ऋतु बसंत के संग riitu basant ke sang ऋतु बसंत के संग
पलकें
कोयल की खुलीं, ऋतु बसंत के संग।
कुहू
कुहू की तान से, कुदरत भी है दंग।
कुदरत
भी है दंग, उमंगित है अमराई
आम्र
बौर से आज, हो रही गोद भराई।
झूम
रहे तरु पात, हर तरफ खुशियाँ
झलकें।
ऋतु
बसंत के साथ, खुलीं कोयल की पलकें।
उतरी
भू पर स्वर्ग से, एक अप्सरा आज।
देखा
शोभित शीश पर, ऋतु बसंत का ताज।
ऋतु
बसंत का ताज, रंग थे इतने प्यारे!
आल्हादित
मन-प्राण, हो
उठे देख नज़ारे।
palaken
koyal kee khuleen, riitu basant ke sang
kuhoo
kuhoo kee taan se, kudarat bhee hai dang
kudarat
bhee hai dang, umangit hai amaraaee
aamr
baur se aaj, ho rahee god bharaaee
jhoom
rahe taru paat, har taraph khushiyaan
jhalaken
riitu
basant ke saath, khuleen koyal kee palaken
utaree
bhoo par svarg se, ek apsaraa aaj
dekhaa
shobhit sheesh par, riitu basant kaa taaj
riitu
basant kaa taaj, rang the itane pyaare!
aalhaadit
man-praan, ho
uthe dekh nazaare
पलकें
कोयल की खुलीं, ऋतु बसंत के संग।
कुहू
कुहू की तान से, कुदरत भी है दंग।
कुदरत
भी है दंग, उमंगित है अमराई
आम्र
बौर से आज, हो रही गोद भराई।
झूम
रहे तरु पात, हर तरफ खुशियाँ
झलकें।
ऋतु
बसंत के साथ, खुलीं कोयल की पलकें।
उतरी
भू पर स्वर्ग से, एक अप्सरा आज।
देखा
शोभित शीश पर, ऋतु बसंत का ताज।
ऋतु
बसंत का ताज, रंग थे इतने प्यारे!
आल्हादित
मन-प्राण, हो
उठे देख नज़ारे।