नारी अब तो उड़ चली naaree ab to ud chalee नारी अब तो उड़ चली
नारी
अब तो उड़ चली, आसमान की ओर।
चाँद
सितारे छू रही, थाम विश्व की
डोर।
थाम
विश्व की डोर, जगत ने शीश नवाया
दृढ़
निश्चय के साथ, हार को जीत
दिखाया।
पाया
यश सम्मान, दंग है
दुनिया सारी।
नये
वक्त के साथ, चल पड़ी है अब
नारी।
घरनी
से ही घर सजे, जुड़ें दिलों
के तार
श्रम
उसका अनमोल है, घर की वो
आधार।
घर
की वो आधार, महकता रहता
आँगन
बरसे
प्यार अपार, लगे पतझड़ भी सावन।
सीधी
सच्ची बात, ‘कल्पना’ इतनी
naaree
ab to ud chalee, aasamaan kee or
chaand
sitaare choo rahee, thaam wishv kee
dor
thaam
wishv kee dor, jagat ne sheesh nawaayaa
driiढ़
nishchay ke saath, haar ko jeet
dikhaayaa
paayaa
yash sammaan, dang hai
duniyaa saaree
naye
wakt ke saath, chal padee hai ab
naaree
gharanee
se hee ghar saje, juden dilon
ke taar
shram
usakaa anamol hai, ghar kee wo
aadhaar
ghar
kee wo aadhaar, mahakataa rahataa
aangan
barase
pyaar apaar, lage patajhad bhee saawan
seedhee
sachchee baat, ‘kalpanaa’ itanee
नारी
अब तो उड़ चली, आसमान की ओर।
चाँद
सितारे छू रही, थाम विश्व की
डोर।
थाम
विश्व की डोर, जगत ने शीश नवाया
दृढ़
निश्चय के साथ, हार को जीत
दिखाया।
पाया
यश सम्मान, दंग है
दुनिया सारी।
नये
वक्त के साथ, चल पड़ी है अब
नारी।
घरनी
से ही घर सजे, जुड़ें दिलों
के तार
श्रम
उसका अनमोल है, घर की वो
आधार।
घर
की वो आधार, महकता रहता
आँगन
बरसे
प्यार अपार, लगे पतझड़ भी सावन।
सीधी
सच्ची बात, ‘कल्पना’ इतनी