कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६९ / २०४ № 69 of 204 रचना ६९ / २०४
२४ फ़रवरी २०१५ 24 February 2015 २४ फ़रवरी २०१५

गुल खिले बसंती gul khile basantee गुल खिले बसंती

घटे

शीत के भाव-ताव, दिन बने बसंती

गुलशन

हुए निहाल, और गुल खिले बसंती

पेड़-पेड़

ने पूर्ण पुराने वस्त्र त्यागकर

फिर

से हो तैयार, गात पर धरे बसंती

अमराई

में जा पहुँची पट खोल कोकिला

जी

भर चूसे आम, मधुर रस भरे बसंती

पीत-सुनहरी

सरसों ने भी खूब सजाए

खेत-खेत

में खिले-खिले, सिलसिले बसंती

फुलवारी

की गोद भरी नन्हें मुन्नों से

किलकारी

के बोल, हवा में घुले बसंती

कलिकाओं

की सरस रागिनी, सुनकर सुर में

भँवरों

ने दी ताल, तराने छिड़े बसंती

जन-जन

से मन जोड़ मिला, कंचन-कुसुमाकर

उगी

सुहानी भोर, उमंगें लिए बसंती

कवियों

की भी रही न पीछे कलम “कल्पना”

गज़लों

ने भी शेर, खूब कह दिये बसंती

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

ghate

sheet ke bhaaw-taaw, din bane basantee

·

gulashan

hue nihaal, aur gul khile basantee

·

ped-ped

ne poorn puraane wastr tyaagakar

·

phir

se ho taiyaar, gaat par dhare basantee

·

amaraaee

men jaa pahunchee pat khol kokilaa

·

jee

bhar choose aam, madhur ras bhare basantee

·

peet-sunaharee

sarason ne bhee khoob sajaae

·

khet-khet

men khile-khile, silasile basantee

·

phulawaaree

kee god bharee nanhen munnon se

·

kilakaaree

ke bol, hawaa men ghule basantee

·

kalikaaon

kee saras raaginee, sunakar sur men

·

bhanvaron

ne dee taal, taraane chide basantee

·

jan-jan

se man jod milaa, kanchan-kusumaakar

·

ugee

suhaanee bhor, umangen lie basantee

·

kawiyon

kee bhee rahee n peeche kalam “kalpanaa”

·

gazalon

ne bhee sher, khoob kah diye basantee

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

घटे

शीत के भाव-ताव, दिन बने बसंती

गुलशन

हुए निहाल, और गुल खिले बसंती

पेड़-पेड़

ने पूर्ण पुराने वस्त्र त्यागकर

फिर

से हो तैयार, गात पर धरे बसंती

अमराई

में जा पहुँची पट खोल कोकिला

जी

भर चूसे आम, मधुर रस भरे बसंती

पीत-सुनहरी

सरसों ने भी खूब सजाए

खेत-खेत

में खिले-खिले, सिलसिले बसंती

फुलवारी

की गोद भरी नन्हें मुन्नों से

किलकारी

के बोल, हवा में घुले बसंती

कलिकाओं

की सरस रागिनी, सुनकर सुर में

भँवरों

ने दी ताल, तराने छिड़े बसंती

जन-जन

से मन जोड़ मिला, कंचन-कुसुमाकर

उगी

सुहानी भोर, उमंगें लिए बसंती

कवियों

की भी रही न पीछे कलम “कल्पना”

गज़लों

ने भी शेर, खूब कह दिये बसंती

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗