कभी तो दिन वो आएगा kabhee to din wo aaegaa कभी तो दिन वो आएगा
कभी तो दिन वो आएगा
सभी के अपने घर होंगे।
मिलेंगी रोटियाँ सबको
न सपने दर-बदर होंगे।
मिलेंगे बाग खेतों से
न होगी बीच में खाई
पलायन गाँव छोड़ेंगे
सदय पालक शहर होंगे।
रखेंगे रास्ते पक्के
लगा सीने से गलियों को
बढ़ेंगे शुभ कदम जिस पथ
प्रगति के दर उधर होंगे।
जुड़ेगी धूप छाया से
विभाजन की मिटा रेखा।
चढ़ेंगे गाँव जब सीढ़ी
शहर भी हमसफर होंगे।
हवाएँ एक सी बहतीं
वही जल अन्न है सबका।
दिलों से दिल मिलेंगे
स्वाद भी साझे अगर होंगे।
जलेंगे दीप घर घर में
रहेगा पर्व हर मौसम।
पपीहे मोर गाएँगे
मधुर कोकिल के स्वर होंगे।
विफल हर चाल दुश्मन की
करेंगे देशप्रेमी सब।
हमारे दस्तखत जग के
फ़लक पर पुरअसर होंगे।
kabhee to din wo aaegaa
sabhee ke apane ghar honge
milengee rotiyaan sabako
n sapane dar-badar honge
milenge baag kheton se
n hogee beech men khaaee
palaayan gaanv chodenge
saday paalak shahar honge
rakhenge raaste pakke
lagaa seene se galiyon ko
bढ़enge shubh kadam jis path
pragati ke dar udhar honge
judegee dhoop chaayaa se
wibhaajan kee mitaa rekhaa
chढ़enge gaanv jab seeढ़ee
shahar bhee hamasaphar honge
hawaaen ek see bahateen
wahee jal ann hai sabakaa
dilon se dil milenge
svaad bhee saajhe agar honge
jalenge deep ghar ghar men
rahegaa parv har mausam
papeehe mor gaaenge
madhur kokil ke svar honge
wiphal har chaal dushman kee
karenge deshapremee sab
hamaare dastakhat jag ke
falak par puraasar honge
कभी तो दिन वो आएगा
सभी के अपने घर होंगे।
मिलेंगी रोटियाँ सबको
न सपने दर-बदर होंगे।
मिलेंगे बाग खेतों से
न होगी बीच में खाई
पलायन गाँव छोड़ेंगे
सदय पालक शहर होंगे।
रखेंगे रास्ते पक्के
लगा सीने से गलियों को
बढ़ेंगे शुभ कदम जिस पथ
प्रगति के दर उधर होंगे।
जुड़ेगी धूप छाया से
विभाजन की मिटा रेखा।
चढ़ेंगे गाँव जब सीढ़ी
शहर भी हमसफर होंगे।
हवाएँ एक सी बहतीं
वही जल अन्न है सबका।
दिलों से दिल मिलेंगे
स्वाद भी साझे अगर होंगे।
जलेंगे दीप घर घर में
रहेगा पर्व हर मौसम।
पपीहे मोर गाएँगे
मधुर कोकिल के स्वर होंगे।
विफल हर चाल दुश्मन की
करेंगे देशप्रेमी सब।
हमारे दस्तखत जग के
फ़लक पर पुरअसर होंगे।