कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १६९ / २०४ № 169 of 204 रचना १६९ / २०४
१० नवम्बर २०१९ 10 November 2019 १० नवम्बर २०१९

मातृ-वंदना maatrii-wandanaa मातृ-वंदना

जिसके कर कमलों से यह घर

स्वर्ग सा बना।

उस माँ की हम, निस दिन मन से

करें वंदना।

जिसके दम से, हैं जीवन में

सदा उजाले

उसके जीवन, में उजास की

रहे कामना।

जिसने ममता, के आगे निज

किया निछावर

उस ममत्व को, करें नमन

रख शुद्ध भावना।

आजीवन जो, रही दायिनी

संतति के हित

उसके हित के, लिए करे

संतान प्रार्थना।

धूप वरण कर, जिसने हमको

सदा छाँव दी

हम उपाय वे करें न माँ को

छुए वेदना।

सारे संचित पुण्य सौंपती

जो संतति को

फर्ज़ यही, संतान उसे

सौंपे न यातना।

जिस देवी ने संस्कारों से

सींचा हमको

उसके चूमें कदम, सफल

तभी साध्य-साधना।

शीश झुकाते सुर त्रिलोक के

जिसके द्वारे

वंचित हो उस मातृ-प्रेम से

कोई द्वार ना।

जिसने पाया मूर्त मातृ-सुख

इस जीवन में

भव में वो इंसान सुखी है

सदा “कल्पना”

jisake kar kamalon se yah ghar

svarg saa banaa

us maan kee ham, nis din man se

karen wandanaa

·

jisake dam se, hain jeewan men

sadaa ujaale

usake jeewan, men ujaas kee

rahe kaamanaa

·

jisane mamataa, ke aage nij

kiyaa nichaawar

us mamatv ko, karen naman

rakh shuddh bhaawanaa

·

aajeewan jo, rahee daayinee

santati ke hit

usake hit ke, lie kare

santaan praarthanaa

·

dhoop waran kar, jisane hamako

sadaa chaanv dee

ham upaay we karen n maan ko

chue wedanaa

·

saare sanchit puny saunpatee

jo santati ko

pharz yahee, santaan use

saunpe n yaatanaa

·

jis dewee ne sanskaaron se

seenchaa hamako

usake choomen kadam, saphal

tabhee saadhy-saadhanaa

·

sheesh jhukaate sur trilok ke

jisake dvaare

wanchit ho us maatrii-prem se

koee dvaar naa

·

jisane paayaa moort maatrii-sukh

is jeewan men

bhaw men wo insaan sukhee hai

sadaa “kalpanaa”

जिसके कर कमलों से यह घर

स्वर्ग सा बना।

उस माँ की हम, निस दिन मन से

करें वंदना।

जिसके दम से, हैं जीवन में

सदा उजाले

उसके जीवन, में उजास की

रहे कामना।

जिसने ममता, के आगे निज

किया निछावर

उस ममत्व को, करें नमन

रख शुद्ध भावना।

आजीवन जो, रही दायिनी

संतति के हित

उसके हित के, लिए करे

संतान प्रार्थना।

धूप वरण कर, जिसने हमको

सदा छाँव दी

हम उपाय वे करें न माँ को

छुए वेदना।

सारे संचित पुण्य सौंपती

जो संतति को

फर्ज़ यही, संतान उसे

सौंपे न यातना।

जिस देवी ने संस्कारों से

सींचा हमको

उसके चूमें कदम, सफल

तभी साध्य-साधना।

शीश झुकाते सुर त्रिलोक के

जिसके द्वारे

वंचित हो उस मातृ-प्रेम से

कोई द्वार ना।

जिसने पाया मूर्त मातृ-सुख

इस जीवन में

भव में वो इंसान सुखी है

सदा “कल्पना”

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗