मातृ-वंदना maatrii-wandanaa मातृ-वंदना
जिसके कर कमलों से यह घर
स्वर्ग सा बना।
उस माँ की हम, निस दिन मन से
करें वंदना।
जिसके दम से, हैं जीवन में
सदा उजाले
उसके जीवन, में उजास की
रहे कामना।
जिसने ममता, के आगे निज
किया निछावर
उस ममत्व को, करें नमन
रख शुद्ध भावना।
आजीवन जो, रही दायिनी
संतति के हित
उसके हित के, लिए करे
संतान प्रार्थना।
धूप वरण कर, जिसने हमको
सदा छाँव दी
हम उपाय वे करें न माँ को
छुए वेदना।
सारे संचित पुण्य सौंपती
जो संतति को
फर्ज़ यही, संतान उसे
सौंपे न यातना।
जिस देवी ने संस्कारों से
सींचा हमको
उसके चूमें कदम, सफल
तभी साध्य-साधना।
शीश झुकाते सुर त्रिलोक के
जिसके द्वारे
वंचित हो उस मातृ-प्रेम से
कोई द्वार ना।
जिसने पाया मूर्त मातृ-सुख
इस जीवन में
भव में वो इंसान सुखी है
सदा “कल्पना”
jisake kar kamalon se yah ghar
svarg saa banaa
us maan kee ham, nis din man se
karen wandanaa
jisake dam se, hain jeewan men
sadaa ujaale
usake jeewan, men ujaas kee
rahe kaamanaa
jisane mamataa, ke aage nij
kiyaa nichaawar
us mamatv ko, karen naman
rakh shuddh bhaawanaa
aajeewan jo, rahee daayinee
santati ke hit
usake hit ke, lie kare
santaan praarthanaa
dhoop waran kar, jisane hamako
sadaa chaanv dee
ham upaay we karen n maan ko
chue wedanaa
saare sanchit puny saunpatee
jo santati ko
pharz yahee, santaan use
saunpe n yaatanaa
jis dewee ne sanskaaron se
seenchaa hamako
usake choomen kadam, saphal
tabhee saadhy-saadhanaa
sheesh jhukaate sur trilok ke
jisake dvaare
wanchit ho us maatrii-prem se
koee dvaar naa
jisane paayaa moort maatrii-sukh
is jeewan men
bhaw men wo insaan sukhee hai
sadaa “kalpanaa”
जिसके कर कमलों से यह घर
स्वर्ग सा बना।
उस माँ की हम, निस दिन मन से
करें वंदना।
जिसके दम से, हैं जीवन में
सदा उजाले
उसके जीवन, में उजास की
रहे कामना।
जिसने ममता, के आगे निज
किया निछावर
उस ममत्व को, करें नमन
रख शुद्ध भावना।
आजीवन जो, रही दायिनी
संतति के हित
उसके हित के, लिए करे
संतान प्रार्थना।
धूप वरण कर, जिसने हमको
सदा छाँव दी
हम उपाय वे करें न माँ को
छुए वेदना।
सारे संचित पुण्य सौंपती
जो संतति को
फर्ज़ यही, संतान उसे
सौंपे न यातना।
जिस देवी ने संस्कारों से
सींचा हमको
उसके चूमें कदम, सफल
तभी साध्य-साधना।
शीश झुकाते सुर त्रिलोक के
जिसके द्वारे
वंचित हो उस मातृ-प्रेम से
कोई द्वार ना।
जिसने पाया मूर्त मातृ-सुख
इस जीवन में
भव में वो इंसान सुखी है
सदा “कल्पना”