कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ४७ / ६३ № 47 of 63 रचना ४७ / ६३
२४ अगस्त २०१६ 24 August 2016 २४ अगस्त २०१६

जन्मे थे गोपाल janme the gopaal जन्मे थे गोपाल

कथा

सुनाते वेद हैं, वह था द्वापर काल।

कृष्ण

भाद्रपद अष्टमी, जन्में थे नंदलाल।

जन्में

थे नंदलाल, रात आधी थी तम की

भू

पर आए ईश, मिटाने

छाया गम की।

यह

दिन पावन मान, पर्व सब लोग मनाते

वह

था द्वापर काल, वेद हैं कथा सुनाते।

कहते

पर्व प्रधान है, भारत देश विशाल।

कृष्ण

जन्म का पर्व भी, मनता है हर साल।

मनता

है हर साल, झाँकियाँ जोड़ी जातीं

हर

चौराहे टाँग, मटकियाँ फोड़ी

जातीं।

मोहन

kathaa

sunaate wed hain, wah thaa dvaapar kaal

·

kriishn

bhaadrapad ashtamee, janmen the nandalaal

·

janmen

the nandalaal, raat aadhee thee tam kee

·

bhoo

par aae eesh, mitaane

chaayaa gam kee

·

yah

din paawan maan, parv sab log manaate

·

wah

thaa dvaapar kaal, wed hain kathaa sunaate

·

kahate

parv pradhaan hai, bhaarat desh wishaal

·

kriishn

janm kaa parv bhee, manataa hai har saal

·

manataa

hai har saal, jhaankiyaan jodee jaateen

·

har

chauraahe taang, matakiyaan phodee

jaateen

·

mohan

कथा

सुनाते वेद हैं, वह था द्वापर काल।

कृष्ण

भाद्रपद अष्टमी, जन्में थे नंदलाल।

जन्में

थे नंदलाल, रात आधी थी तम की

भू

पर आए ईश, मिटाने

छाया गम की।

यह

दिन पावन मान, पर्व सब लोग मनाते

वह

था द्वापर काल, वेद हैं कथा सुनाते।

कहते

पर्व प्रधान है, भारत देश विशाल।

कृष्ण

जन्म का पर्व भी, मनता है हर साल।

मनता

है हर साल, झाँकियाँ जोड़ी जातीं

हर

चौराहे टाँग, मटकियाँ फोड़ी

जातीं।

मोहन

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗