कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ६८ / २०४ № 68 of 204 रचना ६८ / २०४
२३ फ़रवरी २०१५ 23 February 2015 २३ फ़रवरी २०१५

हरेक बात पे सौ बार जब विचार करो harek baat pe sau baar jab wichaar karo हरेक बात पे सौ बार जब विचार करो

हरेक

बात पे सौ बार जब विचार करो

किसी

के वादे पे तब दोस्त! ऐतबार करो

ये

जान लो कि नकाबों में हैं छिपे धोखे

शकल

न देखके तीखी अकल की धार करो

जो

तुमपे जाँ भी लुटाने को हो सदा तत्पर

उसी

पे जान-ओ-जिगर अपना भी निसार करो

निभाओ

उनसे जो सदमित्र हैं सदा के लिए

कि

मित्रता की कभी पीठ पर न वार करो

अगर

न तूफां में तुम्हें साथ दे सके दीपक

जलाके

मन का दिया राह में उजार करो

धकेलने

को तुम्हें खाइयों में जग आतुर

जुगत के पुल से सभी खाइयों को पार करो

मनुष्य

हो, ये कभी “कल्पना” न भूलो तुम

मनुष्यता

से ही ऐ दोस्त! सच्चा प्यार करो

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

harek

baat pe sau baar jab wichaar karo

·

kisee

ke waade pe tab dost! aitabaar karo

·

ye

jaan lo ki nakaabon men hain chipe dhokhe

·

shakal

n dekhake teekhee akal kee dhaar karo

·

jo

tumape jaan bhee lutaane ko ho sadaa tatpar

·

usee

pe jaan-o-jigar apanaa bhee nisaar karo

·

nibhaao

unase jo sadamitr hain sadaa ke lie

·

ki

mitrataa kee kabhee peeth par n waar karo

·

agar

n toophaan men tumhen saath de sake deepak

·

jalaake

man kaa diyaa raah men ujaar karo

·

dhakelane

ko tumhen khaaiyon men jag aatur

·

jugat ke pul se sabhee khaaiyon ko paar karo

·

manushy

ho, ye kabhee “kalpanaa” n bhoolo tum

·

manushyataa

se hee ai dost! sachchaa pyaar karo

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

हरेक

बात पे सौ बार जब विचार करो

किसी

के वादे पे तब दोस्त! ऐतबार करो

ये

जान लो कि नकाबों में हैं छिपे धोखे

शकल

न देखके तीखी अकल की धार करो

जो

तुमपे जाँ भी लुटाने को हो सदा तत्पर

उसी

पे जान-ओ-जिगर अपना भी निसार करो

निभाओ

उनसे जो सदमित्र हैं सदा के लिए

कि

मित्रता की कभी पीठ पर न वार करो

अगर

न तूफां में तुम्हें साथ दे सके दीपक

जलाके

मन का दिया राह में उजार करो

धकेलने

को तुम्हें खाइयों में जग आतुर

जुगत के पुल से सभी खाइयों को पार करो

मनुष्य

हो, ये कभी “कल्पना” न भूलो तुम

मनुष्यता

से ही ऐ दोस्त! सच्चा प्यार करो

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗