hon wichaar,

meet jaagate raho

·

bano

n khud khudaa ki rooth jaae rab-rasool hee

·

n

band hon duaa ke dvaar, meet jaagate raho

·

pralobh-jvaal

desh ko, n leel jaae “kalpanaa”

·

jago, utho, tajo khumaar, meet jaagate raho

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

वसुंधरा

करे पुकार, मीत जागते रहो

कि

लौट जाए ना बहार, मीत जागते रहो

उमड़

रहे हैं उपवनों में, कंटकों के काफिले

करें

न कलियों पर प्रहार, मीत जागते रहो

समंदरों

की सैर को सँवर रहीं सुनामियाँ

निगल

न जाए तट को ज्वार, मीत जागते रहो

छलों-बलों को छोड़के, रखो दिलों

को जोड़के

टूट जाएँ नेह-तार, मीत जागते रहो

गला

ही घोंटते रहे, जो वोट करके वायदे

करें

न चोट बार-बार, मीत जागते रहो

चलो

न छाँह छीनकर,

छुड़ाके बाँह गाँव की

होगा कोई गमगुसार,

मीत जागते रहो

तरक्कियों

के दर कई, अखंड हो जो एकता

खंड-खंड हों विचार,

मीत जागते रहो

बनो

न खुद खुदा कि रूठ जाए रब-रसूल ही

बंद हों दुआ के द्वार, मीत जागते रहो

प्रलोभ-ज्वाल

देश को, न लील जाए “कल्पना”

जगो, उठो, तजो खुमार, मीत जागते रहो

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗