कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना २७ / ६३ № 27 of 63 रचना २७ / ६३
७ मार्च २०१३ 7 March 2013 ७ मार्च २०१३

नारी अब तो उड़ चली naaree ab to ud chalee नारी अब तो उड़ चली

नारी

अब तो उड़ चली, आसमान की ओर।

चाँद

सितारे छू रही, थाम विश्व की

डोर।

थाम

विश्व की डोर, जगत ने शीश नवाया

दृढ़

निश्चय के साथ, हार को जीत

दिखाया।

पाया

यश सम्मान, दंग है

दुनिया सारी।

नये

वक्त के साथ, चल पड़ी है अब

नारी।

घरनी

से ही घर सजे, जुड़ें दिलों

के तार

श्रम

उसका अनमोल है, घर की वो

आधार।

घर

की वो आधार, महकता रहता

आँगन

बरसे

प्यार अपार, लगे पतझड़ भी सावन।

सीधी

सच्ची बात, ‘कल्पना’ इतनी

naaree

ab to ud chalee, aasamaan kee or

·

chaand

sitaare choo rahee, thaam wishv kee

dor

·

thaam

wishv kee dor, jagat ne sheesh nawaayaa

·

driiढ़

nishchay ke saath, haar ko jeet

dikhaayaa

·

paayaa

yash sammaan, dang hai

duniyaa saaree

·

naye

wakt ke saath, chal padee hai ab

naaree

·

gharanee

se hee ghar saje, juden dilon

ke taar

·

shram

usakaa anamol hai, ghar kee wo

aadhaar

·

ghar

kee wo aadhaar, mahakataa rahataa

aangan

·

barase

pyaar apaar, lage patajhad bhee saawan

·

seedhee

sachchee baat, ‘kalpanaa’ itanee

नारी

अब तो उड़ चली, आसमान की ओर।

चाँद

सितारे छू रही, थाम विश्व की

डोर।

थाम

विश्व की डोर, जगत ने शीश नवाया

दृढ़

निश्चय के साथ, हार को जीत

दिखाया।

पाया

यश सम्मान, दंग है

दुनिया सारी।

नये

वक्त के साथ, चल पड़ी है अब

नारी।

घरनी

से ही घर सजे, जुड़ें दिलों

के तार

श्रम

उसका अनमोल है, घर की वो

आधार।

घर

की वो आधार, महकता रहता

आँगन

बरसे

प्यार अपार, लगे पतझड़ भी सावन।

सीधी

सच्ची बात, ‘कल्पना’ इतनी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗