कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १६५ / २०४ № 165 of 204 रचना १६५ / २०४
९ नवम्बर २०१९ 9 November 2019 ९ नवम्बर २०१९

जो रस्ते क्रूर होते कंटकों वाले jo raste kroor hote kantakon waale जो रस्ते क्रूर होते कंटकों वाले

जो

रस्ते क्रूर होते, कंटकों वाले

चला

करते हैं उनपर, हौसलों वाले

जड़ों

से हैं जुड़े तरुवर, ये जो इनको

डरा

सकते न मौसम, आँधियों वाले

ये

हैं बगुले भगत, जो भोग की खातिर

धरा

करते वसन हैं, योगियों वाले

बचो

उन पशु नरों से, जालघर पर जो

रचाते

भेस अक्सर, नारियों वाले

सजग

रहना सदा उन दुश्मनों से तुम

जो

रख अंदाज़ मिलते, दोस्तों वाले

तक़ाज़ा

देश का है साथ जुट जाओ

भुलाकर

भेद मस्जिद, मंदिरों वाले

मुड़े

किस ओर जाने मुल्क की किश्ती

कि

कर, पतवार पर हैं लोभियों वाले

बसाओ

दिल समय है ‘कल्पना’ अब भी

कि

लौटो छोड़कर घर पत्थरों वाले

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

jo

raste kroor hote, kantakon waale

·

chalaa

karate hain unapar, hausalon waale

·

jadon

se hain jude taruwar, ye jo inako

·

daraa

sakate n mausam, aandhiyon waale

·

ye

hain bagule bhagat, jo bhog kee khaatir

·

dharaa

karate wasan hain, yogiyon waale

·

bacho

un pashu naron se, jaalaghar par jo

·

rachaate

bhes aksar, naariyon waale

·

sajag

rahanaa sadaa un dushmanon se tum

·

jo

rakh andaaz milate, doston waale

·

taqaazaa

desh kaa hai saath jut jaao

·

bhulaakar

bhed masjid, mandiron waale

·

mude

kis or jaane mulk kee kishtee

·

ki

kar, patawaar par hain lobhiyon waale

·

basaao

dil samay hai ‘kalpanaa’ ab bhee

·

ki

lauto chodakar ghar pattharon waale

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

जो

रस्ते क्रूर होते, कंटकों वाले

चला

करते हैं उनपर, हौसलों वाले

जड़ों

से हैं जुड़े तरुवर, ये जो इनको

डरा

सकते न मौसम, आँधियों वाले

ये

हैं बगुले भगत, जो भोग की खातिर

धरा

करते वसन हैं, योगियों वाले

बचो

उन पशु नरों से, जालघर पर जो

रचाते

भेस अक्सर, नारियों वाले

सजग

रहना सदा उन दुश्मनों से तुम

जो

रख अंदाज़ मिलते, दोस्तों वाले

तक़ाज़ा

देश का है साथ जुट जाओ

भुलाकर

भेद मस्जिद, मंदिरों वाले

मुड़े

किस ओर जाने मुल्क की किश्ती

कि

कर, पतवार पर हैं लोभियों वाले

बसाओ

दिल समय है ‘कल्पना’ अब भी

कि

लौटो छोड़कर घर पत्थरों वाले

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗