कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी दोहा Doha दोहो · रचना २१ / ६७ № 21 of 67 रचना २१ / ६७
७ फ़रवरी २०१३ 7 February 2013 ७ फ़रवरी २०१३

बसंती दोहे basantee dohe बसंती दोहे

ऋतु बसंत की आ गई, उत्सव का है दौर।

कोयल सुर में गा उठी, लदे आम पर बौर।

॥

गुलमोहर कचनार भी, खिले खिले हैं आज।

पुष्प पल्लवों से सजा,ऋतु बसंत का ताज।

॥

जंगल में मेला लगा, पशु पक्षी थे साथ।

चर्चाओं में खास थी, ऋतु रानी की बात।

॥

कमी न हो जब अन्न की, जल के स्रोत अनंत।

महके हरित वसुंधरा, होगा सदा बसंत।

॥

सरसों फूली खेत में, स्वर्णलता सी

riitu basant kee aa gaee, utsaw kaa hai daur

koyal sur men gaa uthee, lade aam par baur

·

gulamohar kachanaar bhee, khile khile hain aaj

pushp pallawon se sajaa,riitu basant kaa taaj

·

jangal men melaa lagaa, pashu pakshee the saath

charchaaon men khaas thee, riitu raanee kee baat

·

kamee n ho jab ann kee, jal ke srot anant

mahake harit wasundharaa, hogaa sadaa basant

·

sarason phoolee khet men, svarnalataa see

ऋतु बसंत की आ गई, उत्सव का है दौर।

कोयल सुर में गा उठी, लदे आम पर बौर।

॥

गुलमोहर कचनार भी, खिले खिले हैं आज।

पुष्प पल्लवों से सजा,ऋतु बसंत का ताज।

॥

जंगल में मेला लगा, पशु पक्षी थे साथ।

चर्चाओं में खास थी, ऋतु रानी की बात।

॥

कमी न हो जब अन्न की, जल के स्रोत अनंत।

महके हरित वसुंधरा, होगा सदा बसंत।

॥

सरसों फूली खेत में, स्वर्णलता सी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗