पेड़ पावन नीम का//गज़ल// ped paawan neem kaa//gazal// पेड़ पावन नीम का//गज़ल//
गर्मियों
में खिलखिलाता, पेड़ पावन नीम का।
नम हवा की तह बिछाता, पेड़ पावन नीम
का।
पीत होते पात सब पेड़ों
के जब वैसाख में
लहलहाकर मुस्कुराता, पेड़ पावन नीम
का।
सब्ज़ पत्तों का चँदोवा, तानकर भर
दोपहर
धूप
से राहत दिलाता, पेड़ पावन नीम का।
छाँव इसकी दृष्ट होती, धूप में ज्यों
चाँदनी
श्वेत पुष्पों से
रिझाता, पेड़ पावन नीम का।
आसमाँ से जब फुहारें, तन पे पड़तीं
सावनी
डाल पर झूला झुलाता, पेड़ पावन नीम
का।
हाँफकर प्यासे परिंदे, आसरा जब
ढूँढते
अंक में अपने बसाता, पेड़ पावन नीम
का।
फूल, पत्ते, छाल, डाली, बाँटता बनकर
हक़ीम
रोग हर जड़ से मिटाता, पेड़ पेड़ पावन
नीम का।
शुद्धतम इसकी हवा है, ज्यों कोई
संजीवनी
जीव-जन का प्राण दाता, पेड़ पावन नीम
का।
गाँव हों या हों शहर, रोपें इसे, वर्धित करें
साथ जन्मों तक निभाता, पेड़ पावन नीम
का।
- कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
garmiyon
men khilakhilaataa, ped paawan neem kaa
nam hawaa kee tah bichaataa, ped paawan neem
kaa
peet hote paat sab pedon
ke jab waisaakh men
lahalahaakar muskuraataa, ped paawan neem
kaa
sabz patton kaa chandowaa, taanakar bhar
dopahar
dhoop
se raahat dilaataa, ped paawan neem kaa
chaanv isakee driisht hotee, dhoop men jyon
chaandanee
shvet pushpon se
rijhaataa, ped paawan neem kaa
aasamaan se jab phuhaaren, tan pe padateen
saawanee
daal par jhoolaa jhulaataa, ped paawan neem
kaa
haanphakar pyaase parinde, aasaraa jab
dhoondhate
ank men apane basaataa, ped paawan neem
kaa
phool, patte, chaal, daalee, baantataa banakar
haqeem
rog har jad se mitaataa, ped ped paawan
neem kaa
shuddhatam isakee hawaa hai, jyon koee
sanjeewanee
jeew-jan kaa praan daataa, ped paawan neem
kaa
gaanv hon yaa hon shahar, ropen ise, wardhit karen
saath janmon tak nibhaataa, ped paawan neem
kaa
- kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
गर्मियों
में खिलखिलाता, पेड़ पावन नीम का।
नम हवा की तह बिछाता, पेड़ पावन नीम
का।
पीत होते पात सब पेड़ों
के जब वैसाख में
लहलहाकर मुस्कुराता, पेड़ पावन नीम
का।
सब्ज़ पत्तों का चँदोवा, तानकर भर
दोपहर
धूप
से राहत दिलाता, पेड़ पावन नीम का।
छाँव इसकी दृष्ट होती, धूप में ज्यों
चाँदनी
श्वेत पुष्पों से
रिझाता, पेड़ पावन नीम का।
आसमाँ से जब फुहारें, तन पे पड़तीं
सावनी
डाल पर झूला झुलाता, पेड़ पावन नीम
का।
हाँफकर प्यासे परिंदे, आसरा जब
ढूँढते
अंक में अपने बसाता, पेड़ पावन नीम
का।
फूल, पत्ते, छाल, डाली, बाँटता बनकर
हक़ीम
रोग हर जड़ से मिटाता, पेड़ पेड़ पावन
नीम का।
शुद्धतम इसकी हवा है, ज्यों कोई
संजीवनी
जीव-जन का प्राण दाता, पेड़ पावन नीम
का।
गाँव हों या हों शहर, रोपें इसे, वर्धित करें
साथ जन्मों तक निभाता, पेड़ पावन नीम
का।
- कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
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-कल्पना रामानी