कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १३६ / २०४ № 136 of 204 रचना १३६ / २०४
२५ अगस्त २०१६ 25 August 2016 २५ अगस्त २०१६

नाम कृष्ण का naam kriishn kaa नाम कृष्ण का

अंतर्घट की प्यास बुझाता, नाम कृष्ण का।

सदा मोक्ष का द्वार दिखाता, नाम कृष्ण का।

मानव-मन पर असुर दैत्य जब हावी होते

मलिन हृदय निर्मल कर जाता, नाम कृष्ण का।

भवसागर में जब नैया, हिचकोले खाती

बन पतवार, किनारे लाता, नाम कृष्ण का।

राह भटकता अन्तर्मन, आलोकित करके

गीता के संदेश सुनाता, नाम कृष्ण का।

निराकार है, पर देखें यदि, ध्यान लगाकर

सगुण ब्रह्म का बोध कराता, नाम कृष्ण का।

लाख बलाएँ, रोग, दोष, हों भू पर काबिज

हर बाधा को हर ले जाता, नाम कृष्ण का।

गोकुल-मथुरा मध्य उफनती, यमुना का जल

पुरा काल से याद दिलाता, नाम कृष्ण का।

भादों में जब कृष्ण जन्म का, पर्व मनाते

भारत-भू पावन कर जाता, नाम कृष्ण का।

यूँ तो हैं भगवान ‘कल्पना’ सभी बराबर

पर खुद से पहचान कराता, नाम कृष्ण का।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

antarghat kee pyaas bujhaataa, naam kriishn kaa

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sadaa moksh kaa dvaar dikhaataa, naam kriishn kaa

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maanaw-man par asur daity jab haawee hote

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malin hriiday nirmal kar jaataa, naam kriishn kaa

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bhawasaagar men jab naiyaa, hichakole khaatee

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ban patawaar, kinaare laataa, naam kriishn kaa

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raah bhatakataa antarman, aalokit karake

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geetaa ke sandesh sunaataa, naam kriishn kaa

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niraakaar hai, par dekhen yadi, dhyaan lagaakar

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sagun brahm kaa bodh karaataa, naam kriishn kaa

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laakh balaaen, rog, dosh, hon bhoo par kaabij

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har baadhaa ko har le jaataa, naam kriishn kaa

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gokul-mathuraa madhy uphanatee, yamunaa kaa jal

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puraa kaal se yaad dilaataa, naam kriishn kaa

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bhaadon men jab kriishn janm kaa, parv manaate

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bhaarat-bhoo paawan kar jaataa, naam kriishn kaa

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yoon to hain bhagawaan ‘kalpanaa’ sabhee baraabar

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par khud se pahachaan karaataa, naam kriishn kaa

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-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

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-kalpanaa raamaanee

अंतर्घट की प्यास बुझाता, नाम कृष्ण का।

सदा मोक्ष का द्वार दिखाता, नाम कृष्ण का।

मानव-मन पर असुर दैत्य जब हावी होते

मलिन हृदय निर्मल कर जाता, नाम कृष्ण का।

भवसागर में जब नैया, हिचकोले खाती

बन पतवार, किनारे लाता, नाम कृष्ण का।

राह भटकता अन्तर्मन, आलोकित करके

गीता के संदेश सुनाता, नाम कृष्ण का।

निराकार है, पर देखें यदि, ध्यान लगाकर

सगुण ब्रह्म का बोध कराता, नाम कृष्ण का।

लाख बलाएँ, रोग, दोष, हों भू पर काबिज

हर बाधा को हर ले जाता, नाम कृष्ण का।

गोकुल-मथुरा मध्य उफनती, यमुना का जल

पुरा काल से याद दिलाता, नाम कृष्ण का।

भादों में जब कृष्ण जन्म का, पर्व मनाते

भारत-भू पावन कर जाता, नाम कृष्ण का।

यूँ तो हैं भगवान ‘कल्पना’ सभी बराबर

पर खुद से पहचान कराता, नाम कृष्ण का।

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗