कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना २६ / ६३ № 26 of 63 रचना २६ / ६३
१० फ़रवरी २०१३ 10 February 2013 १० फ़रवरी २०१३

ऋतु बसंत के संग riitu basant ke sang ऋतु बसंत के संग

पलकें

कोयल की खुलीं, ऋतु बसंत के संग।

॥

कुहू

कुहू की तान से, कुदरत भी है दंग।

॥

कुदरत

भी है दंग, उमंगित है अमराई

॥

आम्र

बौर से आज, हो रही गोद भराई।

॥

झूम

रहे तरु पात, हर तरफ खुशियाँ

झलकें।

॥

ऋतु

बसंत के साथ, खुलीं कोयल की पलकें।

॥

उतरी

भू पर स्वर्ग से, एक अप्सरा आज।

॥

देखा

शोभित शीश पर, ऋतु बसंत का ताज।

॥

ऋतु

बसंत का ताज, रंग थे इतने प्यारे!

॥

आल्हादित

मन-प्राण, हो

उठे देख नज़ारे।

palaken

koyal kee khuleen, riitu basant ke sang

·

kuhoo

kuhoo kee taan se, kudarat bhee hai dang

·

kudarat

bhee hai dang, umangit hai amaraaee

·

aamr

baur se aaj, ho rahee god bharaaee

·

jhoom

rahe taru paat, har taraph khushiyaan

jhalaken

·

riitu

basant ke saath, khuleen koyal kee palaken

·

utaree

bhoo par svarg se, ek apsaraa aaj

·

dekhaa

shobhit sheesh par, riitu basant kaa taaj

·

riitu

basant kaa taaj, rang the itane pyaare!

·

aalhaadit

man-praan, ho

uthe dekh nazaare

पलकें

कोयल की खुलीं, ऋतु बसंत के संग।

॥

कुहू

कुहू की तान से, कुदरत भी है दंग।

॥

कुदरत

भी है दंग, उमंगित है अमराई

॥

आम्र

बौर से आज, हो रही गोद भराई।

॥

झूम

रहे तरु पात, हर तरफ खुशियाँ

झलकें।

॥

ऋतु

बसंत के साथ, खुलीं कोयल की पलकें।

॥

उतरी

भू पर स्वर्ग से, एक अप्सरा आज।

॥

देखा

शोभित शीश पर, ऋतु बसंत का ताज।

॥

ऋतु

बसंत का ताज, रंग थे इतने प्यारे!

॥

आल्हादित

मन-प्राण, हो

उठे देख नज़ारे।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗