बसंती दोहे basantee dohe बसंती दोहे
ऋतु बसंत की आ गई, उत्सव का है दौर।
कोयल सुर में गा उठी, लदे आम पर बौर।
गुलमोहर कचनार भी, खिले खिले हैं आज।
पुष्प पल्लवों से सजा,ऋतु बसंत का ताज।
जंगल में मेला लगा, पशु पक्षी थे साथ।
चर्चाओं में खास थी, ऋतु रानी की बात।
कमी न हो जब अन्न की, जल के स्रोत अनंत।
महके हरित वसुंधरा, होगा सदा बसंत।
सरसों फूली खेत में, स्वर्णलता सी
riitu basant kee aa gaee, utsaw kaa hai daur
koyal sur men gaa uthee, lade aam par baur
gulamohar kachanaar bhee, khile khile hain aaj
pushp pallawon se sajaa,riitu basant kaa taaj
jangal men melaa lagaa, pashu pakshee the saath
charchaaon men khaas thee, riitu raanee kee baat
kamee n ho jab ann kee, jal ke srot anant
mahake harit wasundharaa, hogaa sadaa basant
sarason phoolee khet men, svarnalataa see
ऋतु बसंत की आ गई, उत्सव का है दौर।
कोयल सुर में गा उठी, लदे आम पर बौर।
गुलमोहर कचनार भी, खिले खिले हैं आज।
पुष्प पल्लवों से सजा,ऋतु बसंत का ताज।
जंगल में मेला लगा, पशु पक्षी थे साथ।
चर्चाओं में खास थी, ऋतु रानी की बात।
कमी न हो जब अन्न की, जल के स्रोत अनंत।
महके हरित वसुंधरा, होगा सदा बसंत।
सरसों फूली खेत में, स्वर्णलता सी